नई दिल्ली। नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक ने उनके खिलाफ एक प्रतीकात्मक सार्वजनिक ‘महाभियोग’ कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी की है। इस कार्यक्रम में विपक्ष की करीब 21 राजनीतिक पार्टियों के शामिल होने की बात सामने आई है। विपक्ष का यह कदम निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर जारी असहमति के बीच उठाया जा रहा है।
विपक्षी दल इस कार्यक्रम के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त के प्रति अपना विरोध सार्वजनिक रूप से दर्ज कराना चाहते हैं। उनकी प्रमुख मांग ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कुछ मुद्दों पर निर्वाचन आयोग की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। हालांकि, इन आरोपों और आपत्तियों पर आयोग का पक्ष तथा संबंधित आधिकारिक स्पष्टीकरण अलग से देखना जरूरी होगा।
खड़गे के आवास पर जुटने लगे INDIA ब्लॉक के नेता
इस राजनीतिक कार्यक्रम से पहले दिल्ली में विपक्षी नेताओं की गतिविधियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के प्रमुख नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर INDIA ब्लॉक के वरिष्ठ नेताओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी खड़गे के आवास पहुंचे। यहां विपक्षी दलों के नेताओं के बीच प्रस्तावित कार्यक्रम और आगे की रणनीति को लेकर चर्चा होने की जानकारी सामने आई है।
खड़गे का आवास इस बैठक के लिहाज से महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है, क्योंकि कांग्रेस सहित गठबंधन के कई दल इस विरोध कार्यक्रम में भाग लेने की तैयारी कर रहे हैं। अलग-अलग विपक्षी पार्टियों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी से यह स्पष्ट होता है कि इस मुद्दे पर गठबंधन सामूहिक राजनीतिक रुख प्रदर्शित करना चाहता है।
मीरा कुमार करेंगी प्रतीकात्मक कार्यवाही की अध्यक्षता
प्रस्तावित कार्यक्रम की एक अहम बात यह है कि पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार पूरी प्रतीकात्मक कार्यवाही की अध्यक्षता करेंगी। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से प्रस्ताव पेश किया जाएगा। इस तरह कार्यक्रम को संसदीय प्रक्रिया की शैली में आयोजित करने की तैयारी है।
यहां यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि विपक्ष द्वारा आयोजित किया जा रहा ‘महाभियोग’ एक प्रतीकात्मक सार्वजनिक राजनीतिक कार्यक्रम है। इसे मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की किसी आधिकारिक संवैधानिक या संसदीय प्रक्रिया के समान नहीं माना जाना चाहिए। कार्यक्रम का उद्देश्य विपक्ष की आपत्तियों को सामने रखना और राजनीतिक विरोध दर्ज कराना है।
SIR को लेकर क्यों नाराज है विपक्ष?
इस पूरे विवाद के केंद्र में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR है। निर्वाचन आयोग की ओर से मतदाता सूची को अपडेट करने और उसकी शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए पुनरीक्षण की प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची में पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करना और नियमों के अनुसार गलत या अपात्र प्रविष्टियों की पहचान करना होता है।
हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने कई तरह की आपत्तियां उठाई हैं। विपक्ष का कहना है कि SIR के दौरान मतदाताओं के अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़े सवालों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। विपक्षी दलों की चिंता है कि यदि पुनरीक्षण प्रक्रिया में किसी पात्र मतदाता का नाम प्रभावित होता है, तो उसे अपनी स्थिति स्पष्ट करने और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग
INDIA ब्लॉक के दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। विपक्ष इस मांग को SIR और कथित चुनावी अनियमितताओं से जुड़े अपने आरोपों के आधार पर उठा रहा है। प्रस्तावित प्रतीकात्मक कार्यक्रम इसी विरोध को अधिक संगठित और सार्वजनिक रूप देने की कोशिश है।
किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ राजनीतिक दलों की असहमति लोकतांत्रिक व्यवस्था में बहस का विषय हो सकती है। लेकिन आरोपों की सत्यता और किसी अधिकारी की जिम्मेदारी का निर्धारण संबंधित तथ्यों, नियमों और उचित संस्थागत प्रक्रिया के आधार पर ही किया जाना चाहिए। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में विपक्ष की मांग और विरोध कार्यक्रम का विवरण है, लेकिन सभी आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं है।





