छत्तीसगढ़: ‘नक्सलवाद के खात्मे के बाद पहली बार…’ बस्तर में सुरक्षाबलों के साथ पीएम मोदी ने मनाई दीवाली

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बस्तर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर में तैनात सुरक्षा बलों के जवानों के साथ दीवाली का पावन पर्व मनाया।कभी नक्सलवाद का सबसे बड़ा गढ़ माने जाने वाले इस क्षेत्र में सुरक्षा बलों के पराक्रम और योगदान को सराहते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आपके बलिदानों और अटूट निष्ठा की वजह से ही हमने यहां से नक्सलवाद के आतंक को पूरी तरह खत्म किया है। उन्होंने कहा कि इस इलाके से नक्सलवाद के खात्मे के बाद यह पहली दिवाली है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जवानों के साथ त्योहार मनाने की परंपरा रही है। वह विभिन्न अवसरों पर देश की सुरक्षा में तैनात सैनिकों और सुरक्षा कर्मियों के बीच पहुंचकर उनके साथ समय बिताते रहे हैं। इस बार छत्तीसगढ़ के बस्तर को दीपावली के लिए चुनना क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति, विकास और शांति के प्रयासों के लिहाज से महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

एक्स पर पोस्ट कर प्रधानमंत्री ने दी दौरे की जानकारी

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी दीपावली यात्रा के बारे में जानकारी देते हुए बस्तर में आए बदलाव का जिक्र किया। उन्होंने सुरक्षा बलों के जवानों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि दीपावली के पावन अवसर पर वह उन वीर जवानों के बीच जाएंगे, जिन्होंने देश की सुरक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया है।

प्रधानमंत्री ने जवानों के बलिदान, त्याग और तपस्या को नमन करने की बात कही। उनका यह संदेश उन सुरक्षा कर्मियों के प्रति देश की कृतज्ञता को दर्शाता है, जो चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं।

दीपावली जैसे बड़े त्योहार पर जवानों के साथ समय बिताने का उद्देश्य उनके मनोबल और उत्साह को बढ़ाने के साथ-साथ यह संदेश देना भी है कि देश उनके योगदान को हमेशा याद रखता है। सुरक्षा बलों के कई जवान त्योहारों के दौरान भी अपने परिवारों से दूर रहकर ड्यूटी करते हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री का उनके बीच पहुंचना विशेष महत्व रखता है।

बस्तर में नक्सली प्रभाव कम होने और विकास पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में बस्तर क्षेत्र में हो रहे बदलाव का भी उल्लेख किया। बस्तर लंबे समय तक नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों में शामिल रहा है। इस वजह से यहां के कई इलाकों में सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, परिवहन और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार में चुनौतियां सामने आती रही हैं।

नक्सली गतिविधियों के कारण स्थानीय नागरिकों के सामान्य जीवन और विकास कार्यों पर भी असर पड़ा। कई क्षेत्रों में आवागमन, सरकारी सेवाओं की पहुंच और आर्थिक गतिविधियों को सुचारु बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रहा है।

हालांकि पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा अभियानों और विकास योजनाओं के माध्यम से प्रभावित इलाकों में परिस्थितियों को बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार की प्राथमिकताओं में नक्सली गतिविधियों पर नियंत्रण के साथ-साथ स्थानीय लोगों को मुख्यधारा के विकास से जोड़ना भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा बस्तर में बदलाव का उल्लेख करना इस बात की ओर संकेत करता है कि क्षेत्र में शांति और विकास को एक-दूसरे से जोड़कर देखा जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के साथ स्थानीय नागरिकों तक शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और अन्य सुविधाएं पहुंचाने के प्रयासों को भी गति देने की आवश्यकता है।

जवानों के साहस और बलिदान को करेंगे नमन

बस्तर में तैनात सुरक्षा बलों के जवान कठिन भौगोलिक और सुरक्षा परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं। जंगलों, दुर्गम रास्तों और दूरस्थ इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना आसान काम नहीं है। कई बार जवानों को अपने परिवारों से लंबे समय तक दूर रहना पड़ता है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनाती के दौरान सुरक्षा कर्मियों को विशेष सतर्कता बरतनी पड़ती है। उनका काम केवल सुरक्षा अभियानों तक सीमित नहीं होता, बल्कि स्थानीय परिस्थितियों में शांति और सामान्य जनजीवन बनाए रखने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

प्रधानमंत्री मोदी का जवानों के बीच दीपावली मनाने का निर्णय उनके इसी योगदान के प्रति सम्मान के रूप में देखा जा रहा है। त्योहार के दिन प्रधानमंत्री की मौजूदगी जवानों को यह अनुभव कराने का अवसर होगी कि उनके त्याग और सेवा को देश के सर्वोच्च राजनीतिक नेतृत्व से भी सम्मान मिलता है।

इसके साथ ही यह दौरा देशवासियों के लिए भी एक संदेश है कि त्योहारों की खुशियों के बीच उन लोगों को नहीं भूलना चाहिए, जो देश की सुरक्षा के लिए लगातार अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं।

दीपावली पर जवानों के साथ समय बिताने की परंपरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई वर्षों से दीपावली का त्योहार सुरक्षा बलों के जवानों के बीच मनाते रहे हैं। अलग-अलग अवसरों पर उन्होंने देश के विभिन्न सीमावर्ती और सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पहुंचकर सैनिकों के साथ दीपावली मनाई है।

इस परंपरा के माध्यम से प्रधानमंत्री जवानों के साथ सीधे संवाद करते हैं और उनके कामकाज तथा चुनौतियों को समझने का अवसर प्राप्त करते हैं। दीपावली जैसे पारिवारिक त्योहार पर जवानों के साथ समय बिताना उनके प्रति सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक भी माना जाता है।

इस बार बस्तर का चयन इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि यह क्षेत्र लंबे समय तक नक्सली गतिविधियों से प्रभावित रहा है। यहां जवानों के साथ त्योहार मनाना सुरक्षा व्यवस्था में लगे कर्मियों के योगदान के साथ-साथ क्षेत्र में शांति स्थापित करने के प्रयासों को भी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में लाता है।

बस्तर के विकास के लिए शांति और सुरक्षा जरूरी

बस्तर छत्तीसगढ़ का एक महत्वपूर्ण आदिवासी बहुल क्षेत्र है। यहां प्राकृतिक संसाधनों, वन संपदा, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन की काफी संभावनाएं हैं। क्षेत्र की पहचान उसकी विशिष्ट जनजातीय परंपराओं, लोककला, प्राकृतिक सुंदरता और पारंपरिक जीवनशैली से भी जुड़ी हुई है।

हालांकि लंबे समय तक नक्सली गतिविधियों के कारण क्षेत्र की विकास संभावनाओं का पूरी तरह उपयोग करना चुनौतीपूर्ण रहा है। किसी भी क्षेत्र में स्थायी विकास के लिए सुरक्षित वातावरण, बेहतर संपर्क व्यवस्था और सरकारी सुविधाओं की प्रभावी पहुंच जरूरी होती है।

सड़क निर्माण, शिक्षा संस्थानों का विस्तार, स्वास्थ्य सुविधाएं, पेयजल, बिजली, संचार और रोजगार के अवसर बस्तर के विकास के महत्वपूर्ण आधार हैं। स्थानीय युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने के प्रयास भी क्षेत्र की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में सहायक हो सकते हैं।

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