मिडिल ईस्ट में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच सोना-चांदी में गिरावट, MCX पर सोना ₹1.45 लाख के स्तर पर पहुंचा

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नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने तथा चांदी के भाव में गिरावट दर्ज की गई। दशहरे के दिन शाम 5 बजे मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कारोबार शुरू होने के बाद सोने की कीमत फिसलकर 1.45 लाख रुपये के स्तर पर आ गई। वहीं, चांदी का भाव भी गिरकर लगभग 2.09 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना और चांदी दोनों दबाव में रहे, जबकि कच्चे तेल की कीमत 111 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई।

MCX पर सोना 1.45 लाख रुपये के स्तर पर पहुंचा

घरेलू वायदा बाजार MCX पर दशहरे के दिन शाम 5 बजे कारोबार शुरू होने के बाद सोने में गिरावट देखी गई। उपलब्ध बाजार विवरण के अनुसार, सोने का भाव 1.45 लाख रुपये के स्तर पर आ गया। यह स्तर निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि सोने की कीमतों में होने वाले बदलाव का असर आभूषण खरीदने वालों, कारोबारियों और निवेशकों के फैसलों पर पड़ सकता है।

हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि MCX पर कारोबार होने वाला सोना वायदा अनुबंध होता है। इसलिए वायदा बाजार का भाव और स्थानीय ज्वेलरी दुकानों पर मिलने वाला सोना एक समान होना जरूरी नहीं है। खुदरा बाजार में कीमतें शुद्धता, स्थानीय कर, मेकिंग चार्ज, जीएसटी और कारोबारी मार्जिन जैसे कारकों से प्रभावित होती हैं। साथ ही, वायदा अनुबंध की अवधि और बाजार में उपलब्ध अलग-अलग कॉन्ट्रैक्ट के कारण भी कीमतों में अंतर हो सकता है।

इसलिए सोने की खरीदारी करने वाले ग्राहकों को केवल वायदा बाजार के भाव के आधार पर अंतिम कीमत तय नहीं करनी चाहिए। खरीदारी से पहले स्थानीय सराफा बाजार में 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने का ताजा भाव जांचना उपयोगी रहेगा।

चांदी भी फिसली, 2.09 लाख रुपये प्रति किलो के करीब कारोबार

सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी कमजोरी दर्ज की गई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, MCX पर चांदी लगभग 2.09 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार कर रही थी। चांदी की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर केवल आभूषण बाजार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि औद्योगिक उपयोग से जुड़ी मांग भी इसके बाजार को प्रभावित करती है।

चांदी का इस्तेमाल आभूषणों के अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा उपकरणों और कई औद्योगिक उत्पादों में किया जाता है। इस कारण इसकी कीमत पर निवेशकों की गतिविधियों के साथ-साथ औद्योगिक मांग, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और डॉलर की चाल का भी असर पड़ सकता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना-चांदी दबाव में

वैश्विक बाजार में भी कीमती धातुओं में कमजोरी देखने को मिली। दिए गए बाजार विवरण के अनुसार, शाम 5 बजे तक COMEX पर सोना लगभग 4,135 डॉलर प्रति औंस और चांदी करीब 57 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही थी।

अंतरराष्ट्रीय बाजार के भाव भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत देते हैं। भारत अपनी सोने की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों, डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर, आयात शुल्क और अन्य लागतों में बदलाव घरेलू सोने के भाव को प्रभावित कर सकते हैं।

कच्चा तेल 111 डॉलर प्रति बैरल के पार

सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट के बीच कच्चे तेल की कीमत 111 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने की जानकारी सामने आई। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बाजार की चिंताएं कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। इस क्षेत्र का वैश्विक तेल आपूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान है, इसलिए यहां किसी भी बड़े घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है।

कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि का असर आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण होता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में लंबे समय तक तेल महंगा रहने पर आयात बिल बढ़ने, परिवहन लागत पर दबाव आने और महंगाई संबंधी चिंताएं बढ़ने की आशंका हो सकती है।

हालांकि, तेल की कीमतों में हर वृद्धि का असर तुरंत और समान रूप से सभी क्षेत्रों पर नहीं पड़ता। इसका प्रभाव कीमतों के ऊंचे स्तर पर बने रहने, रुपये की विनिमय दर, सरकारी नीतियों और घरेलू ईंधन मूल्य निर्धारण सहित कई कारकों पर निर्भर करता है।

आगे सोना-चांदी की कीमतों पर रहेगी बाजार की नजर

दशहरे के दिन सामने आए बाजार स्तरों के अनुसार, घरेलू बाजार में सोना लगभग 1.45 लाख रुपये और चांदी करीब 2.09 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार कर रही थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना लगभग 4,135 डॉलर और चांदी करीब 57 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर थी, जबकि कच्चा तेल 111 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था।

आगे की दिशा तय करने में मिडिल ईस्ट के घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतें, डॉलर की मजबूती, ब्याज दरों से जुड़ी उम्मीदें और निवेशकों की खरीद-बिक्री महत्वपूर्ण रहेंगे। हालांकि, ये भाव एक विशेष समय पर उपलब्ध बाजार विवरण को दर्शाते हैं; इन्हें वर्तमान लाइव कीमत या भविष्य के भाव की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।

कुल मिलाकर, सोना-चांदी और कच्चे तेल में एक साथ दिखाई दिए इन बदलावों ने कमोडिटी बाजार की अस्थिरता को रेखांकित किया है। खरीदारों और निवेशकों के लिए किसी भी निर्णय से पहले ताजा बाजार भाव और विश्वसनीय वित्तीय जानकारी की पुष्टि करना सबसे बेहतर कदम रहेगा।

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