MP में शराब के शौकीनों के लिए बड़ी खबर: अब दुकान पर क्यूआर कोड स्कैन करते ही दिखेगी सही कीमत, मनमानी वसूली पर लगेगा ब्रेक

0
2

भोपाल। मध्य प्रदेश में शराब दुकानों पर एमआरपी (MRP) से ज्यादा दाम वसूलने वाले ठेकेदारों की अब खैर नहीं। आबकारी विभाग ने प्रदेश भर में शराब की बिक्री में पारदर्शिता लाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य की हर शराब दुकान पर ई-आबकारी पोर्टल द्वारा जनरेटेड ‘क्यूआर कोड’ (QR Code) लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।

मोबाइल पर एक क्लिक में खुलेगी रेट लिस्ट

आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना के अनुसार, इस नई व्यवस्था से उपभोक्ता सशक्त होंगे। ग्राहक जैसे ही दुकान पर लगे क्यूआर कोड को अपने स्मार्टफोन से स्कैन करेंगे, उनके मोबाइल पर संबंधित जिले की शराब की आधिकारिक रेट लिस्ट खुल जाएगी। इससे मौके पर ही ब्रांड की वास्तविक और कानूनी दरों का सत्यापन किया जा सकेगा।

लाइसेंस निरस्त करने जैसी कड़ी कार्रवाई

विभाग ने साफ किया है कि यदि कोई दुकान संचालक निर्धारित एमआरपी (MRP) से ज्यादा या एमएसपी (MSP) से कम कीमत पर शराब बेचता पाया गया, तो इसे गंभीर अनियमितता माना जाएगा। ऐसे मामलों में दोषी ठेकेदारों के खिलाफ लाइसेंस निरस्त करने तक की कठोर कार्रवाई की जा सकती है।

10 दिवसीय विशेष जांच अभियान शुरू

नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए प्रदेश भर में 28 अप्रैल 2026 से 7 मई 2026 तक एक विशेष जांच अभियान चलाया जा रहा है। सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इसकी विस्तृत रिपोर्ट 11 मई तक अनिवार्य रूप से विभाग को सौंपें।

दुकानों पर कैसे लगेंगे क्यूआर कोड? (मुख्य नियम)

आबकारी विभाग ने क्यूआर कोड चस्पा करने के लिए कड़े मापदंड तय किए हैं:

  • गुणवत्ता: क्यूआर कोड को A-3 आकार के कम से कम 250 GSM वाले स्टिकर पेपर पर प्रिंट किया जाएगा, ताकि वे टिकाऊ रहें।
  • संख्या: हर दुकान के लिए 5 क्यूआर कोड प्रिंट होंगे, जिनमें से 3 प्रमुख स्थानों पर लगेंगे और 2 बैकअप के तौर पर सुरक्षित रखे जाएंगे।
  • सत्यापन: संबंधित सर्कल इंचार्ज खुद कोड स्कैन कर यह सुनिश्चित करेंगे कि एमआरपी और एमएसपी की जानकारी सही से प्रदर्शित हो रही है या नहीं।
  • पारदर्शिता: चस्पा किए गए क्यूआर कोड के साथ दुकान की फोटो विभाग को भेजना अनिवार्य होगा।

क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

अक्सर शिकायतें मिलती थीं कि शराब दुकानों पर प्रिंट रेट से 10 से 50 रुपये तक अतिरिक्त वसूले जाते हैं। वहीं, कुछ जगहों पर प्रतिस्पर्धा के चक्कर में तय न्यूनतम मूल्य (MSP) से भी कम में शराब बेची जाती है। इस नई डिजिटल व्यवस्था से अवैध वसूली और अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा दोनों पर लगाम लगेगी।


मध्य प्रदेश की ताजातरीन और निष्पक्ष खबरों के लिए हमारी वेबसाइट के साथ बने रहें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here