नई दिल्ली। देशभर में विजयादशमी का पर्व पारंपरिक उत्साह और धार्मिक आस्था के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर रावण दहन के जरिए बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है। राजधानी दिल्ली में भी दशहरे को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं। यहां अलग-अलग रामलीला समितियों ने रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों के साथ कुछ ऐसे प्रतीकात्मक पुतले भी तैयार किए हैं, जिनके माध्यम से समकालीन सामाजिक समस्याओं की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया जा रहा है।
द्वारका में 221 फीट ऊंचे रावण का पुतला
दिल्ली के द्वारका क्षेत्र में श्री रामलीला सोसायटी की ओर से 221 फीट ऊंचा रावण का पुतला तैयार किया गया है। इसे भारत के सबसे ऊंचे रावण के पुतलों में से एक और आयोजकों की ओर से देश का सबसे ऊंचा पुतला बताया जा रहा है। इतनी अधिक ऊंचाई के कारण यह आयोजन लोगों के बीच खास चर्चा का विषय बना हुआ है।
दशहरे पर रावण के पुतले का दहन रामलीला आयोजनों का प्रमुख आकर्षण होता है। पुतले की ऊंचाई, उसकी सजावट और दहन की व्यवस्था आयोजन को विशिष्ट बनाती है। द्वारका में तैयार किया गया विशाल पुतला भी इसी परंपरा को बड़े स्तर पर प्रस्तुत करने का प्रयास है।
हालांकि, 221 फीट के पुतले को देश का सबसे ऊंचा बताने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि के लिए अन्य स्थानों पर बनाए गए पुतलों के आंकड़ों से तुलना आवश्यक है। फिर भी, इसकी बताई गई ऊंचाई ने दिल्ली के दशहरा आयोजनों को विशेष पहचान दी है।
लव कुश रामलीला में 110 फीट का रावण
दिल्ली की प्रसिद्ध लव कुश रामलीला में इस बार 110 फीट ऊंचा रावण का पुतला तैयार किया गया है। यह रामलीला राजधानी के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में गिनी जाती है। हर वर्ष यहां रामायण के प्रसंगों के मंचन के साथ विजयादशमी पर रावण दहन का आयोजन किया जाता है।
इस बार तैयार किए गए पुतले को लेकर भी लोगों में उत्सुकता है। रावण दहन का आयोजन भगवान श्रीराम की विजय और अन्याय के अंत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। रामलीला के मंचन के माध्यम से दर्शकों को रामायण की घटनाओं, पात्रों और उनसे मिलने वाली सीख से परिचित कराया जाता है।
इंद्रप्रस्थ रामलीला में ‘आज का रावण’
दिल्ली के रामलीला आयोजनों में इस बार एक अलग पहल भी देखने को मिल रही है। रामलीला कमेटी इंद्रप्रस्थ के विजयादशमी उत्सव में ‘आज का रावण’ नाम से एक प्रतीकात्मक पुतला तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य वर्तमान समय में मौजूद सामाजिक बुराइयों और लोगों को प्रभावित करने वाली समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करना है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस पुतले के माध्यम से नकली दवाओं और वस्तुओं के अधिकतम खुदरा मूल्य यानी एमआरपी से जुड़ी समस्याओं जैसे मुद्दों को सामने रखने का प्रयास किया गया है। इस तरह पारंपरिक रावण दहन को केवल धार्मिक रस्म तक सीमित न रखकर सामाजिक जागरूकता से जोड़ने की कोशिश की गई है।
आयोजकों के लिए अग्निशमन व्यवस्था, आपातकालीन निकास, भीड़ नियंत्रण और आयोजन स्थल की सुरक्षा पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। दर्शकों को भी निर्धारित स्थानों से ही कार्यक्रम देखना चाहिए और किसी भी आपात स्थिति में पुलिस तथा आयोजन प्रबंधन के निर्देशों का पालन करना चाहिए।
कुल मिलाकर, दिल्ली में इस बार दशहरा कई वजहों से खास बना हुआ है। द्वारका का 221 फीट ऊंचा रावण, लव कुश रामलीला का 110 फीट का पुतला, इंद्रप्रस्थ का ‘आज का रावण’ और पीतमपुरा में कॉकरोच का प्रतीकात्मक पुतला इस पर्व के अलग-अलग रूप सामने लाते हैं। इन आयोजनों में धार्मिक परंपरा के साथ सामाजिक समस्याओं पर ध्यान देने की कोशिश भी दिखाई देती है। विजयादशमी का व्यापक संदेश यही है कि बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव मनाने के साथ-साथ अपने आसपास की गलतियों को पहचानकर उन्हें दूर करने का प्रयास भी किया जाए।




