भोपाल में पहली बार श्री राजराजेश्वरी कोटि हरिद्रा कुंकुमार्चन महाअनुष्ठान, 40 हजार श्रद्धालुओं ने किया अर्चन

0
5

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर एक भव्य धार्मिक आयोजन हुआ। वैदिक मंत्रों की गूंज, चंद्रमा की शीतल रोशनी और विशेष पूजन सामग्री के बीच लाल परेड ग्राउंड सोमवार शाम आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर हो उठा। संत रावतपुरा सरकार के मंगल सानिध्य में यहां पहली बार ‘श्री राजराजेश्वरी कोटि हरिद्रा कुंकुमार्चन’ महाअनुष्ठान का आयोजन किया गया। आयोजकों के अनुसार, इस विराट अनुष्ठान में मंत्री-विधायकों सहित लगभग 40 हजार श्रद्धालुओं ने भाग लिया और मां भगवती के चरणों में सामूहिक रूप से एक करोड़ अर्चन समर्पित किए।

यह आयोजन धार्मिक आस्था, सामूहिक सहभागिता और पारंपरिक पूजा पद्धति के लिहाज से विशेष रहा। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु लाल परेड ग्राउंड पहुंचे। आयोजकों ने लगभग 60 हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था की थी, जबकि अनुष्ठान में करीब 40 हजार श्रद्धालुओं ने बैठकर पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं को पूजन के लिए आवश्यक सामग्री निशुल्क उपलब्ध कराई गई, जिससे वे निर्धारित विधि के अनुसार अनुष्ठान में शामिल हो सकें।

भोपाल में पहली बार हुआ विराट महाअनुष्ठान

‘श्री राजराजेश्वरी कोटि हरिद्रा कुंकुमार्चन’ महाअनुष्ठान का भोपाल में पहली बार आयोजन किया जाना इसकी प्रमुख विशेषताओं में शामिल रहा। कार्यक्रम का उद्देश्य मां भगवती की आराधना और सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना करना था। संत रावतपुरा सरकार के सानिध्य में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने एक साथ बैठकर अर्चन किया।

आयोजन स्थल पर पूजा के लिए व्यापक व्यवस्था की गई थी। बड़ी संख्या में लोगों के एक साथ बैठकर अनुष्ठान करने के लिए स्थान तैयार किया गया। इसके अलावा, पूजन सामग्री की व्यवस्था भी आयोजकों की ओर से की गई थी। श्रद्धालुओं को सामग्री निशुल्क दिए जाने से उन्हें पूजा में भाग लेने के लिए आवश्यक वस्तुएं अलग से जुटाने की जरूरत नहीं पड़ी।

शाम सात बजे शुरू हुआ कार्यक्रम

आयोजन की शुरुआत सोमवार शाम सात बजे हुई। शरद पूर्णिमा की रात, चंद्रमा की रोशनी और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच लाल परेड ग्राउंड का वातावरण भक्तिमय हो गया। कार्यक्रम में संत रावतपुरा सरकार के आगमन को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना गया। उनके कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के दौरान उज्जैन से आए 51 पंडितों ने वैदिक मंत्रों के साथ धार्मिक वातावरण को और प्रभावशाली बना दिया।

उज्जैन को बाबा महाकाल की नगरी के रूप में जाना जाता है। वहां से आए पंडितों की उपस्थिति ने कार्यक्रम में पारंपरिक वैदिक अनुष्ठान की विशेष छटा जोड़ी। मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालु पूजा में शामिल हुए और मां भगवती के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

हरिद्रा कुंकुमार्चन का धार्मिक महत्व

‘हरिद्रा कुंकुमार्चन’ नाम से ही इस अनुष्ठान में हल्दी और कुंकुम से जुड़े पूजन का महत्व सामने आता है। हिंदू धार्मिक परंपराओं में हल्दी और कुंकुम का उपयोग पूजा-अर्चना, मंगल कार्यों और देवी आराधना में किया जाता है। देवी उपासना के दौरान इन सामग्रियों को श्रद्धा और पारंपरिक पूजा-विधि के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

