PM मोदी का प्रेरक संदेश: ‘बल और पराक्रम से बड़ी है सत्य की शक्ति’, साझा किया संस्कृत सुभाषितम्

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नई दिल्ली |drnewsindia.com

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सफलता के मूल मंत्र को साझा करते हुए ‘सत्य’ और ‘दृढ़ता’ के महत्व पर जोर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल बाहुबल या पराक्रम ही जीत का आधार नहीं होते, बल्कि सही मार्ग पर चलकर हासिल की गई सफलता ही स्थायी होती है।

सफलता का दिव्य मंत्र: संस्कृत सुभाषितम्

प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ (Twitter) पर एक प्राचीन श्लोक साझा किया, जो जीवन के संघर्षों में सही दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा देता है:

“न तथा बलवीर्याभ्यां जयन्ति विजिगीषवः।

यथा सत्यानृशंस्याभ्यां धर्मेणैवोद्यमेन च॥”

सरल अर्थ:

जो लोग विजय की आकांक्षा रखते हैं, वे केवल बल और पराक्रम से सफल नहीं होते। सच्ची और स्थायी विजय सत्य, दया, कर्तव्य (धर्म) और निरंतर कठिन परिश्रम से ही प्राप्त होती है।


सफलता से मिलता है ‘अद्भुत संतोष’

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में सफलता के दो मुख्य पहलुओं पर प्रकाश डाला:

  1. स्थायित्व: अथक परिश्रम और सत्य के मार्ग पर चलकर प्राप्त की गई सफलता कभी धूमिल नहीं होती।
  2. मानसिक शांति: ऐसी जीत न केवल आत्मविश्वास को शिखर पर ले जाती है, बल्कि मन में एक गहरी संतुष्टि और संतोष का भाव भी पैदा करती है।

सोशल मीडिया पर चर्चा

प्रधानमंत्री की इस पोस्ट ने युवाओं और छात्रों के बीच काफी हलचल पैदा की है। शिक्षाविदों का मानना है कि ऐसे सुभाषितम् आज की प्रतिस्पर्धी दुनिया में नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ने की शक्ति देते हैं।

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