नई दिल्ली। अदरक की खेती किसानों के लिए मसाला फसलों में एक महत्वपूर्ण विकल्प मानी जाती है। घरेलू इस्तेमाल से लेकर खाद्य प्रसंस्करण और मसाला उद्योग तक अदरक की मांग बनी रहती है। ऐसे में खेती के लिए सही किस्म का चुनाव उत्पादन और उपज की गुणवत्ता पर सीधा असर डाल सकता है। IISR वरदा (IISR Varada) अदरक की ऐसी उन्नत किस्म है, जिसे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान (ICAR-IISR) की ओर से विकसित किस्मों में शामिल किया गया है। संस्थान के अनुसार यह किस्म अच्छी गुणवत्ता, उपज और अपेक्षाकृत कम फाइबर वाले प्रकंदों के लिए जानी जाती है।
IISR वरदा अदरक की क्या है खासियत?
IISR वरदा को जर्मप्लाज्म से चयन के माध्यम से विकसित किया गया था और इसे वर्ष 1996 में जारी किया गया। ICAR-IISR के अनुसार इसकी खेती भारत के अदरक उत्पादक क्षेत्रों में की जा सकती है। इस किस्म की औसत ताजा प्रकंद उपज लगभग 22.6 टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई है। इसकी परिपक्वता अवधि आधिकारिक आंकड़ों में करीब 200 दिन बताई गई है। इसलिए 150 से 180 दिन में तैयार होने की सामान्य जानकारी की तुलना में किसानों को अपने क्षेत्र, मौसम और फसल की स्थिति के अनुसार कटाई का समय तय करना चाहिए।
इस किस्म के प्रकंद यानी अदरक की गांठें मोटी और भरी हुई होती हैं तथा उनकी उंगलियां अपेक्षाकृत चपटी होती हैं। प्रकंद पर मध्यम आकार की लाल-भूरी परत दिखाई देती है। यही विशेषताएं बाजार में अदरक की पहचान और गुणवत्ता के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती हैं। ICAR-IISR के अनुसार IISR वरदा में कम फाइबर की विशेषता भी पाई जाती है, जो इसकी गुणवत्ता से जुड़ी प्रमुख खूबियों में शामिल है।
उत्पादन और गुणवत्ता के आंकड़े
IISR वरदा को केवल ताजा उपज के लिहाज से ही महत्वपूर्ण नहीं माना जाता, बल्कि इससे प्राप्त सूखी अदरक की गुणवत्ता भी उल्लेखनीय है। ICAR-IISR के आंकड़ों के अनुसार इस किस्म की ड्राई रिकवरी करीब 20.7 प्रतिशत है। इसके अलावा इसमें आवश्यक तेल की मात्रा लगभग 1.75 प्रतिशत और ओलियोरेसिन की मात्रा करीब 6.7 प्रतिशत बताई गई है। फाइबर की मात्रा लगभग 3.29 से 4.5 प्रतिशत के बीच दर्ज की गई है।
ड्राई रिकवरी का अर्थ यह है कि ताजा अदरक को सुखाने के बाद उसके वजन का कितना हिस्सा सूखी अदरक के रूप में प्राप्त होता है। यह विशेषता उन किसानों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है जो केवल ताजा अदरक बेचने के बजाय सूखी अदरक के बाजार को भी ध्यान में रखते हैं। संस्थान के अनुसार IISR वरदा से प्राप्त सूखी अदरक में भंडारण के दौरान कीटों से नुकसान अपेक्षाकृत कम होने की विशेषता भी बताई गई है। हालांकि वास्तविक भंडारण क्षमता पर तापमान, नमी, सफाई और भंडारण व्यवस्था जैसे कई कारकों का असर पड़ता है।
खेती करते समय किन बातों का रखें ध्यान?
IISR वरदा की खेती में अच्छी उपज के लिए खेत का चयन और मिट्टी की तैयारी महत्वपूर्ण है। अदरक की खेती में पानी के ठहराव से बचना जरूरी होता है, इसलिए खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था किसानों के लिए उपयोगी रहती है। खेत की तैयारी के दौरान मिट्टी को भुरभुरा बनाना और जैविक पदार्थों का संतुलित उपयोग फसल की बेहतर स्थापना में मदद कर सकता है।
रोपण के लिए स्वस्थ प्रकंदों का चयन किया जाना चाहिए। कमजोर, सड़े या रोगग्रस्त प्रकंदों का उपयोग करने से पूरी फसल में समस्या फैलने का जोखिम बढ़ सकता है। रोपण की तारीख, बीज प्रकंद की मात्रा, खाद एवं उर्वरक प्रबंधन और सिंचाई की जरूरत स्थानीय कृषि जलवायु तथा मिट्टी की स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए किसान अपने क्षेत्र के कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र या ICAR-IISR की अनुशंसित पैकेज ऑफ प्रैक्टिस के अनुसार खेती करना बेहतर समझ सकते हैं। ICAR-IISR की आधिकारिक जानकारी में भी अनुशंसित पैकेज ऑफ प्रैक्टिस का पालन करने की बात कही गई है।





