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नई दिल्ली / नीस (फ्रांस): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने 6 दिनों के फ्रांस और स्लोवाकिया के दौरे के तहत फ्रांस के नीस (Nice) शहर पहुंच गए हैं। पीएम बनने के बाद यह उनकी 7वीं फ्रांस यात्रा है। आज दोपहर में पीएम मोदी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ एक हाई-लेवल द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इसके साथ ही दोनों नेता ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम का भव्य उद्घाटन भी करेंगे।
इस यात्रा के दौरान भारत और फ्रांस के बीच रक्षा, तकनीक और कूटनीति के मोर्चे पर कई बड़े फैसले होने की उम्मीद है।
🤝 12 समझौतों पर लग सकती है मुहर, राफेल डील पर टिकी नजरें
इस द्विपक्षीय बैठक में दोनों देशों के बीच टेक्नोलॉजी और डिफेंस से जुड़े कई समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं:
- इन सेक्टर्स में होंगे करार: टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, हेल्थ टेक, मेडिकल टेक्नोलॉजी, AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), सेमीकंडक्टर और स्पेस टेक्नोलॉजी से जुड़े 12 समझौतों पर सहमति बन सकती है।
- 114 राफेल लड़ाकू विमानों की डील: भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल विमानों को लेकर अहम बातचीत होगी। भारत की शर्त है कि इन विमानों में भारतीय हथियार जोड़ने की सुविधा मिले, जिसके लिए ‘सोर्स कोड’ का मुद्दा उठाया जाएगा।
- CCS की मंजूरी का इंतजार: इस मेगा डिफेंस डील को अभी कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की समिति (CCS) से हरी झंडी नहीं मिली है। पीएम मोदी की इस यात्रा के बाद इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

🗺️ पीएम मोदी का 6 दिनों का पूरा शेड्यूल (13 से 18 जून)
प्रधानमंत्री का यह दौरा दो फेज में बंटा हुआ है, जिसमें वे फ्रांस के 3 शहरों (नीस, एवियान और पेरिस) और स्लोवाकिया जाएंगे:
- 13-14 जून (नीस, फ्रांस): मैक्रों के साथ द्विपक्षीय बैठक और ‘भारत इनोवेट्स’ समिट का उद्घाटन।
- 14-15 जून (स्लोवाकिया): पीएम मोदी फ्रांस से स्लोवाकिया जाएंगे। 1993 में स्लोवाकिया के आजाद देश बनने के बाद किसी भारतीय पीएम का यह पहला ऐतिहासिक दौरा है। यहाँ वे स्लोवाकिया के पीएम रोबर्ट फिको और राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रीनी से मिलेंगे।
- 16-17 जून (एवियान, फ्रांस): G7 समिट में हिस्सा लेंगे। 17 जून को समिट के इतर पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच द्विपक्षीय मुलाकात होगी। दोनों नेता 16 महीने बाद (आखिरी बार फरवरी 2025 में वॉशिंगटन में मिले थे) आमने-सामने बैठेंगे।
- 18 जून (पेरिस, फ्रांस): राष्ट्रपति मैक्रों के साथ प्रसिद्ध ‘विवाटेक सम्मेलन’ में शिरकत करेंगे।
⚓ होर्मुज रक्षा गठबंधन में शामिल हो सकता है भारत
ईरान युद्ध के चलते होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में जहाजों की सुरक्षा को लेकर इस दौरे पर बड़ा फैसला हो सकता है।
भारत किसी एक देश की सुरक्षा व्यवस्था के बजाय संयुक्त राष्ट्र (UN) के नियमों के तहत बहुपक्षीय व्यवस्था का समर्थक है। ऐसे में भारत, फ्रांस और ब्रिटेन की पहल के साथ कदम मिलाते हुए ‘होर्मुज रक्षा गठबंधन’ में शामिल होने की सहमति दे सकता है।

💡 क्या है ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम?
यह शिक्षा मंत्रालय का एक नया ग्लोबल इनिशिएटिव है, जिसकी घोषणा पीएम मोदी ने फरवरी 2026 में ‘भारत-फ्रांस इनोवेशन साल’ के दौरान की थी।
- मकसद: भारतीय स्टार्टअप्स, IITs, IISc और विश्वविद्यालयों को दुनिया के बड़े निवेशकों, कंपनियों और रिसर्च संगठनों से जोड़ना।
- वेन्यू: यह मेगा समिट 14 से 16 जून तक नीस के पैलेस डेस एक्सपोजिशन्स में आयोजित हो रहा है।

🛡️ हर मुश्किल वक्त में भारत का सच्चा साथी रहा है फ्रांस
वैश्विक मंचों और रक्षा क्षेत्र में फ्रांस हमेशा से भारत का एक मजबूत और भरोसेमंद साझेदार रहा है:
- प्रतिबंधों की नहीं की परवाह: 1998 पोखरण परमाणु टेस्ट के बाद जब अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी ने भारत पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे, तब फ्रांस ने भारत का साथ दिया और हथियार बेचे। आज फ्रांस, रूस के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा हथियार सप्लायर है। (मिराज 2000, राफेल और स्कॉर्पीन पनडुब्बी इसके उदाहरण हैं)।
- संकट में दिया साथ: सितंबर 2023 में जब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 2024 के गणतंत्र दिवस पर भारत आने से असमर्थता जताई, तब राष्ट्रपति मैक्रों ने भारत का न्योता तुरंत स्वीकार किया।
- वैश्विक मंच पर समर्थन: फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता और न्यूक्लियर सप्लाई ग्रुप (NSG) में भारत की एंट्री का हमेशा खुलकर समर्थन किया है।

🌐 G7 समिट और इस बार का एजेंडा
G7 (ग्रुप ऑफ सेवन) दुनिया की 7 सबसे विकसित और आधुनिक अर्थव्यवस्थाओं (अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जापान, इटली, कनाडा और जर्मनी) का समूह है। इस साल फ्रांस इसकी अध्यक्षता कर रहा है और यह समिट एवियां (Evian) शहर में हो रही है।
इस बार का मुख्य एजेंडा:
- जियोपॉलिटिकल क्राइसिस: यूक्रेन युद्ध, ईरान-इजराइल तनाव, गाजा-लेबनान और होर्मुज रूट की सुरक्षा चुनौतियां।
- वैश्विक आर्थिक सहयोग और फाइनेंशियल इम्बैलेंस को ठीक करना।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के नियम और भविष्य।
G7 में भारत की भूमिका:
भारत G7 का स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन अपनी मजबूत वैश्विक साख के कारण इसे हर साल ‘गेस्ट कंट्री’ के रूप में आमंत्रित किया जाता है। पीएम मोदी लगातार सातवीं बार (2019 से 2025 और अब 2026) इस समिट में शामिल हो रहे हैं।

📊 G7 और G20 में क्या अंतर है?
| विशेषता | G7 समूह | G20 समूह |
| सदस्य देश | केवल 7 विकसित देश (अमेरिका, फ्रांस आदि)। | G7 के साथ भारत, चीन, ब्राजील जैसे 19 देश + यूरोपीय संघ। |
| मुख्य फोकस | आर्थिक मुद्दों के साथ-साथ बड़े राजनीतिक और सुरक्षा मुद्दे। | मुख्य रूप से वर्ल्ड इकोनॉमी और ग्लोबल फाइनेंशियल स्टेबिलिटी। |
| प्रभाव | इसे कुछ हद तक पुराना (Outdated) माना जाता है। | वर्तमान समय में यह ज्यादा प्रभावी और समावेशी गुट है। |
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