किसानों के लिए सोलर पंप पर बड़ी राहत, PM-KUSUM योजना में केंद्र से 30% तक सहायता; जानिए सब्सिडी और किसान के हिस्से का पूरा गणित

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नई दिल्ली। खेती में सिंचाई की व्यवस्था किसानों के लिए सबसे जरूरी जरूरतों में शामिल है। फसल के समय खेतों तक पर्याप्त पानी पहुंचाना उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण होता है, लेकिन सिंचाई के लिए डीजल पंप चलाने या बिजली आधारित मोटर का इस्तेमाल करने पर किसानों को लगातार खर्च उठाना पड़ता है। खासकर ऐसे इलाकों में जहां बिजली की उपलब्धता सीमित है या ग्रिड कनेक्शन नहीं है, वहां डीजल पंप पर निर्भरता खेती की लागत को बढ़ा सकती है। ऐसे में सौर ऊर्जा से चलने वाले कृषि पंप किसानों के लिए सिंचाई की व्यवस्था को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत से जोड़ने का विकल्प देते हैं।

PM-KUSUM Component-B में सोलर पंप लगाने का प्रावधान

पीएम-कुसुम योजना को किसानों के लिए सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और कृषि क्षेत्र में पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से लागू किया गया है। योजना में अलग-अलग घटक रखे गए हैं। इनमें कंपोनेंट-बी विशेष रूप से उन किसानों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनके खेतों में ग्रिड बिजली उपलब्ध नहीं है और जिन्हें सिंचाई के लिए स्टैंड-अलोन सोलर पंप की जरूरत है।

केंद्रीय योजना के मौजूदा विवरण के अनुसार, व्यक्तिगत किसानों को ऑफ-ग्रिड क्षेत्रों में 7.5 हॉर्सपावर तक के स्टैंड-अलोन सोलर कृषि पंप लगाने के लिए सहायता दी जा सकती है। सोलर पंप में सौर पैनलों से प्राप्त ऊर्जा का इस्तेमाल पानी खींचने और खेतों की सिंचाई के लिए किया जाता है। इस तरह पंप को चलाने के लिए डीजल या पारंपरिक ग्रिड बिजली पर निर्भरता कम करने का विकल्प मिलता है।

PM-KUSUM योजना में किसानों के लिए आवेदन की प्रक्रिया

पीएम-कुसुम योजना का क्रियान्वयन संबंधित राज्य सरकारों और उनकी नामित एजेंसियों के माध्यम से किया जाता है। MNRE के अनुसार, कंपोनेंट-बी और कंपोनेंट-सी के लिए राज्यवार आवंटन जारी किया जाता है और किसानों को संबंधित राज्य की कार्यान्वयन एजेंसी के माध्यम से योजना का लाभ लेने की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। योजना के राष्ट्रीय पोर्टल पर राज्यवार वेंडर सूची और दरों जैसी जानकारियां भी उपलब्ध कराई जाती हैं।

किसानों को आवेदन करते समय यह भी ध्यान रखना चाहिए कि पीएम-कुसुम के नाम पर फर्जी वेबसाइट या अनधिकृत एजेंटों से सावधान रहें। आधिकारिक जानकारी के लिए केंद्र सरकार के PM-KUSUM पोर्टल और संबंधित राज्य की अधिकृत एजेंसी की जानकारी का इस्तेमाल करना अधिक सुरक्षित है।

कुल मिलाकर, पीएम-कुसुम का कंपोनेंट-बी उन किसानों के लिए उपयोगी विकल्प हो सकता है जो ऑफ-ग्रिड क्षेत्र में सिंचाई के लिए डीजल या अन्य पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भर हैं। सामान्य राज्यों में केंद्र की 30 प्रतिशत तक सहायता, राज्य की कम से कम 30 प्रतिशत सब्सिडी और शेष अधिकतम 40 प्रतिशत किसान योगदान का प्रावधान है। हालांकि वास्तविक लाभ राज्य की नीति, पात्रता, पंप की मान्य लागत और उपलब्ध आवंटन पर निर्भर करेगा। इसलिए आवेदन से पहले किसान को अपने राज्य की अधिकृत एजेंसी से योजना की वर्तमान शर्तों और लागत की पुष्टि करनी चाहिए।

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