मुंबई। बॉलीवुड और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर 2026 को 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। गोवा स्थित अपने आवास पर अस्वस्थ होने के बाद उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन करीब 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। अस्पताल और उनके परिवार से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक उनकी मौत कार्डियक अरेस्ट के कारण हुई। नाना पाटेकर के निधन के साथ भारतीय सिनेमा ने एक प्रभावशाली अभिनेता खो दिया, लेकिन उनकी पहचान केवल फिल्मों तक सीमित नहीं थी। ग्रामीण महाराष्ट्र और खासकर किसानों के लिए किए गए उनके सामाजिक कार्यों ने उन्हें एक अलग पहचान दी।
डेढ़ करोड़ की कार छोड़ किसानों के परिवारों की मदद
नाना पाटेकर के सामाजिक कार्यों से जुड़ी सबसे चर्चित घटनाओं में उनकी एक महंगी कार खरीदने से जुड़ा फैसला भी शामिल है। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने करीब 1.5 करोड़ रुपये की कार खरीदने का विचार छोड़कर इस राशि को किसान परिवारों की सहायता में लगाने का निर्णय लिया। उस समय महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में किसान परिवार गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे थे। नाना ने ऐसे परिवारों तक आर्थिक सहायता पहुंचाने की दिशा में काम किया।
NAAM Foundation की शुरुआत के पीछे भी यही ग्रामीण संकट एक महत्वपूर्ण वजह रहा। संस्था के अनुसार, महाराष्ट्र में लगातार सूखे, गांवों की आर्थिक स्थिति कमजोर होने, किसान आत्महत्या और पानी के संकट जैसी समस्याओं ने नाना पाटेकर और मकरंद अनासपुरे को संगठित तरीके से काम करने के लिए प्रेरित किया। शुरुआत में प्रभावित परिवारों को आर्थिक मदद देने के साथ-साथ धीरे-धीरे संस्था ने पानी संरक्षण और ग्रामीण विकास की दिशा में अपने काम का विस्तार किया।
सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं, गांवों के लिए स्थायी समाधान पर जोर
NAAM Foundation के काम का एक बड़ा हिस्सा जल संरक्षण रहा है। संस्था के अनुसार, सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए जलस्रोतों, नहरों और पुराने जल प्रोजेक्ट्स को पुनर्जीवित करने की दिशा में काम किया गया। किसानों को पानी के बेहतर इस्तेमाल और खेती से जुड़ी जानकारी देने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए गए। संस्था का जोर इस बात पर रहा कि गांवों को केवल राहत राशि पर निर्भर रखने के बजाय ऐसी व्यवस्थाएं विकसित की जाएं, जिनसे ग्रामीण परिवार लंबे समय तक अपनी आजीविका चला सकें।
NAAM Foundation की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, संस्था के जल संरक्षण से जुड़े प्रोजेक्ट्स 2,187 गांवों तक पहुंचे हैं और इन परियोजनाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को लाभ मिलने का दावा किया गया है। संस्था ने जलस्रोतों से बड़ी मात्रा में गाद हटाने और जल संरक्षण के लिए विभिन्न स्तरों पर काम किया है। ये आंकड़े दिखाते हैं कि नाना पाटेकर से जुड़ा सामाजिक प्रयास समय के साथ एक व्यापक ग्रामीण विकास अभियान में बदल गया।
नाना पाटेकर के निधन से फिल्म जगत में शोक की लहर है, लेकिन किसानों और ग्रामीण परिवारों से जुड़े उनके काम को भी उनकी विरासत के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। NAAM Foundation के जरिए जल संरक्षण, किसान प्रशिक्षण, महिला आजीविका, सामूहिक खेती और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में शुरू की गई पहलें उनके सामाजिक योगदान की याद दिलाती रहेंगी। फिल्मों में निभाए किरदारों के अलावा गांवों और किसानों के बीच किए गए उनके काम ने उनके जीवन को एक ऐसा सामाजिक अध्याय भी दिया, जिसे उनके प्रशंसक लंबे समय तक याद रखेंगे।





