ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव के पहले चरण के नतीजों के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। राजधानी रियो डी जनेरियो में हजारों छात्रों और युवाओं ने सड़कों पर उतरकर सीनेटर और राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने लोकतंत्र, राजनीतिक अधिकारों और देश की संप्रभुता को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कीं। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों के हाथों में ऐसे पोस्टर नजर आए, जिन पर “बोल्सोनारो कभी नहीं” और “पिता को नहीं, बेटे को भी नहीं” जैसे संदेश लिखे थे। यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है जब ब्राजील में 25 अक्टूबर को राष्ट्रपति चुनाव का दूसरा दौर होने वाला है।
ब्राजील का मौजूदा चुनावी मुकाबला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पहले चरण में किसी भी उम्मीदवार को राष्ट्रपति बनने के लिए जरूरी 50 प्रतिशत से अधिक वोट नहीं मिले। चुनावी आंकड़ों के अनुसार, फ्लावियो बोल्सोनारो को 47.03 प्रतिशत वैध वोट मिले, जबकि मौजूदा राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा 45.16 प्रतिशत वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे। फ्लावियो को करीब 5.61 करोड़ वोट मिले, जबकि लूला को लगभग 5.39 करोड़ वोट हासिल हुए। इस अंतर के कारण दोनों उम्मीदवारों के बीच दूसरे चरण का मुकाबला तय हुआ है।

रियो डी जनेरियो के युवाओं का प्रदर्शन इस चुनावी माहौल का एक अलग पहलू सामने लाता है। पोस्टरों और नारों के जरिए प्रदर्शनकारियों ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वे देश की राजनीति में बोल्सोनारो परिवार की वापसी को लेकर चिंतित हैं। दूसरी तरफ, चुनावी नतीजे बताते हैं कि फ्लावियो को बड़ी संख्या में मतदाताओं का समर्थन भी मिला है। इसलिए ब्राजील में मौजूदा राजनीतिक स्थिति को केवल युवा विरोध या किसी एक विचारधारा के समर्थन के आधार पर समझना पूरी तस्वीर नहीं देता।
अब सभी की नजर 25 अक्टूबर के दूसरे चरण पर है। पहले चरण में फ्लावियो बोल्सोनारो और लूला के बीच अंतर काफी सीमित रहा है और दोनों खेमे उन मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश करेंगे जिन्होंने पहले चरण में किसी अन्य उम्मीदवार को वोट दिया या मतदान नहीं किया। ऐसे में रियो में छात्रों का प्रदर्शन चुनावी बहस का एक महत्वपूर्ण दृश्य जरूर बन गया है, लेकिन अंतिम राजनीतिक फैसला ब्राजील के मतदाता ही करेंगे।




