drnewsindia.com/सीहोर। जिले के बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कोसमी गांव में वन विकास निगम की कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। रविवार को यहां आदिवासी परिवारों के मकान तोड़ने और खेतों में खड़ी मक्का की फसल नष्ट करने की कार्रवाई की गई। मामले में जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजीव गुजराती ने सरकार पर निशाना साधते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
कोसमी गांव केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के संसदीय क्षेत्र विदिशा और विधानसभा क्षेत्र बुधनी में आता है। जानकारी के अनुसार, करीब एक साल पहले शिवराज सिंह चौहान ने जिला प्रशासन के अधिकारियों से चर्चा कर आदिवासियों के मकान नहीं गिराने के निर्देश दिए थे। उनकी शिकायत के बाद सीहोर के तत्कालीन डीएफओ मगन सिंह डाबर को भी पद से हटाया गया था। इसके बावजूद गांव में वन विकास निगम की कार्रवाई हुई।
मकान टूटने से प्रभावित परिवारों के सामने संकट
कार्रवाई के दौरान बरेला समुदाय के परिवारों के मकान तोड़े गए। खेतों में लगी मक्का की फसल भी नष्ट किए जाने की जानकारी सामने आई है। प्रभावित परिवारों के सामने आवास और आजीविका का संकट खड़ा होने की बात कही जा रही है। हालांकि, कार्रवाई के कानूनी आधार और प्रभावित परिवारों की स्थिति को लेकर संबंधित विभाग की ओर से विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
कांग्रेस ने सरकार पर उठाए सवाल
जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजीव गुजराती ने कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि शिवराज सिंह चौहान पूर्व मुख्यमंत्री होने के साथ वर्तमान में केंद्रीय मंत्री भी हैं। इसके बावजूद उनके विधानसभा क्षेत्र बुधनी में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जा रहे हैं।
गुजराती ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार के कार्यकाल में वंचित वर्ग के लोगों के साथ अन्याय हो रहा है। उन्होंने कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कदम उठाने की मांग की।
वन विभाग के अधिकारियों पर शिवराज की नाराजगी
इसी मामले के संदर्भ में शिवराज सिंह चौहान की वन विभाग के अधिकारियों के प्रति नाराजगी की बात भी सामने आई है। बताया गया कि उन्होंने अधिकारियों के कामकाज पर सवाल उठाते हुए कहा कि विभाग के अधिकारी गड़बड़ी कर रहे हैं और सरकार की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।
फिलहाल, कोसमी में मकान तोड़ने की कार्रवाई को लेकर वन विकास निगम और जिला प्रशासन का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है। कार्रवाई के कारणों और पूर्व में दिए गए निर्देशों के बावजूद मकान तोड़े जाने की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।




