बांग्लादेश में पूर्व वायुसेना अधिकारी तहसीफ सौरी की संदिग्ध मौत, तुराग नदी में मिला शव; शेख हसीना के देश छोड़ने वाले वीडियो से जुड़ा था विवाद

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बांग्लादेश की राजधानी ढाका में पूर्व वायुसेना अधिकारी तहसीफ सौरी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आने के बाद देश में चर्चा तेज हो गई है। 28 वर्षीय पूर्व फ्लाइट लेफ्टिनेंट का शव बुधवार को तुराग नदी से बरामद किया गया। वह एक दिन पहले से लापता थे। इस घटना ने इसलिए भी ध्यान आकर्षित किया है, क्योंकि कुछ महीने पहले तहसीफ सौरी ने एक पॉडकास्ट में उन आरोपों पर सवाल उठाए थे, जिनमें उन्हें अगस्त 2024 में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के बांग्लादेश छोड़ने से जुड़े एक वीडियो को रिकॉर्ड करने या प्रसारित करने से जोड़ा गया था।

पुलिस ने शव को कानूनी प्रक्रिया के तहत पोस्टमार्टम के लिए शहीद सुहरावर्दी मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा था। शुरुआती जांच में शरीर पर बाहरी चोट के स्पष्ट निशान नहीं मिलने की जानकारी सामने आई, हालांकि नाक से खून निकलने की बात भी बताई गई। फिलहाल मौत की वास्तविक वजह को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। पुलिस और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

तुराग नदी में कैसे मिला तहसीफ सौरी का शव?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तहसीफ सौरी 27 अक्टूबर की शाम अपने घर से निकले थे। इसके बाद उनका परिवार उनसे संपर्क नहीं कर पाया। अगले दिन यानी 28 अक्टूबर को ढाका के तुराग नदी क्षेत्र में एक व्यक्ति का शव दिखाई देने की सूचना पुलिस को मिली।

सूचना मिलने के बाद टोंगी नदी पुलिस चौकी की टीम मौके पर पहुंची और राजाबारी घाट के आसपास से शव बरामद किया। यह कार्रवाई राष्ट्रीय आपातकालीन सेवा 999 पर मिली सूचना के बाद की गई थी।

शुरुआत में शव की पहचान नहीं हो सकी थी। हालांकि, उसके पास मिले मोबाइल फोन और हाथ में पहनी घड़ी की सहायता से मृतक की पहचान पूर्व बांग्लादेश वायुसेना अधिकारी तहसीफ सौरी के रूप में की गई।

शव को आगे की कानूनी कार्रवाई और पोस्टमार्टम के लिए शहीद सुहरावर्दी मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया गया। पुलिस ने घटनास्थल और शव से संबंधित प्रारंभिक जानकारी जुटाई। अधिकारियों के मुताबिक, मौत का कारण निर्धारित करने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी।

शरीर पर चोट के निशान नहीं, नाक से निकल रहा था खून

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू प्रारंभिक जांच में सामने आई शारीरिक स्थिति है। पुलिस के अनुसार, तहसीफ के शरीर पर बाहर से दिखाई देने वाले चोट या घाव के स्पष्ट निशान नहीं मिले। हालांकि, नाक से खून निकलने की जानकारी सामने आई है।

सिर्फ बाहरी चोटों का नहीं मिलना मौत की वजह निर्धारित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। किसी व्यक्ति की मृत्यु किन परिस्थितियों में हुई, इसका पता लगाने के लिए चिकित्सकीय परीक्षण और फॉरेंसिक जांच जरूरी होती है।

अस्पताल के फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग की ओर से पोस्टमार्टम के दौरान विभिन्न जैविक नमूने एकत्र किए जाने की जानकारी दी गई। इनमें रक्त, लिवर, किडनी और पेट से संबंधित नमूने शामिल बताए गए हैं। डीएनए प्रोफाइलिंग के लिए भी नमूने एकत्र किए गए।

शेख हसीना के देश छोड़ने वाले वीडियो से जुड़ा था विवाद

तहसीफ सौरी का नाम इससे पहले अगस्त 2024 में शेख हसीना के बांग्लादेश छोड़ने से जुड़े एक वीडियो को लेकर चर्चा में आया था। 5 अगस्त 2024 को तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना ने सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन के बीच देश छोड़ दिया था। उस घटनाक्रम से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ था।

बाद में कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि इस वीडियो को रिकॉर्ड करने या प्रसारित करने में बांग्लादेश वायुसेना के कुछ अधिकारियों की भूमिका थी। तहसीफ सौरी का नाम भी इस मामले से जोड़ा गया था। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई थी।

मौत से पहले पॉडकास्ट में क्या बोले थे तहसीफ?

21 जुलाई 2026 को यूट्यूब आधारित कार्यक्रम ‘Speak with Rashid’ पर तहसीफ सौरी का एक इंटरव्यू प्रकाशित हुआ था। इस बातचीत में उन्होंने अपने वायुसेना करियर, सेवा से बाहर होने और शेख हसीना के देश छोड़ने वाले वीडियो से जुड़े आरोपों पर बात की थी।

कार्यक्रम के होस्ट मामुनुर राशिद ने उनसे वीडियो रिकॉर्ड करने और उसे प्रसारित करने के आरोपों के बारे में सवाल किया था। इसके जवाब में तहसीफ ने आरोपों के समर्थन में सबूत मांगे थे।

उन्होंने यह भी कहा था कि मीडिया रिपोर्टों में जिस तरह उनके नाम को प्रस्तुत किया गया, उससे उन्हें सामाजिक परेशानी और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।

इंटरव्यू में उन्होंने भारतीय खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) से कथित संबंधों के आरोपों को भी खारिज किया था। उन्होंने इन दावों को हास्यास्पद बताया और कहा था कि इस तरह के आरोपों को प्रमाण के आधार पर परखा जाना चाहिए।

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