माचलपुर। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में जनपद पंचायत जीरापुर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत गोघटपुर में न्यू बस स्टैंड पर स्वच्छता परिसर के निर्माण को लेकर भुगतान और कार्य शुरू होने के समय के बीच अंतर का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही संबंधित फर्म के नाम पर सरकारी राशि का भुगतान कर दिया गया था। इसके बाद शिकायतें की गईं और खबर प्रकाशित होने के करीब छह महीने बाद निर्माण कार्य शुरू हुआ।
मेरी पंचायत पोर्टल पर दर्ज जानकारी के अनुसार, 29 अप्रैल को ओम स्टील, जीरापुर के नाम पर 3 लाख 97 हजार रुपये का भुगतान दर्ज है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस समय यह भुगतान किया गया, उस समय मौके पर निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ था। इसी आधार पर उन्होंने भुगतान की प्रक्रिया, कार्य के मूल्यांकन और पंचायत के जिम्मेदार पदाधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
29 अप्रैल को दर्ज हुआ 3.97 लाख रुपये का भुगतान
ग्रामीणों के अनुसार, गोघटपुर ग्राम पंचायत के न्यू बस स्टैंड पर स्वच्छता परिसर बनाने की योजना के संबंध में भुगतान का रिकॉर्ड उपलब्ध है। पोर्टल पर दर्ज जानकारी में 29 अप्रैल को ओम स्टील, जीरापुर के नाम पर 3,97,000 रुपये का भुगतान दिखाया गया है।
ग्रामीणों का मुख्य सवाल यह है कि जब निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ था, तब इतनी बड़ी राशि जारी करने का आधार क्या था। उनका कहना है कि भुगतान से पहले निर्माण स्थल का निरीक्षण किया जाना चाहिए था और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए था कि भुगतान संबंधित कार्य की प्रगति तथा लागू वित्तीय नियमों के अनुरूप हो।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह अपने आप साबित नहीं होता कि भुगतान अवैध था या उसमें वित्तीय अनियमितता हुई। इसकी पुष्टि के लिए भुगतान आदेश, कार्यादेश, स्वीकृत लागत, माप पुस्तिका, बिल और संबंधित तकनीकी अभिलेखों की जांच जरूरी होगी। यह भी देखना होगा कि भुगतान किस मद में, किन शर्तों के तहत और किस स्तर पर स्वीकृत किया गया था।
शिकायतों और खबर के बाद करीब छह महीने बाद शुरू हुआ निर्माण
इस मामले में ग्रामीणों का एक और प्रमुख आरोप निर्माण कार्य शुरू होने में हुई देरी से जुड़ा है। उनका कहना है कि भुगतान दर्ज होने के समय निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ था, जबकि शिकायतें किए जाने और इस संबंध में खबर प्रकाशित होने के करीब छह महीने बाद मौके पर काम शुरू किया गया।
निर्माण शुरू होने में देरी और भुगतान की तारीख के बीच का अंतर ग्रामीणों के सवालों को और महत्वपूर्ण बनाता है। हालांकि, निर्माण कार्य में देरी के कारणों की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। यह स्पष्ट करने के लिए संबंधित विभाग को कार्यादेश जारी होने की तारीख, कार्य शुरू करने की निर्धारित समयसीमा, स्थल की स्थिति और भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड की तुलना करनी होगी।
जनपद पंचायत से जिला पंचायत तक पहुंची शिकायत
ग्रामीणों ने इस मामले को लेकर जनपद पंचायत जीरापुर से लेकर जिला पंचायत राजगढ़ तक शिकायतें करने की बात कही है। उनका उद्देश्य भुगतान की प्रक्रिया की जांच कराना और यह स्पष्ट करवाना है कि निर्माण कार्य शुरू होने से पहले राशि जारी करने का निर्णय किस आधार पर लिया गया।
शिकायतकर्ताओं ने कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। इनमें प्रमुख रूप से यह पूछा गया है कि क्या राशि जारी करने से पहले संबंधित इंजीनियर ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया था। क्या निर्माण कार्य की प्रगति का मूल्यांकन किया गया था? यदि मूल्यांकन हुआ था, तो उस समय दर्ज स्थिति क्या थी? इसके अलावा, भुगतान स्वीकृत करने और राशि जारी करने की प्रक्रिया में किन अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका थी?
इन सवालों का उत्तर संबंधित रिकॉर्ड की जांच से ही मिल सकेगा। मामले में निष्पक्ष जांच होने पर भुगतान की तारीख, निर्माण की वास्तविक शुरुआत, तकनीकी स्वीकृति और कार्य की वर्तमान स्थिति के बीच संबंध स्पष्ट किया जा सकता है।






