विदिशा: जनविश्वास कार्यक्रम में ग्रामीणों ने उठाईं समस्याएं, अवैध शराब की बिक्री रोकने की मांग; कलेक्टर और एसपी ने दिए कार्रवाई के निर्देश

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विदिशा। ग्रामीणों की समस्याओं को सुनने और उनका मौके पर समाधान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री जनविश्वास कार्यक्रम के तहत जिला प्रशासन ने गांवों का दौरा किया। इस दौरान कलेक्टर अंशुल गुप्ता, पुलिस अधीक्षक रोहित काशवानी और वन मंडलाधिकारी (डीएफओ) हेमंत यादव ने ग्राम पंचायत पुरागुसाईं सहित अन्य गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों से संवाद किया। अधिकारियों के सामने ग्रामीणों ने अवैध शराब की बिक्री, पेयजल संकट, जननी सुरक्षा योजना की राशि नहीं मिलने, रास्तों पर अतिक्रमण और स्वामित्व योजना में आदिवासी परिवारों के नाम शामिल नहीं होने जैसी समस्याएं रखीं।

ग्रामीणों की शिकायतें सुनने के बाद अधिकारियों ने संबंधित विभागों के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यक कार्रवाई करने तथा समस्याओं का निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कार्यक्रम का उद्देश्य सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाना, स्थानीय स्तर पर सामने आ रही परेशानियों की जानकारी लेना और प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति लोगों का भरोसा मजबूत करना है।

अवैध शराब की बिक्री से परेशान महिलाओं ने लगाई गुहार

पुरागुसाईं गांव में निरीक्षण के दौरान अवैध शराब की बिक्री का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया। गांव की महिलाओं ने पुलिस अधीक्षक रोहित काशवानी से शिकायत करते हुए बताया कि गांव में दो स्थानों पर कथित तौर पर अवैध रूप से शराब बेची जा रही है। महिलाओं के अनुसार, शराब पीकर घर लौटने वाले परिवार के कुछ सदस्य उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट करते हैं। इससे उन्हें घरेलू परेशानियों का सामना करना पड़ता है और परिवार का माहौल भी प्रभावित होता है।

महिलाओं ने अपनी समस्या बताते हुए पुलिस अधीक्षक से गांव में शराब की अवैध बिक्री पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि शराब के कारण वे काफी परेशान हैं और इस समस्या से राहत चाहती हैं। महिलाओं की शिकायत से यह स्पष्ट हुआ कि उनके लिए यह केवल अवैध बिक्री का मामला नहीं, बल्कि घरेलू शांति और सुरक्षा से जुड़ा विषय भी है।

ग्रामीणों से सीधे संवाद कर समस्याओं की जानकारी ली

दौरे के दौरान कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और डीएफओ ने गांवों में पैदल भ्रमण किया। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास किया। इस तरह के निरीक्षण का उद्देश्य केवल शिकायतें सुनना ही नहीं, बल्कि गांव की वास्तविक परिस्थितियों को देखकर यह जानना भी होता है कि लोगों को सरकारी सेवाओं और योजनाओं का लाभ लेने में कहां कठिनाइयां आ रही हैं।

अधिकारियों ने आवास योजना के हितग्राहियों से भी जानकारी ली। सरकारी आवास योजनाओं के तहत पात्र परिवारों को लाभ पहुंचाने के लिए हितग्राहियों की स्थिति, योजनाओं की प्रगति और सामने आने वाली समस्याओं की जानकारी महत्वपूर्ण होती है।

ग्रामीणों से सीधे बातचीत करने के माध्यम से प्रशासन को स्थानीय जरूरतों और शिकायतों को समझने का अवसर मिलता है। इससे संबंधित विभागों को समस्या की प्रकृति के अनुसार कार्रवाई करने में सहायता मिल सकती है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में आवास योजना के हितग्राहियों से हुई बातचीत के विस्तृत निष्कर्षों की जानकारी नहीं दी गई है।

पेयजल संकट और जननी सुरक्षा योजना की राशि का मुद्दा

ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने पेयजल संकट की समस्या भी रखी। गांवों में पर्याप्त और नियमित पेयजल उपलब्ध होना बुनियादी जरूरतों में शामिल है। पानी की आपूर्ति में परेशानी होने पर ग्रामीण परिवारों को दैनिक कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में ग्रामीणों की शिकायत के बाद संबंधित विभाग द्वारा समस्या की स्थिति का परीक्षण और समाधान आवश्यक है।

इसके साथ ही जननी सुरक्षा योजना की राशि नहीं मिलने की शिकायत भी सामने आई। यह योजना संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहित करने और पात्र महिलाओं को निर्धारित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने से संबंधित है। यदि किसी पात्र हितग्राही को योजना का लाभ नहीं मिला है, तो उसके आवेदन, पात्रता, भुगतान की स्थिति और संबंधित दस्तावेजों की जांच जरूरी होती है।

रास्तों पर अतिक्रमण से जुड़ी शिकायतें

गांवों में आवागमन के रास्तों पर अतिक्रमण का मुद्दा भी ग्रामीणों ने उठाया। रास्तों पर अवरोध होने से लोगों को आने-जाने में परेशानी हो सकती है। इसका असर दैनिक आवागमन, जरूरी सेवाओं तक पहुंच और ग्रामीण संपर्क पर पड़ता है।

ऐसी शिकायतों के समाधान के लिए संबंधित स्थल का निरीक्षण, भूमि और रास्ते की स्थिति का सत्यापन तथा लागू नियमों के अनुसार कार्रवाई आवश्यक होती है। प्रशासन की ओर से संबंधित विभागों को शिकायतों का निराकरण करने के निर्देश दिए गए हैं।

हालांकि, उपलब्ध विवरण में यह जानकारी नहीं है कि अतिक्रमण किन रास्तों पर है, कितने स्थानों पर इसकी शिकायत की गई है या उन्हें हटाने की कोई समयसीमा निर्धारित की गई है।

स्वामित्व योजना में आदिवासी परिवारों के नाम शामिल करने की मांग

ग्रामीणों ने स्वामित्व योजना में आदिवासी परिवारों के नाम शामिल नहीं होने की समस्या भी अधिकारियों के सामने रखी। यह मुद्दा ग्रामीण परिवारों के संपत्ति संबंधी अभिलेखों और सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया से जुड़ा है।

स्वामित्व योजना का उद्देश्य ग्रामीण आबादी क्षेत्र में संपत्तियों के सर्वेक्षण और संबंधित संपत्ति अभिलेख तैयार करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। ऐसे में पात्र परिवारों के नाम अभिलेखों में शामिल नहीं होने की शिकायत सामने आने पर संबंधित दस्तावेजों, सर्वेक्षण और पात्रता की स्थिति की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।

आदिवासी परिवारों की शिकायत के निराकरण के लिए प्रशासन को यह देखना होगा कि नाम शामिल नहीं होने के पीछे दस्तावेजों की कमी, सर्वेक्षण से जुड़ी समस्या या कोई अन्य कारण है। उपलब्ध जानकारी में इस शिकायत के संबंध में अंतिम निर्णय या नाम जोड़ने की कार्रवाई का विवरण नहीं दिया गया है।

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