सीहोर /drnewsindia.com / आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा यानी शरद पूर्णिमा का पावन पर्व इस बार तिथि की घट-बढ़ के कारण दो दिन (25 और 26 अक्टूबर) मनाया जा रहा है। पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह 11:55 बजे से शुरू होकर 26 अक्टूबर को सुबह 9:41 बजे तक रहेगी।
ऐसे में चंद्रमा की शीतल रोशनी में खीर रखने की परंपरा 25 अक्टूबर की रात निभाई जाएगी, जबकि स्नान, पूजा-पाठ और दान-पुण्य जैसे धार्मिक कार्य 26 अक्टूबर की सुबह किए जाएंगे।
🌕 शरद पूर्णिमा की तिथियां एवं शुभ समय
- पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 25 अक्टूबर, सुबह 11:55 बजे से
- पूर्णिमा तिथि समाप्त: 26 अक्टूबर, सुबह 09:41 बजे तक
- चंद्र रोशनी में खीर रखने का समय: 25 अक्टूबर की रात
- स्नान, दान व पूजन: 26 अक्टूबर की सुबह

🥛 चांदनी में क्यों रखी जाती है खीर?
शरद पूर्णिमा की सबसे प्रमुख परंपराओं में से एक है रात के समय गाय के दूध, चावल, चीनी और सूखे मेवों से बनी खीर को खुले आसमान के नीचे चंद्रमा की रोशनी में रखना।
- अमृतमयी किरणें: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी किरणों से अमृत की वर्षा होती है।
- लक्ष्मी जी का भोग: चांदनी में रखी गई खीर का सबसे पहले माता लक्ष्मी को भोग लगाया जाता है और फिर पूरे परिवार में प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।
- स्वास्थ्य लाभ: आयुर्वेद और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, शरद ऋतु में शरीर में बढ़ने वाले पित्त को शांत करने के लिए ठंडी खीर का सेवन बेहद लाभकारी माना जाता है। (ध्यान दें: खीर को खुले में रखते समय बारीक सूती कपड़े या जाली से ढककर धूल व कीड़ों से बचाएं।)
🪔 द्वापर युग में श्रीकृष्ण ने रचाया था ‘महारास’
शरद पूर्णिमा का संबंध भगवान श्री कृष्ण की अलौकिक लीलाओं से भी है।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार, द्वापर युग में इसी पावन तिथि पर भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ महारास रचाया था। अपनी योगमाया से श्रीकृष्ण ने अनेक रूप धारण किए, जिससे हर गोपी को यही प्रतीत हुआ कि प्रभु उसी के साथ रास कर रहे हैं। इसी कारण इस पर्व को ‘रास पूर्णिमा’ भी कहा जाता है।
मथुरा-वृंदावन स्थित प्रसिद्ध निधिवन को लेकर भी यही मान्यता है कि आज भी यहाँ रात में श्रीकृष्ण रासलीला रचाते हैं, जिसके चलते सूर्यास्त के बाद निधिवन में किसी का भी रुकना वर्जित रहता है।
📌 शरद पूर्णिमा पर क्या करें?
- रात्रि जागरण: इस रात मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जप, भजन-कीर्तन और रात्रि जागरण करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- चंद्र दर्शन: रात्रि में चंद्रमा का दर्शन करें और अर्घ्य देकर सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
- दान-पुण्य: 26 अक्टूबर की सुबह पवित्र नदियों में स्नान कर चावल, दूध, सफेद वस्त्र या अन्न का दान करें।




