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सीहोर डेस्क: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा कृषि उपज मंडियों में मंडी शुल्क (Mandi Tax) में की गई बढ़ोतरी के खिलाफ प्रदेश भर के व्यापारियों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। गल्ला व्यापारी एसोसिएशन के आह्वान पर मंगलवार को सीहोर सहित पूरे मध्य प्रदेश में एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल रखी गई। इस राष्ट्रव्यापी/प्रदेशव्यापी बंद का सीहोर में व्यापक असर दिखा, जिसके चलते स्थानीय कृषि उपज मंडी में आज व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह से ठप रहीं और करोड़ों का कारोबार प्रभावित हुआ।
हड़ताल के दौरान सीहोर के गल्ला व्यापारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें बढ़े हुए टैक्स को तत्काल वापस लेने की मांग की गई है।
### सीधे 50% की बढ़ोतरी; व्यापारियों और आम जनता पर पड़ेगा बोझ
व्यापारियों ने सरकार के इस फैसले को पूरी तरह से एकतरफा बताया है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अनुसार:
- कितना बढ़ा टैक्स: राज्य सरकार ने मंडी शुल्क को बढ़ाकर सीधे 1.50 प्रतिशत कर दिया है।
- भारी बोझ: यह पूर्व के मुकाबले सीधे तौर पर 50 प्रतिशत की भारी वृद्धि है। इसका सीधा नुकसान न केवल व्यापारियों को होगा, बल्कि अंततः इसका बोझ आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ेगा।

### पड़ोसी राज्यों से मुकाबला करना हुआ मुश्किल
ज्ञापन सौंपने पहुंचे व्यापारियों ने बताया कि इस टैक्स बढ़ोतरी के बाद मध्य प्रदेश के व्यापारियों के सामने एक नया संकट खड़ा हो गया है।
“हमारे पड़ोसी राज्यों में कई कृषि उपजों पर मंडी शुल्क या तो बिल्कुल शून्य (0%) है या फिर अधिकतम 0.50 प्रतिशत तक ही सीमित है। ऐसे में मध्य प्रदेश में इसे 1.50 प्रतिशत करना अव्यावहारिक है। इससे दूसरे राज्यों के मुकाबले बाजार में हमारी प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता पूरी तरह खत्म हो जाएगी, हमारी लागत बढ़ेगी और व्यापार चौपट हो जाएगा।”

### मांगें नहीं मानीं तो उग्र आंदोलन की चेतावनी
सीहोर गल्ला व्यापारी एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि आज की यह एक दिवसीय हड़ताल तो सिर्फ सरकार को जगाने के लिए एक सांकेतिक विरोध (Token Strike) थी। यदि सरकार ने जल्द ही इस बढ़े हुए मंडी शुल्क के फैसले को वापस नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में पूरे प्रदेश का व्यापारी वर्ग अपने हक के लिए अनिश्चितकालीन और उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होगा।
इस अवसर पर वरिष्ठ व्यापारी जयंत शाह सहित बड़ी संख्या में स्थानीय गल्ला व्यापारी, आढ़ती और एसोसिएशन के प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे।




