दिग्विजय सिंह की ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ पर भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य का तंज, बोले- अपने ‘दुर्योधन’ को सिंहासन तक पहुंचाना चाहते हैं

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 गुना। मध्य प्रदेश की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ को लेकर बयानबाजी सामने आई है। गुना से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक पन्नालाल शाक्य ने इस यात्रा पर प्रतिक्रिया देते हुए दिग्विजय सिंह पर निशाना साधा। उन्होंने महाभारत के पात्रों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस नेता को ‘धृतराष्ट्र’ कहा और आरोप लगाया कि वह अपने ‘दुर्योधन’ को सत्ता के सिंहासन तक पहुंचाने के उद्देश्य से पदयात्रा कर रहे हैं।

कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दिया बयान

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने गुरुवार को अपने कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिग्विजय सिंह की पदयात्रा पर टिप्पणी की। उन्होंने यात्रा के उद्देश्य पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इसके पीछे राजनीतिक सत्ता हासिल करने की मंशा है।

शाक्य ने अपने बयान में महाभारत के पात्र धृतराष्ट्र और दुर्योधन का संदर्भ दिया। उन्होंने दिग्विजय सिंह के लिए ‘धृतराष्ट्र’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि वह अपने ‘दुर्योधन’ को सत्ता के सिंहासन तक पहुंचाने के लिए यह पदयात्रा कर रहे हैं।

महाकाल दर्शन और गमछा लौटाने की घटना का किया जिक्र

पन्नालाल शाक्य ने अपनी प्रतिक्रिया में उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर में दर्शन के दौरान दिग्विजय सिंह द्वारा गमछा लौटाने की घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने इस घटना को सनातन प्रतीकों के प्रति कथित आपत्ति से जोड़ते हुए सवाल उठाया कि यदि इन प्रतीकों को लेकर असहमति है, तो यात्रा की शुरुआत महाकाल से करने का निर्णय क्यों लिया गया।

शाक्य ने कहा कि यदि दिग्विजय सिंह को सनातन प्रतीकों से इतनी ही आपत्ति है, तो यात्रा की शुरुआत महाकाल के बजाय जावरा या अजमेर से करनी चाहिए थी। उनके अनुसार, महाकाल से यात्रा शुरू करने के बाद वहां से जुड़े धार्मिक प्रतीकों और परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए।

यह टिप्पणी उनके धार्मिक और राजनीतिक दृष्टिकोण को सामने रखती है। गमछा लौटाने की घटना को लेकर शाक्य ने जो अर्थ निकाला, वह उनकी अपनी व्याख्या है। उपलब्ध जानकारी से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि दिग्विजय सिंह ने ऐसा किसी धार्मिक परंपरा का अपमान करने के उद्देश्य से किया था।

‘महाकाल के प्रसाद का अपमान मत करो’

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शाक्य ने धार्मिक आस्था से जुड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि जब यात्रा महाकाल से शुरू कर रहे हैं, तो उनके प्रसाद का अपमान नहीं करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, “सनातन हो, हिन्दुपथ की संतान हो, तो हिंदुत्व के चिन्हों को जीवित रहने दो।”

इस बयान के माध्यम से भाजपा विधायक ने सनातन परंपराओं और हिंदुत्व से जुड़े प्रतीकों के सम्मान पर जोर दिया। उनके अनुसार, धार्मिक स्थलों से जुड़ी परंपराओं के प्रति सम्मान सार्वजनिक जीवन में भी महत्वपूर्ण है।

दूसरी ओर, किसी धार्मिक प्रतीक के इस्तेमाल, उसे स्वीकार करने या किसी विशेष अवसर पर उसे लौटाने के पीछे अलग-अलग परिस्थितियां हो सकती हैं। किसी घटना को धार्मिक अपमान मानने से पहले उसका संदर्भ और संबंधित व्यक्ति की सफाई जानना आवश्यक है। इस मामले में उपलब्ध जानकारी मुख्य रूप से शाक्य की प्रतिक्रिया पर केंद्रित है।

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