NEET पुनर्परीक्षा 2026 में फर्जी अभ्यर्थियों को बैठाने का मामला, बायोमीट्रिक सत्यापन टेंडर से जुड़े प्रमोद कुमार गिरफ्तार

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पटना। बिहार में नीट पुनर्परीक्षा 2026 के दौरान मूल परीक्षार्थियों की जगह कथित तौर पर फर्जी अभ्यर्थियों को बैठाने के मामले में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने एक और आरोपित को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान प्रमोद कुमार के रूप में हुई है। जांच एजेंसी के अनुसार, उसे 9 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया और इसके बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इस मामले में प्रमोद कुमार की गिरफ्तारी को परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थियों की पहचान सत्यापित करने की प्रक्रिया और बायोमीट्रिक व्यवस्था की भूमिका की जांच से जोड़कर देखा जा रहा है।

9 अक्टूबर को हुई गिरफ्तारी, न्यायिक हिरासत में भेजा गया आरोपित

नीट पुनर्परीक्षा 2026 में कथित फर्जी अभ्यर्थियों से जुड़े मामले की जांच के दौरान आर्थिक अपराध इकाई ने प्रमोद कुमार को गिरफ्तार किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गिरफ्तारी 9 अक्टूबर को हुई थी। इसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

जांच एजेंसी की कार्रवाई का प्रमुख पहलू परीक्षा केंद्र पर पहचान सत्यापन से जुड़ी संभावित अनियमितताएं हैं। किसी भी राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा में यह सुनिश्चित करना जरूरी होता है कि परीक्षा में शामिल होने वाला व्यक्ति वही अभ्यर्थी हो, जिसके नाम पर आवेदन और प्रवेश प्रक्रिया पूरी की गई है। यदि किसी दूसरे व्यक्ति को मूल परीक्षार्थी की जगह बैठाने का प्रयास किया जाता है, तो इससे परीक्षा की निष्पक्षता और चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।

इस मामले में ईओयू यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित तौर पर फर्जी अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश कैसे मिला और पहचान सत्यापन की प्रक्रिया में संभावित गड़बड़ी किस तरह हुई।

लखीसराय में बायोमीट्रिक सत्यापन के टेंडर से जुड़ा मामला

प्रमोद कुमार पर आरोप है कि उसने लखीसराय में नीट परीक्षा के बायोमीट्रिक सत्यापन से संबंधित टेंडर लिया था। जांच के दायरे में यह पहलू भी शामिल है कि बायोमीट्रिक सत्यापन की जिम्मेदारी निभाने वाली व्यवस्था का संचालन किस प्रकार किया गया और परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन हुआ या नहीं।

बायोमीट्रिक सत्यापन में आम तौर पर अभ्यर्थी की पहचान की पुष्टि के लिए उसके फिंगरप्रिंट या अन्य निर्धारित जैविक पहचान संबंधी जानकारी का इस्तेमाल किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि परीक्षा में शामिल होने वाला व्यक्ति पंजीकृत अभ्यर्थी ही है। प्रवेश परीक्षा जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में यह व्यवस्था पहचान संबंधी धोखाधड़ी को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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