‘कोटि’ शब्द का सामान्य अर्थ एक करोड़ होता है। इस आयोजन के संदर्भ में एक करोड़ अर्चन समर्पित किए जाने की बात कही गई है। इस प्रकार, महाअनुष्ठान का नाम और इसका स्वरूप सामूहिक देवी आराधना के व्यापक संकल्प को दर्शाते हैं।

मां राजराजेश्वरी की आराधना देवी उपासना की परंपरा से जुड़ी है। ऐसे आयोजनों में श्रद्धालु पूजा-विधि के माध्यम से अपनी आस्था व्यक्त करते हैं। हालांकि अनुष्ठान की विस्तृत धार्मिक प्रक्रिया, पूजन सामग्री के सभी प्रकार और मंत्रों के क्रम से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है, लेकिन आयोजन में वैदिक मंत्रोच्चार और सामूहिक अर्चन प्रमुख रूप से शामिल रहे।

देश-विदेश से मंगाई गई विशेष पूजन सामग्री

इस महाअनुष्ठान की एक अन्य विशेषता देश-विदेश से मंगाई गई दुर्लभ पूजन सामग्री रही। आयोजन के लिए विशेष सामग्री की व्यवस्था की गई थी, जिसका उपयोग धार्मिक अनुष्ठान में किया गया। इससे कार्यक्रम की तैयारियों के व्यापक स्तर का पता चलता है।

पूजन सामग्री की व्यवस्था के साथ आयोजकों ने श्रद्धालुओं को आवश्यक सामग्री निशुल्क उपलब्ध कराई। इतने बड़े स्तर पर आयोजित कार्यक्रम में हजारों लोगों तक पूजन सामग्री पहुंचाना आयोजन प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। इससे श्रद्धालुओं को सामूहिक पूजा में भाग लेने में सुविधा मिली।

हालांकि उपलब्ध जानकारी में विदेशों से मंगाई गई सामग्री के नाम, उसकी मात्रा या उसे किन स्थानों से मंगाया गया, इसका विस्तृत उल्लेख नहीं है। इसलिए इस संबंध में किसी विशेष सामग्री या देश का नाम बताना उचित नहीं होगा। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि अनुष्ठान को विशेष स्वरूप देने के लिए दुर्लभ पूजन सामग्री जुटाई गई थी।

60 हजार लोगों के बैठने की व्यवस्था, 40 हजार ने लिया भाग

लाल परेड ग्राउंड में आयोजित इस महाअनुष्ठान के लिए लगभग 60 हजार श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था की गई थी। आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम में करीब 40 हजार श्रद्धालु शामिल हुए। मंत्री-विधायकों की मौजूदगी ने भी आयोजन को प्रमुखता दी।

बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी को देखते हुए बैठकर पूजा करने की व्यवस्था महत्वपूर्ण रही। सामूहिक अर्चन के दौरान श्रद्धालुओं को एक निर्धारित स्थान पर बैठकर अनुष्ठान में शामिल होना था। निशुल्क पूजन सामग्री उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी इसी सामूहिक सहभागिता का हिस्सा रही।

चंद्रमा की रोशनी और वैदिक मंत्रों के बीच संपन्न हुए इस कार्यक्रम ने श्रद्धालुओं को सामूहिक रूप से देवी आराधना का अवसर दिया। संत रावतपुरा सरकार का सानिध्य, उज्जैन से आए 51 पंडितों का मंत्रोच्चार और एक करोड़ अर्चन का संकल्प आयोजन की प्रमुख विशेषताएं रहीं।

राजधानी के लाल परेड ग्राउंड में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम ने बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को एक मंच पर एकत्र किया। पहली बार हुए इस महाअनुष्ठान में लगभग 40 हजार लोगों की भागीदारी और निशुल्क पूजन सामग्री की व्यवस्था उल्लेखनीय रही। आयोजकों के अनुसार, कार्यक्रम का आयोजन निर्विघ्न संपन्न हुआ।

इस तरह भोपाल में शरद पूर्णिमा का अवसर एक बड़े सामूहिक धार्मिक आयोजन के रूप में सामने आया। मां भगवती की आराधना, वैदिक परंपरा और श्रद्धालुओं की सहभागिता इस महाअनुष्ठान के मुख्य केंद्र में रही।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here