पटना। बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चल रहा राजनीतिक विवाद अब सड़क पर भी दिखाई देने लगा है। गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को पटना में महागठबंधन ने SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के विरोध में राजभवन मार्च निकाला। मार्च का नेतृत्व बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजस्वी यादव ने किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ओर से लगाए गए बैरिकेड को पार करने की कोशिश के बाद तेजस्वी यादव समेत कई विपक्षी नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। हालांकि, हिरासत को लेकर पुलिस और विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में अलग-अलग विवरण सामने आए हैं।
SIR को लेकर विपक्ष लगातार उठा रहा सवाल
महागठबंधन के दल लंबे समय से बिहार में हुए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं और मतदाता सूची में नाम शामिल रखने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से इस पूरे मामले में स्पष्टीकरण देने और अपनी आपत्तियों पर जवाब देने की मांग की है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग और भाजपा विपक्ष के इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं। इसलिए SIR को लेकर विवाद का एक प्रमुख केंद्र मतदाता सूची की शुद्धता, सत्यापन की प्रक्रिया और पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने का मुद्दा बना हुआ है।
गुरुवार का पटना मार्च महागठबंधन के दो दिवसीय विरोध कार्यक्रम का दूसरा चरण था। इससे पहले बुधवार को राज्य के सभी 534 प्रखंड मुख्यालयों पर महागठबंधन की ओर से आक्रोश मार्च और प्रदर्शन का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। विपक्ष ने इसे SIR तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर अपने विरोध को व्यापक स्तर तक पहुंचाने की रणनीति के रूप में पेश किया।
तेजस्वी ने चुनाव आयोग पर लगाए आरोप
प्रदर्शन के दौरान तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। विपक्ष का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया से मतदाता सूची में वास्तविक मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं। तेजस्वी यादव ने प्रदर्शन के दौरान चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठाए। ये आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए हैं और इन्हें चुनाव आयोग तथा भाजपा की ओर से खारिज किया गया है।
महागठबंधन नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची से संबंधित किसी भी प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा महत्वपूर्ण है। विपक्ष इसी मुद्दे को लेकर राज्यपाल के सामने अपनी बात रखना चाहता था। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष यह रहा है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य सूची को अधिक सटीक बनाना और अपात्र या डुप्लीकेट प्रविष्टियों को हटाना है। ऐसे में SIR को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद मुख्य रूप से प्रक्रिया और उसके प्रभाव को लेकर बने हुए हैं।
इस आंदोलन के जरिए विपक्ष ने SIR को आगामी चुनावी प्रक्रिया और मतदाता अधिकारों से जोड़कर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया है। महागठबंधन नेताओं का कहना है कि वे इस विषय पर अपनी मांगों को आगे भी उठाते रहेंगे। वहीं, चुनाव आयोग और सरकार की ओर से SIR को चुनावी मतदाता सूची को व्यवस्थित और अद्यतन करने की प्रक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है।
पटना में गुरुवार का राजभवन मार्च इसी व्यापक राजनीतिक टकराव का नया चरण रहा। तेजस्वी यादव समेत विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन, बैरिकेडिंग और पुलिस की कार्रवाई ने बिहार की राजनीति में SIR के मुद्दे को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस मामले पर विपक्ष की आगे की रणनीति और चुनाव आयोग की ओर से उठाए जाने वाले कदम महत्वपूर्ण रहेंगे।




