अमित शाह 7 नवंबर को जाएंगे अयोध्या, पहली बार राम की पैड़ी पर दीपोत्सव में होंगे शामिल; दसवें संस्करण की तैयारियां तेज

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लखनऊ/अयोध्या: उत्तर प्रदेश में आगामी सात नवंबर को अयोध्या में आयोजित होने वाले भव्य दीपोत्सव समारोह में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह शामिल होंगे। यह पहला अवसर होगा जब अमित शाह अयोध्या के दीपोत्सव कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से हिस्सा लेंगे। इस बार दीपोत्सव का दसवां संस्करण आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम का आयोजन दिवाली की पूर्व संध्या पर रामनगरी अयोध्या में सरयू नदी के तट पर स्थित राम की पैड़ी पर किया जाएगा।

अमित शाह का यह दौरा उत्तर प्रदेश की राजनीतिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी की दो दिवसीय कार्यसमिति की शुरुआत करने के बाद उनका अगला उत्तर प्रदेश दौरा सात नवंबर को प्रस्तावित है। इस दौरान वह अयोध्या पहुंचकर दीपोत्सव की भव्यता के साक्षी बनेंगे।

सात नवंबर को अयोध्या पहुंचेंगे अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सात नवंबर को रामनगरी अयोध्या का दौरा करेंगे। उनके कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण दीपोत्सव समारोह में शामिल होना होगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह पहली बार इस भव्य आयोजन का हिस्सा बनेंगे।

अमित शाह भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। गृह मंत्रालय के साथ-साथ सहकारिता मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने वाले शाह पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

हाल ही में उन्होंने लखनऊ में बीजेपी की दो दिवसीय कार्यसमिति का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम में पार्टी संगठन और कार्यकर्ताओं से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। इसके बाद उनका अयोध्या दौरा निर्धारित है।

अयोध्या में दीपोत्सव के अवसर पर उनकी मौजूदगी से कार्यक्रम का राजनीतिक और सांस्कृतिक महत्व भी चर्चा में रहेगा। हालांकि, उनके दौरे के विस्तृत कार्यक्रम, आगमन के समय और अन्य गतिविधियों की पूरी जानकारी आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार स्पष्ट होगी।

राम की पैड़ी पर होगा दसवां भव्य दीपोत्सव

अयोध्या का दीपोत्सव सरयू नदी के किनारे स्थित राम की पैड़ी पर आयोजित किया जाता है। यह स्थान धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। दीपावली से पहले यहां बड़ी संख्या में दीप जलाकर उत्सव मनाया जाता है।

दीपोत्सव का उद्देश्य भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी की परंपरा और रामायण से जुड़ी सांस्कृतिक स्मृतियों को उत्सव के रूप में प्रस्तुत करना है। मान्यता के अनुसार, भगवान राम के वनवास से लौटने पर अयोध्या के लोगों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। इसी परंपरा को ध्यान में रखते हुए दीपोत्सव का आयोजन किया जाता है।

राम की पैड़ी पर सरयू नदी के घाटों को दीपों से सजाया जाता है। शाम के समय जब हजारों-लाखों दीप एक साथ प्रज्वलित होते हैं, तो पूरा परिसर रोशनी से जगमगा उठता है। इस दौरान श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए अयोध्या का वातावरण विशेष आकर्षण का केंद्र बन जाता है।

नौ वर्षों में दीपोत्सव ने बनाई अलग पहचान

अयोध्या में दीपोत्सव की शुरुआत वर्ष 2017 में हुई थी। इसके बाद हर वर्ष इस आयोजन को बड़े स्तर पर आयोजित किया जाता रहा है। पिछले नौ वर्षों में दीपोत्सव ने धार्मिक आयोजन के साथ-साथ सांस्कृतिक पहचान भी बनाई है।

इस कार्यक्रम में दीप प्रज्वलन के अलावा रामायण से संबंधित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, धार्मिक आयोजन और पारंपरिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते रहे हैं।

दीपोत्सव के माध्यम से अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने का प्रयास किया जाता है। इस आयोजन में देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं।

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और शहर में विकसित हो रही पर्यटन सुविधाओं के बीच दीपोत्सव का महत्व और बढ़ा है। धार्मिक पर्यटन के लिहाज से भी यह आयोजन महत्वपूर्ण माना जाता है।

अमित शाह की मौजूदगी से बढ़ेगा कार्यक्रम का राजनीतिक महत्व

अमित शाह का पहली बार अयोध्या के दीपोत्सव में शामिल होना इस आयोजन का एक प्रमुख राजनीतिक घटनाक्रम भी है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता के रूप में उनकी भूमिका राष्ट्रीय राजनीति के साथ उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी महत्वपूर्ण रही है।

लखनऊ में पार्टी की कार्यसमिति के शुभारंभ के तुरंत बाद अयोध्या का दौरा उनके उत्तर प्रदेश प्रवास का अगला महत्वपूर्ण कार्यक्रम होगा।

अयोध्या लंबे समय से भारतीय राजनीति और धार्मिक-सांस्कृतिक विमर्श का प्रमुख केंद्र रही है। राम मंदिर, धार्मिक पर्यटन और दीपोत्सव जैसे आयोजन यहां की पहचान से जुड़े हुए हैं।

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