छत्तीसगढ़ में होम-स्टे से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर, आदिवासी युवाओं और महिला समूहों को मिलेगा स्वरोजगार का मौकापर्यटन

0
7

 रायपुर। छत्तीसगढ़ के जनजातीय और ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन को रोजगार और स्वरोजगार का प्रभावी माध्यम बनाने की दिशा में पहल की जा रही है। राज्य सरकार की नई उद्योग नीति और होम-स्टे नीति के माध्यम से बस्तर, सरगुजा और जशपुर जैसे जनजातीय बहुल क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय लोगों की आजीविका के अवसर बढ़ाने के साथ छत्तीसगढ़ की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, पारंपरिक खान-पान और ग्रामीण जीवनशैली को देश-दुनिया के पर्यटकों तक पहुंचाना है।

इसी दिशा में भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के वित्तीय सहयोग से आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (टीआरटीआई), नवा रायपुर द्वारा अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राहियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य इच्छुक लोगों को होम-स्टे संचालन के माध्यम से आजीविका के नए अवसरों से जोड़ना है।

बस्तर, सरगुजा और जशपुर में पर्यटन की संभावनाओं पर जोर

छत्तीसगढ़ के बस्तर, सरगुजा और जशपुर जैसे क्षेत्रों में प्राकृतिक परिवेश, स्थानीय परंपराओं, जनजातीय संस्कृति और ग्रामीण जीवनशैली से जुड़े पर्यटन की संभावनाएं हैं। इन क्षेत्रों की सांस्कृतिक विविधता और पारंपरिक जीवन पद्धति पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकती है।

होम-स्टे व्यवस्था के तहत पर्यटक स्थानीय परिवारों के यहां ठहरकर क्षेत्र की संस्कृति, भोजन और दैनिक जीवन को करीब से समझ सकते हैं। पारंपरिक होटल व्यवस्था की तुलना में यह अनुभव स्थानीय समुदायों से सीधा जुड़ाव प्रदान कर सकता है।

इस तरह के पर्यटन में स्थानीय परिवारों को अपने घरों में उपलब्ध उपयुक्त कमरों को पर्यटकों के ठहरने के लिए तैयार करने का अवसर मिल सकता है। इसके साथ ही स्थानीय भोजन, पारंपरिक हस्तशिल्प, सांस्कृतिक गतिविधियों और क्षेत्रीय भ्रमण जैसी सेवाओं के माध्यम से भी आय अर्जित करने की संभावनाएं बन सकती हैं।

टीआरटीआई नवा रायपुर की विशेष प्रशिक्षण पहल

अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों को पर्यटन आधारित आजीविका से जोड़ने के उद्देश्य से आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, नवा रायपुर द्वारा विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम को भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय का वित्तीय सहयोग प्राप्त हुआ।

इस पहल का प्रमुख उद्देश्य इच्छुक जनजातीय हितग्राहियों को होम-स्टे संचालन की जानकारी उपलब्ध कराना और उन्हें स्वरोजगार की संभावनाओं से परिचित कराना है। स्थानीय स्तर पर पर्यटन से जुड़े व्यवसायों को विकसित करने के लिए प्रशिक्षण की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है, क्योंकि इससे लोगों को अतिथि सत्कार, आवास प्रबंधन और पर्यटकों की जरूरतों को समझने में सहायता मिल सकती है।

आदिवासी युवाओं के लिए स्वरोजगार की संभावनाएं

ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों का विस्तार एक महत्वपूर्ण विषय है। पर्यटन आधारित गतिविधियां स्थानीय स्तर पर काम करने और अपने क्षेत्र में ही व्यवसाय विकसित करने का विकल्प प्रदान कर सकती हैं।

होम-स्टे शुरू करने वाले युवाओं को आवास व्यवस्था के अलावा पर्यटकों के लिए स्थानीय भ्रमण, भोजन, परिवहन समन्वय और क्षेत्रीय संस्कृति से परिचित कराने जैसी सेवाओं से जुड़ने का अवसर मिल सकता है। स्थानीय परिस्थितियों और पर्यटकों की मांग के अनुसार ये गतिविधियां अलग-अलग रूप ले सकती हैं।

इस व्यवस्था का एक संभावित लाभ यह भी है कि स्थानीय युवाओं को अपने क्षेत्र की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विशेषताओं को पर्यटन से जोड़ने का अवसर मिलेगा। वे अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों की पहचान को बढ़ावा देने में भूमिका निभा सकते हैं।

महिला समूहों और स्थानीय परिवारों को मिल सकता है लाभ

होम-स्टे पर्यटन का एक महत्वपूर्ण पहलू महिलाओं और स्थानीय समूहों की आर्थिक भागीदारी भी है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूह पहले से ही भोजन तैयार करने, स्थानीय उत्पादों के निर्माण और पारंपरिक वस्तुओं की बिक्री जैसी गतिविधियों से जुड़े हो सकते हैं।

पर्यटन के साथ इन गतिविधियों को जोड़ने से महिला समूहों के लिए अतिरिक्त बाजार विकसित होने की संभावना बन सकती है। उदाहरण के लिए, स्थानीय व्यंजन, पारंपरिक खाद्य पदार्थ, हस्तशिल्प और क्षेत्रीय उत्पाद पर्यटकों के सामने प्रस्तुत किए जा सकते हैं।

जनजातीय संस्कृति और पारंपरिक खान-पान को मिलेगी पहचान

छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक भोजन और ग्रामीण जीवनशैली इस पर्यटन पहल के महत्वपूर्ण आधार हैं। होम-स्टे के माध्यम से पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति को समझने और क्षेत्रीय परंपराओं से परिचित होने का अवसर मिल सकता है।

स्थानीय परिवार अपने क्षेत्र के भोजन, रीति-रिवाजों, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत के बारे में पर्यटकों को जानकारी दे सकते हैं। इससे स्थानीय पहचान को बढ़ावा देने के साथ पारंपरिक ज्ञान और कौशल को भी महत्व मिल सकता है।

लेकिन सांस्कृतिक पर्यटन के विकास में स्थानीय समुदायों की सहमति और भागीदारी आवश्यक है। जनजातीय परंपराओं को प्रस्तुत करते समय उनकी गरिमा, निजी जीवन और सांस्कृतिक संवेदनशीलता का सम्मान किया जाना चाहिए। पर्यटन गतिविधियों का संचालन इस तरह होना चाहिए कि स्थानीय लोगों की जीवनशैली पर अनावश्यक दबाव न पड़े।

छत्तीसगढ़ के जनजातीय और ग्रामीण अंचलों में होम-स्टे पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल स्थानीय लोगों, युवाओं और महिला समूहों के लिए स्वरोजगार की संभावनाएं तैयार कर सकती है। जनजातीय कार्य मंत्रालय के वित्तीय सहयोग से टीआरटीआई, नवा रायपुर द्वारा आयोजित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बस्तर, सरगुजा और जशपुर जैसे क्षेत्रों में पर्यटन को स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक खान-पान और ग्रामीण जीवनशैली से जोड़कर विकसित करने की संभावनाएं हैं। इस पहल की दीर्घकालीन सफलता प्रशिक्षण की गुणवत्ता, बुनियादी सुविधाओं, पर्यटकों की मांग और स्थानीय समुदायों की प्रभावी भागीदारी पर निर्भर करेगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here