बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में आदिवासी इलाकों की स्वास्थ्य व्यवस्था और विकास कार्यों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राहुल गांधी के बालाघाट दौरे से पहले राज्य सरकार पर आदिवासी क्षेत्रों के विकास और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठाए हैं। पटवारी ने सरकार से आदिवासी जिलों के बजट और विकास कार्यों पर श्वेत-पत्र जारी करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी बहुल इलाकों में विकास के लिए जारी धनराशि का अपेक्षित लाभ लोगों तक नहीं पहुंच रहा है और विकास कार्यों में बड़े स्तर पर अनियमितताएं हो रही हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं पर भी कांग्रेस ने उठाए सवाल
जीतू पटवारी ने आदिवासी अंचलों की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उनका कहना है कि दूरस्थ गांवों में डॉक्टरों की कमी और स्वास्थ्य सुविधाओं की सीमित उपलब्धता के कारण लोगों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने पिछले कई वर्षों की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे प्रभावी नहीं होने का आरोप लगाया।
बालाघाट के बैहर और बिरसा क्षेत्र में आदिवासी बच्चों की मौतों के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पहले से ही राजनीतिक और प्रशासनिक जांच के केंद्र में है। अलग-अलग रिपोर्टों में मृत बच्चों की संख्या अलग-अलग बताई गई है। कुछ रिपोर्टों में 30 से अधिक बच्चों की मौत का उल्लेख है, जबकि सरकारी और अन्य आधिकारिक आंकड़ों में संख्या अलग रही है। इसलिए इस मामले में अंतिम संख्या को लेकर अभी सावधानी बरतना जरूरी है।
राहुल गांधी आज बालाघाट में प्रभावित परिवारों से मिलेंगे
इसी पृष्ठभूमि में कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 1 अक्टूबर को बालाघाट के प्रभावित इलाकों का दौरा कर रहे हैं। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार वह महाराष्ट्र के गोंदिया से सड़क मार्ग से बालाघाट के बैहर क्षेत्र के जागला गांव पहुंचेंगे। वहां वे उन परिवारों से मुलाकात करेंगे जिन्होंने बीमारी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बीच अपने बच्चों को खोया है। इसके बाद उनके मीडिया से बातचीत करने का कार्यक्रम बताया गया है।
राहुल गांधी के दौरे को कांग्रेस बालाघाट के आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं और सरकारी सेवाओं की स्थिति को सामने रखने के अवसर के तौर पर देख रही है। पार्टी पहले भी बच्चों की मौत के मामले में राज्य सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग कर चुकी है। दूसरी ओर, राज्य सरकार की ओर से यह कहा गया है कि प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।
इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा प्रभावित आदिवासी परिवारों तक समय पर स्वास्थ्य, पोषण और दूसरी बुनियादी सरकारी सेवाओं की पहुंच का है। एक तरफ विपक्ष सरकार से जवाबदेही और बजट के उपयोग पर श्वेत-पत्र की मांग कर रहा है, वहीं प्रशासन का दावा है कि प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य जांच, उपचार, टीकाकरण और चिकित्सा सुविधाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है।
बालाघाट में राहुल गांधी का दौरा इस मुद्दे को एक बार फिर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में ला सकता है। हालांकि, बच्चों की मौतों के वास्तविक कारण, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर अंतिम निष्कर्ष के लिए प्रशासनिक जांच, चिकित्सा रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया से सामने आने वाले तथ्यों को देखना महत्वपूर्ण होगा।




