नवोदय विद्यालय शमशाबाद में भक्तिभाव और उत्साह के साथ मनाया गया दशहरा उत्सव, विद्यार्थियों ने किया रामलीला का मंचन

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विदिशा। विदिशा जिले के शमशाबाद स्थित पीएमश्री स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय में दशहरा उत्सव भक्तिभाव, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। आयोजन के दौरान भगवान श्रीराम के जीवन, उनके आदर्शों और सत्य की विजय के संदेश को विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। विद्यार्थियों ने रामलीला का मंचन कर दर्शकों को रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंगों से परिचित कराया।

दशहरा भारतीय संस्कृति के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य और अन्याय पर न्याय की विजय का प्रतीक माना जाता है। विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को इस पर्व के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व से परिचित कराने के साथ-साथ उनके भीतर नैतिक मूल्यों, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी रहा।

विद्यार्थियों ने रामलीला का किया सुंदर मंचन

दशहरा उत्सव का प्रमुख आकर्षण विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत रामलीला रही। इसमें विद्यार्थियों ने भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों को मंच पर प्रस्तुत किया। रामलीला भारतीय लोक और धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके माध्यम से रामायण की कथाओं और उनके नैतिक संदेशों को जनसामान्य तक पहुंचाया जाता है।

विद्यालय के विद्यार्थियों ने इस प्रस्तुति के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्श चरित्र, कर्तव्यनिष्ठा, सत्य के प्रति समर्पण और मर्यादा के महत्व को सामने रखा। रामलीला जैसी गतिविधियां विद्यार्थियों को भारतीय साहित्य, इतिहास और संस्कृति से जोड़ने का अवसर प्रदान करती हैं।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने से विद्यार्थियों को मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने, संवाद प्रस्तुत करने और समूह में मिलकर कार्य करने का अनुभव भी मिलता है। इस प्रकार के आयोजन शिक्षा के साथ व्यक्तित्व विकास और सांस्कृतिक समझ को बढ़ाने में सहायक होते हैं।

उपप्राचार्य एमडी मिश्रा ने भजनों से बांधा समां

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के उपप्राचार्य एमडी मिश्रा ने भगवान श्रीराम के प्रति अपनी भक्ति और श्रद्धा व्यक्त करते हुए भजन प्रस्तुत किए। उनकी भजन प्रस्तुति ने आयोजन के भक्तिमय वातावरण को और अधिक भावपूर्ण बना दिया।

धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में भजनों का विशेष महत्व होता है। इनके माध्यम से श्रद्धालु अपनी आस्था व्यक्त करते हैं और धार्मिक परंपराओं से जुड़ाव महसूस करते हैं। विद्यालय के दशहरा उत्सव में भी भक्ति संगीत ने कार्यक्रम को एक विशेष स्वरूप प्रदान किया।

एमडी मिश्रा की प्रस्तुति ने विद्यार्थियों और उपस्थित शिक्षकों को भगवान श्रीराम के प्रति श्रद्धा के साथ उनके आदर्शों को समझने का संदेश दिया। कार्यक्रम में धार्मिक भावनाओं और सांस्कृतिक गतिविधियों का सुंदर समन्वय देखने को मिला।

प्राचार्य जितेंद्र कुमार मिश्रा ने दिया नैतिक मूल्यों का संदेश

कार्यक्रम के मुख्य आकर्षणों में विद्यालय के प्राचार्य जितेंद्र कुमार मिश्रा का उद्बोधन रहा। उन्होंने दशहरा पर्व से मिलने वाली सीख को विद्यार्थियों के जीवन से जोड़ते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर मौजूद दस विकारों और बुराइयों को समाप्त करने का प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन से प्रेरणा लेने और उनके आदर्शों को अपनाने पर जोर दिया। प्राचार्य ने विद्यार्थियों को स्वयं के साथ-साथ अपने परिवार, समाज, राष्ट्र और संपूर्ण मानवता के बेहतर भविष्य के निर्माण में योगदान देने का संदेश दिया।

उनके उद्बोधन का मूल भाव यह रहा कि दशहरा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन और सकारात्मक बदलाव का अवसर भी है। रावण के पुतले को बुराई का प्रतीक मानने के साथ व्यक्ति को अपने व्यवहार में मौजूद अहंकार, क्रोध, लोभ और अन्य नकारात्मक प्रवृत्तियों पर नियंत्रण रखने का प्रयास करना चाहिए।

पीएमश्री स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय शमशाबाद में आयोजित दशहरा उत्सव धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और नैतिक शिक्षा का संगम रहा। विद्यार्थियों की रामलीला, उपप्राचार्य एमडी मिश्रा के भजन, वरिष्ठ शिक्षक पीसी गौतम की स्वरचित कविता और प्राचार्य जितेंद्र कुमार मिश्रा के प्रेरक उद्बोधन ने कार्यक्रम को विशेष स्वरूप दिया।।कार्यक्रम का संचालन विद्यालय के सीसीए एवं मीडिया प्रभारी और स्नातकोत्तर शिक्षक अंग्रेजी मनोज का कुमार वर्मा के मार्गदर्शन में कक्षा दसवीं की छात्रा सुरुचि किरार एवं आयुषी धाकड़ ने किया।

आयोजन ने यह संदेश दिया कि दशहरा केवल रावण के पुतले के दहन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वयं के भीतर मौजूद बुराइयों को पहचानने और उन्हें दूर करने का अवसर भी है। भगवान श्रीराम के आदर्शों से प्रेरणा लेकर सत्य, मर्यादा, कर्तव्य और मानवता के मूल्यों को अपनाना ही इस पर्व की सार्थकता है।

विद्यालय परिवार की सहभागिता के साथ संपन्न हुए इस आयोजन ने विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति से जोड़ने और अच्छे नागरिक के रूप में विकसित होने की प्रेरणा दी।

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