Air India pilot dope test:गांजे की पुष्टि के बाद क्या रद्द होगा लाइसेंस? जानें क्या कहते हैं DGCA के नियम

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नई दिल्ली: फुकेट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट (AI2379) में हवा में अचानक आई भारी गिरावट (300 फीट का ड्रॉप) और माइनस-1G की घटना में अब एक नया और चौंकाने वाला मोड़ आया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, विमान के कैप्टन (पायलट-इन-कमांड) की कन्फर्मेटरी लैब जांच में माइंड-अल्टरिंग सब्सटेंस (गांजा/Marijuana) के सेवन की पुष्टि हुई है।

इस घटना में 20 यात्री और 4 क्रू मेंबर्स घायल हो गए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) ने भी कड़ा रुख अपनाया है और एयरलाइन के शीर्ष प्रबंधन से जवाब तलब किया है।

🚨 घटना वाले दिन कॉकपिट के अंदर क्या हुआ था?

जाँच के दौरान कॉकपिट के डेटा से बेहद हैरान करने वाली जानकारी सामने आई है:

  • पायलट अपनी सीट पर नहीं थे: जिस समय विमान में ‘स्टॉल’ (विमान के पंखों का लिफ्ट खो देना) का अलार्म बजा, उस वक्त कैप्टन अपनी मुख्य सीट पर मौजूद नहीं थे, बल्कि को-पायलट (फर्स्ट ऑफिसर) की सीट के पीछे खड़े थे।
  • ऑटो-पायलट बंद हुआ: स्टॉल वार्निंग के तुरंत बाद ऑटो-पायलट बंद हो गया। को-पायलट ने इमरजेंसी प्रोटोकॉल का पालन करते हुए विमान का अगला हिस्सा (Nose) तेजी से नीचे किया।
  • माइनस-1G की स्थिति: अचानक नोज-डाउन करने के कारण प्लेन ‘नेगेटिव जी-फोर्स’ (Negative G) में चला गया, जिससे सामान, यात्री और कॉकपिट में मौजूद क्रू हवा में उछल गए।
  • कैप्टन का कंट्रोल लेना: इसके बाद कैप्टन ने किसी तरह अपनी सीट पर पहुंचकर इंजन थ्रस्ट को अधिकतम (Maximum Continuous Thrust) बढ़ाया और प्लेन को स्थिर किया।

👁️ यात्रियों और क्रू ने लगाए गंभीर आरोप

बोर्डिंग के दौरान और उड़ान के बाद यात्रियों ने पायलट के आचरण पर सवाल उठाए थे:

  1. धीमी प्रतिक्रिया और लाल आंखें: यात्रियों का दावा है कि बोर्डिंग के समय जब उन्होंने कैप्टन से बातचीत की, तो वे बेहद धीमी गति से जवाब दे रहे थे और उनकी आंखें लाल थीं।
  2. विमान के फर्श पर बैठना: रिपोर्टों के अनुसार, कॉकपिट में पायलट कई बार फर्श पर बैठे और स्थिति सामान्य नहीं लग रही थी।
  3. मामला दबाने की कोशिश: घटना के बाद कैप्टन ने कॉकपिट से बाहर आकर यात्रियों से वीडियो न बनाने की अपील की और कहा कि “बात का बतंगड़ न बनाया जाए”।

📜 DGCA के नियम: क्या रद्द होगा पायलट का लाइसेंस?

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के ‘सब्सटेंस एब्यूज’ नियमों के तहत कार्रवाई के निम्नलिखित प्रावधान हैं:

उल्लंघन (Violation)नियम एवं सजा (DGCA Guidelines)
पहली बार (First Offence)आमतौर पर पायलट को मेडिकल काउंसिलिंग, रिहैबिलिटेशन या नशामुक्ति केंद्र भेजा जाता है। दोबारा ड्यूटी जॉइन करने के लिए निगेटिव रिपोर्ट और फिटनेस सर्टिफिकेट अनिवार्य है।
दूसरी बार (Second Offence)पायलट का फ्लाइंग लाइसेंस 3 साल के लिए निलंबित (Suspend) कर दिया जाता है।
तीसरी बार (Third Offence)लाइसेंस को स्थायी रूप से रद्द (Cancel) कर दिया जाता है।
टेस्ट से इंकार करनाटेस्ट देने से मना करना पॉजिटिव आने जितना ही गंभीर अपराध है। 48 घंटे में टेस्ट न देने पर 1 साल का सस्पेंशन मिलता है।

क्या इस मामले में सीधे लाइसेंस रद्द हो सकता है?

यद्यपि नियमानुसार पहली बार में रिहैब का विकल्प होता है, लेकिन इस घटना में 145 लोगों की जान खतरे में डालने और 24 लोगों के घायल होने के कारण एक्सपर्ट्स और ‘फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट’ (FIP) ने आरोपी पायलट को लाइफ-टाइम बैन (आजीवन प्रतिबंध) करने की मांग की है।

नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने भी साफ किया है कि यदि प्रतिबंधित पदार्थों के सेवन का मामला साबित होता है, तो सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर मौजूदा नियमों को भी कड़ा किया जाएगा।

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