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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महीने की 27 से 29 तारीख तक सेशेल्स की आधिकारिक राजकीय यात्रा (State Visit) पर रहेंगे। पीएम मोदी सेशेल्स के ‘राष्ट्रीय दिवस’ (National Day) की स्वर्ण जयंती (Golden Jubilee) समारोह में ‘गेस्ट ऑफ ऑनर’ (मुख्य अतिथि) के रूप में शामिल होंगे। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने इससे पहले साल 2015 में सेशेल्स का दौरा किया था।
विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, सेशेल्स के इस ऐतिहासिक राष्ट्रीय उत्सव और परेड में भारतीय सशस्त्र बलों (Indian Armed Forces) की एक सैन्य टुकड़ी के साथ भारतीय नौसेना (Indian Navy) के दो युद्धपोत भी हिस्सा लेंगे।
🤝 राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के साथ द्विपक्षीय वार्ता और कूटनीतिक एजेंडा
इस तीन दिवसीय रणनीतिक यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यक्रम बेहद व्यस्त और कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहने वाला है:
- द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा: पीएम मोदी सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के साथ उच्च स्तरीय वार्ता करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग के पूरे स्पेक्ट्रम (सभी क्षेत्रों) की समीक्षा की जाएगी।
- वैश्विक मुद्दों पर चर्चा: दोनों नेता आपसी हित के क्षेत्रीय (Regional) और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर अपने विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।
- नेशनल असेंबली को संबोधन: प्रधानमंत्री सेशेल्स की नेशनल असेंबली (संसद) को भी संबोधित करेंगे।
- प्रवासी भारतीयों से संवाद: इसके अलावा, पीएम वहां रह रहे भारतीय समुदाय (Indian Diaspora) के लोगों के साथ एक विशेष संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे।

🌊 विजन ‘महासागर’ (MAHASAGAR) और सेशेल्स का महत्व
भारत और सेशेल्स के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और मजबूत लोगों से लोगों के बीच (People-to-People) संबंध रहे हैं। रणनीतिक रूप से सेशेल्स भारत के लिए बेहद खास है:
- प्रमुख समुद्री पड़ोसी: हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में एक प्रमुख समुद्री पड़ोसी होने के नाते, सेशेल्स भारत के विजन ‘महासागर’ (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) में एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
- ग्लोबल साउथ के प्रति प्रतिबद्धता: यह दौरा ग्लोबल साउथ (Global South) के प्रति भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस यात्रा से दोनों देशों के बीच मजबूत और स्थायी दोस्ती को और नई ऊर्जा मिलेगी और सभी क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने की प्रतिबद्धता को बल मिलेगा।





