‘ठंडी चाय गर्म करो, बबीता मैम शर्म करो’ के नारों से गूंजा भोपाल का स्कूल, छात्रों के प्रदर्शन के बाद साइंस टीचर का ट्रांसफर

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भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के मिसरोद इलाके में स्थित नवीन शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल सोमवार को छात्रों के प्रदर्शन के कारण चर्चा में आ गया। स्कूल के बाहर बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने अपनी शिकायतों और मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने साइंस टीचर बबीता कुशवाहा के खिलाफ नारेबाजी की और कई तरह के आरोप लगाए। मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग भी सक्रिय हुआ और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) की ओर से संबंधित शिक्षिका के ट्रांसफर की कार्रवाई की गई।

यह पूरा मामला मुख्य रूप से 11वीं कक्षा के मैथ्स और बायोलॉजी वर्ग के विद्यार्थियों से जुड़ा बताया जा रहा है। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना था कि उन्होंने अपनी समस्याओं को लेकर पहले भी स्कूल प्रबंधन से शिकायत की थी। छात्रों के मुताबिक, उन्होंने 3 अक्टूबर को स्कूल के प्रिंसिपल को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन उनकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्हें प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा। सोमवार को स्कूल के बाहर छात्रों की भीड़ जुटने से स्थिति चर्चा का विषय बन गई।

छात्रों ने लगाए कई गंभीर आरोप

प्रदर्शन के दौरान विद्यार्थियों ने साइंस टीचर पर कई आरोप लगाए। छात्रों का दावा है कि उनसे प्रोजेक्ट वर्क सहित अन्य गतिविधियों के नाम पर नियमित रूप से पैसे मांगे जाते थे। विद्यार्थियों के अनुसार, हर महीने किसी न किसी काम के लिए उनसे राशि लेने की मांग की जाती थी। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षक का ध्यान कई बार कक्षा में पढ़ाने के बजाय मोबाइल फोन इस्तेमाल करने पर रहता था।

प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि वे स्कूल में पढ़ाई करने आते हैं, किसी कर्मचारी की तरह काम करने के लिए नहीं। छात्रों के अनुसार, उनसे रविवार को भी काम करवाने का दबाव बनाया जाता था। इसी तरह स्कूल से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों और प्रोजेक्ट कार्यों को लेकर भी उन्होंने अपनी आपत्ति दर्ज कराई।

छात्रों ने यह आरोप भी लगाया कि शिक्षिका की ओर से विज्ञान विषय को लेकर ऐसी टिप्पणी की जाती थी, जिससे उन्हें आर्थिक दबाव महसूस होता था। विद्यार्थियों के अनुसार, उनसे कहा जाता था कि विज्ञान की पढ़ाई वही विद्यार्थी कर सकते हैं जो उसका खर्च उठा सकते हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने आई जानकारी में नहीं हुई है और इस संबंध में विभागीय स्तर पर जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।

मारपीट के भी लगाए आरोप

मामले को और गंभीर बनाने वाला आरोप छात्रों की ओर से मारपीट को लेकर लगाया गया। प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने दावा किया कि कुछ सीनियर छात्रों के साथ कथित तौर पर लोहे के पाइप से मारपीट की गई। छात्रों ने इस आरोप को लेकर भी नाराजगी जताई और स्कूल प्रबंधन से कार्रवाई की मांग की।

हालांकि, किसी भी शिक्षक या स्कूल कर्मचारी पर लगाए गए ऐसे आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही मानी जा सकती है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी छात्रों की शिकायत और प्रदर्शन के दौरान लगाए गए आरोपों पर आधारित है। ऐसे में मामले की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए विभागीय जांच और संबंधित पक्षों के बयान महत्वपूर्ण होंगे।

‘ठंडी चाय गर्म करो, बबीता मैम शर्म करो’ के नारे

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने अलग-अलग नारों के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर की। इनमें ‘ठंडी चाय गर्म करो, बबीता मैम शर्म करो’ जैसे नारे भी शामिल रहे। छात्रों का कहना था कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए और स्कूल में पढ़ाई का वातावरण बेहतर बनाया जाए।

प्रदर्शन में शामिल विद्यार्थियों ने अपनी समस्याएं सार्वजनिक रूप से सामने रखते हुए स्कूल प्रशासन से जवाबदेही की मांग की। छात्रों का कहना था कि स्कूल में आने का उनका मुख्य उद्देश्य पढ़ाई करना है और उन्हें किसी भी तरह के अतिरिक्त दबाव या ऐसी गतिविधियों में शामिल नहीं किया जाना चाहिए, जिनसे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो।

3 अक्टूबर को दी गई थी लिखित शिकायत

छात्रों के मुताबिक, उन्होंने 3 अक्टूबर को ही स्कूल के प्रिंसिपल को लिखित शिकायत सौंप दी थी। विद्यार्थियों का कहना है कि शिकायत में उनके सामने आ रही समस्याओं का उल्लेख किया गया था। इसके बाद भी जब उन्हें लगा कि मामले पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्होंने स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया।

इस घटनाक्रम से सरकारी स्कूलों में शिकायत निवारण व्यवस्था और विद्यार्थियों की समस्याओं पर समय रहते ध्यान देने की जरूरत भी सामने आती है। स्कूल में किसी शिक्षक के खिलाफ शिकायत मिलने पर प्रशासन के लिए जरूरी होता है कि सभी संबंधित पक्षों की बात सुनी जाए और तथ्यों की जांच की जाए। इससे एक ओर विद्यार्थियों की सुरक्षा और विश्वास कायम रहता है, वहीं दूसरी ओर शिक्षक के पक्ष को भी निष्पक्ष रूप से सामने रखने का अवसर मिलता है।

विद्यार्थियों की ओर से यदि किसी शिक्षक के खिलाफ लिखित शिकायत दी जाती है, तो स्कूल प्रशासन और शिक्षा विभाग के लिए यह जरूरी होता है कि शिकायत को रिकॉर्ड में लेकर निष्पक्ष तरीके से उसकी जांच की जाए। वहीं, किसी शिक्षक पर लगाए गए आरोपों को भी बिना जांच के अंतिम सत्य नहीं माना जाना चाहिए। दोनों पक्षों की बात सुनकर तथ्यों के आधार पर निर्णय लेना ही उचित प्रक्रिया है।

फिलहाल मिसरोद के नवीन शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल में छात्रों के प्रदर्शन के बाद साइंस टीचर का ट्रांसफर कर दिया गया है। छात्रों द्वारा लगाए गए वसूली, मोबाइल इस्तेमाल, अतिरिक्त काम और मारपीट जैसे आरोपों पर आगे की विभागीय जांच से ही पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की शिकायतों को समय पर सुनने और उनके लिए भरोसेमंद शिकायत निवारण व्यवस्था सुनिश्चित करने की जरूरत को सामने ला दिया है।

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