कौशांबी में SIR विरोध प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला फूंकना सपा कार्यकर्ताओं को पड़ा भारी, पुलिस ने दर्ज किया केस

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कौशांबी। उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के विरोध में समाजवादी पार्टी की ओर से किए गए प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का सांकेतिक पुतला जलाना पार्टी कार्यकर्ताओं को भारी पड़ गया। 5 अक्टूबर को मंझनपुर चौराहे पर हुए प्रदर्शन के मामले में पुलिस ने कार्रवाई की है। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में सपा कार्यकर्ता जुटे थे और उन्होंने SIR को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया। इसी दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त के सांकेतिक पुतले का दहन किया गया।

SIR के विरोध में मंझनपुर चौराहे पर जुटे थे सपा कार्यकर्ता

मामला 5 अक्टूबर का है। कौशांबी जिले के मंझनपुर चौराहे पर समाजवादी पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने SIR के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर अपना विरोध जताया।

प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी नारेबाजी और विरोध दर्ज कराया गया। इसी दौरान उनके नाम का सांकेतिक पुतला तैयार कर उसे जलाया गया। राजनीतिक प्रदर्शनों में प्रतीकात्मक पुतला दहन विरोध दर्ज कराने का एक तरीका रहा है, लेकिन इस मामले में पुलिस ने मौके की स्थिति और पुतला जलाए जाने को लेकर कार्रवाई की।

पुलिस का कहना है कि पुतला जलाए जाने के कारण मौके पर धुआं फैल गया था, जिससे वहां कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बना। चौराहे पर बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के कारण पुलिस ने मामले को कानून-व्यवस्था से जोड़कर देखा।

इन सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के नाम कार्रवाई में शामिल

मामले में समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष दयाशंकर यादव समेत कई लोगों के नाम सामने आए हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक कार्रवाई में शहनवाज, चंद्रजीत यादव, राजू सिंह पटेल, भरत सिंह लोधी, आनंद मोहन पटेल, विभा यादव, सुमित पांडे और आफताब शेख समेत अन्य लोगों के नाम शामिल हैं।

पुलिस की कार्रवाई प्रदर्शन के दौरान हुई गतिविधियों और मौके की स्थिति को लेकर की गई है। मामले में शामिल लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस कार्रवाई के बाद स्थानीय राजनीतिक गतिविधियों में भी इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

हालांकि, उपलब्ध विवरण में मामले में लगाए गए सभी कानूनी प्रावधानों या प्राथमिकी की धाराओं का पूरा विवरण सामने नहीं आया है। इसलिए इस स्तर पर कार्रवाई को लेकर वही तथ्य महत्वपूर्ण हैं, जिनकी जानकारी पुलिस कार्रवाई और मामले से संबंधित रिपोर्ट में उपलब्ध है।

कौशांबी का यह मामला बताता है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक विरोध के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था का सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाता है। SIR के विरोध में आयोजित प्रदर्शन के दौरान पुतला दहन के बाद पुलिस कार्रवाई ने स्थानीय स्तर पर राजनीतिक गतिविधियों को चर्चा में ला दिया है।

फिलहाल घटनाक्रम का केंद्र 5 अक्टूबर को मंझनपुर चौराहे पर हुआ प्रदर्शन, SIR के खिलाफ सपा कार्यकर्ताओं की नाराजगी, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का सांकेतिक पुतला जलाना और इसके बाद पुलिस की कार्रवाई है। मामले में आगे होने वाली कानूनी और राजनीतिक गतिविधियों से तस्वीर और स्पष्ट होगी।

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