भोपाल। मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के मुद्दे पर कानूनी और प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के हालिया फैसले के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार, 13 अक्टूबर को नई दिल्ली में देश के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से मुलाकात की। बैठक में प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह भी मौजूद रहे। इस दौरान हाई कोर्ट के निर्णय से जुड़े कानूनी पहलुओं और आगे की कार्रवाई के संभावित विकल्पों पर चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वयं इस मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए बताया कि बैठक में OBC आरक्षण से संबंधित न्यायालय के निर्णय और आगामी कानूनी कार्रवाई पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। राज्य सरकार अब उपलब्ध कानूनी विकल्पों का परीक्षण कर रही है। हालांकि, इस मुलाकात के बाद सरकार की ओर से किसी विशिष्ट याचिका को तत्काल दायर करने या अगली न्यायिक कार्रवाई की अंतिम तारीख की घोषणा की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 9 अक्टूबर 2026 को OBC आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने वाले 2019 के संशोधन को असंवैधानिक करार दिया। इस फैसले ने प्रदेश में सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में आरक्षण की व्यवस्था को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।
मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण का मुद्दा अब न्यायिक फैसले के अनुपालन और सरकार की आगे की कानूनी रणनीति, दोनों से जुड़ा है। एक ओर राज्य सरकार उपलब्ध विकल्पों पर विचार कर रही है, वहीं दूसरी ओर भर्ती एजेंसियों को हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप लंबित प्रक्रियाओं पर आगे बढ़ना होगा।इस पूरे मामले में OBC अभ्यर्थियों, सरकारी नौकरी के उम्मीदवारों और उच्च शिक्षा में प्रवेश की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों की नजरें आगे होने वाले निर्णयों पर रहेंगी। आरक्षण की सीमा से जुड़े फैसले का प्रभाव अलग-अलग भर्ती और प्रवेश प्रक्रियाओं में दिखाई दे सकता है।




