नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) में निर्णय प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर सामने आई रिपोर्टों के बाद बुधवार को आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। चुनाव आयोग ने कहा है कि उसके तीनों सदस्य—मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी—निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं और SIR समेत आयोग के अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग की यह सफाई उन मीडिया रिपोर्टों के बाद आई है, जिनमें दोनों चुनाव आयुक्तों द्वारा मतदाता सूची और चुनावी डेटा से जुड़े विभिन्न मामलों पर आपत्तियां उठाए जाने की बात कही गई थी।
चुनाव आयोग ने मतभेदों की खबरों पर क्या कहा?
ECI के अधिकारियों के मुताबिक, तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय, सुझाव या किसी मुद्दे पर चिंता व्यक्त किया जाना निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है। आयोग का कहना है कि व्यक्तिगत स्तर पर किसी विषय पर अलग राय या तकनीकी सुझाव होना और संस्थागत स्तर पर अंतिम निर्णय पर असहमति होना एक ही बात नहीं है। अंतिम फैसला विचार-विमर्श के बाद लिया जाता है और आयोग के अनुसार उसके सभी निर्णयों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त होती है।
बुधवार को सामने आई जानकारी के अनुसार, चुनाव आयोग ने विशेष रूप से SIR को लेकर उठाए गए सवालों के संदर्भ में कहा कि इस प्रक्रिया से जुड़े फैसले भी तीनों आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं। यानी आयोग ने उन दावों को खारिज किया है कि SIR को लेकर तीनों शीर्ष चुनाव अधिकारियों के बीच कोई ऐसा संस्थागत मतभेद है, जिसके कारण फैसले एकतरफा तरीके से लिए जा रहे हों।
फिलहाल आयोग का आधिकारिक पक्ष यही है कि तीनों चुनाव आयुक्तों के बीच विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग सुझाव या चिंताएं सामने आ सकती हैं, लेकिन SIR समेत अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। दूसरी ओर, जिन रिपोर्टों में आंतरिक आपत्तियों का उल्लेख किया गया है, उनमें विभिन्न चुनावी प्रक्रियाओं और तकनीकी व्यवस्थाओं को लेकर दर्ज चिंताओं का विवरण दिया गया है। इसलिए पूरे मामले में महत्वपूर्ण अंतर यह है कि व्यक्तिगत स्तर पर किसी मुद्दे पर सवाल या सुझाव होना और अंतिम संस्थागत निर्णय पर असहमति होना अलग-अलग बातें हैं।




