नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच केंद्र सरकार इस महीने के आखिर में संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस संभावित सत्र का प्रमुख उद्देश्य महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को दोबारा संसद के सामने लाना और उन्हें पारित कराने का प्रयास करना है। हालांकि, विशेष सत्र की तारीख और विधायी एजेंडे को लेकर अंतिम सरकारी घोषणा की पुष्टि आवश्यक है।

महिला आरक्षण विधेयक अप्रैल में क्यों नहीं हो पाया था पारित?
17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 पर मतदान हुआ था। इस विधेयक का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना था। प्रस्ताव को परिसीमन और सदनों की सदस्य संख्या में संभावित बदलाव से भी जोड़ा गया था।
मतदान के दौरान विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता थी। इस मानक के अनुसार, विधेयक को आवश्यक बहुमत नहीं मिल सका और वह लोकसभा में पारित नहीं हुआ।
सरकार को विधेयकों के समर्थन का भरोसा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार को उम्मीद है कि इस बार महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों को पारित कराने के लिए पर्याप्त संसदीय समर्थन जुटाया जा सकता है। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि सरकार समर्थन हासिल करने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों से बातचीत कर सकती है।
हालांकि, सरकार को केवल साधारण बहुमत जुटाना पर्याप्त नहीं होगा, यदि विधेयक को संविधान संशोधन के रूप में पारित कराया जाता है। संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत ऐसे संशोधन के लिए दोनों सदनों में अलग-अलग विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। कुछ संवैधानिक संशोधनों के लिए कम से कम आधे राज्यों की विधानसभाओं की मंजूरी भी जरूरी होती है। किसी विधेयक के अंतिम स्वरूप और उसके प्रावधानों के आधार पर संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया लागू होगी।
चलते चलते बताते चले कि, सरकार के सामने आवश्यक संसदीय समर्थन जुटाने की चुनौती होगी। वहीं, विपक्ष की आपत्तियां, राज्यों के प्रतिनिधित्व से संबंधित चिंताएं और संवैधानिक प्रक्रियाएं भी इस विषय की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
कुल मिलाकर, अक्टूबर के अंत में संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की संभावना से महिला आरक्षण और परिसीमन का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। लेकिन सत्र की आधिकारिक घोषणा, विधेयकों का अंतिम प्रारूप और उनके पारित होने की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही इस संभावित पहल के वास्तविक परिणामों का आकलन किया जा सकेगा।




