नई दिल्ली। शारदीय नवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि का पर्व 11 अक्टूबर से शुरू होकर 19 अक्टूबर तक मनाए जाने की जानकारी दी गई है। नवरात्रि के पहले दिन घरों और मंदिरों में मां दुर्गा की चौकी सजाई जाती है, कलश स्थापना की जाती है और कई श्रद्धालु नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाने का संकल्प लेते हैं। इस पर्व को लेकर भक्त पहले से ही पूजा की तैयारियां शुरू कर देते हैं, ताकि पहले दिन आवश्यक सामग्री की कमी न रहे।

शारदीय नवरात्रि 2026 कब से कब तक?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होकर 19 अक्टूबर 2026 तक चलेगी। इस दौरान नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना की परंपरा है। भक्त कलश स्थापना के साथ पूजा का शुभारंभ करते हैं और अगले नौ दिनों तक श्रद्धा के साथ धार्मिक अनुष्ठान करते हैं।
नवरात्रि के पहले दिन का विशेष महत्व माना जाता है, क्योंकि इसी दिन पूजा की शुरुआत होती है। कई परिवारों में सुबह स्नान के बाद पूजा स्थल की सफाई की जाती है, चौकी पर लाल कपड़ा बिछाया जाता है और मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। इसके बाद गणेश जी का स्मरण करके कलश स्थापना और अन्य धार्मिक विधियां पूरी की जाती हैं।
पूजा के शुभ मुहूर्त और तिथि से संबंधित सटीक जानकारी के लिए स्थानीय पंचांग या विश्वसनीय धार्मिक स्रोत से पुष्टि करना उचित है।
नवरात्रि पूजा सामग्री की पूरी सूची
नवरात्रि की पूजा में उपयोग होने वाली सामग्री परिवार की परंपरा और पूजा की विधि के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। सामान्य रूप से मां दुर्गा की पूजा, कलश स्थापना, जौ बोने और अखंड ज्योति जलाने के लिए निम्नलिखित वस्तुओं की व्यवस्था की जा सकती है।
1. मां दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति
पूजा की शुरुआत मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करने से की जाती है। श्रद्धालु अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार पूजा स्थल पर माता रानी की प्रतिमा रखते हैं। प्रतिमा को साफ चौकी पर स्थापित करके उसके आसपास फूलों और अन्य पूजा सामग्री से सजावट की जा सकती है।
2. गणेश जी की मूर्ति
हिंदू धार्मिक परंपरा में शुभ कार्यों की शुरुआत गणेश जी के स्मरण और पूजन से की जाती है। इसलिए नवरात्रि पूजा के लिए गणेश जी की छोटी मूर्ति या तस्वीर भी रखी जा सकती है।
3. पूजा की चौकी और आसन
मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करने के लिए लकड़ी की चौकी का इस्तेमाल किया जाता है। चौकी पर लाल या अन्य स्वच्छ वस्त्र बिछाकर माता रानी की प्रतिमा स्थापित की जाती है। पूजा करने वाले व्यक्ति के बैठने के लिए साफ आसन भी रखा जाता है।
4. लाल वस्त्र
लाल रंग को मां दुर्गा की पूजा में विशेष महत्व दिया जाता है। पूजा की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाने के साथ श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार माता रानी को लाल चुनरी या वस्त्र भी अर्पित करते हैं।
5. कलावा या मौली
कलावा, जिसे मौली भी कहा जाता है, धार्मिक अनुष्ठानों में इस्तेमाल किया जाता है। इसे पूजा सामग्री में शामिल किया जा सकता है। इसका उपयोग पूजा की परंपरा और विधि के अनुसार किया जाता है।
6. कलश स्थापना की सामग्री
नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना को पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इसके लिए सामान्यतः कलश, जल, आम या उपलब्ध परंपरागत पत्ते, नारियल, मौली, अक्षत और अन्य आवश्यक वस्तुओं की व्यवस्था की जाती है। कुछ परंपराओं में कलश के नीचे मिट्टी और जौ भी रखे जाते हैं। सामग्री और विधि में क्षेत्रीय अंतर हो सकता है।
7. जौ बोने की सामग्री
नवरात्रि के पहले दिन कई घरों में जौ बोने की परंपरा है। इसके लिए स्वच्छ मिट्टी, पात्र और जौ के बीज रखे जाते हैं। पूजा स्थल पर जौ उगाने की परंपरा को श्रद्धा के साथ निभाया जाता है। नौ दिनों के दौरान इसकी देखभाल की जाती है।
8. दीपक और अखंड ज्योति की सामग्री
कई श्रद्धालु नवरात्रि के दौरान अखंड ज्योति जलाते हैं। इसके लिए दीपक, घी या परंपरा के अनुसार तेल, बाती और सुरक्षित स्थान की व्यवस्था की जाती है। अखंड ज्योति जलाने वाले लोगों को आग से सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। दीपक को पर्दों, कागज, कपड़ों और अन्य ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखना जरूरी है।
9. फूल, माला और अन्य पूजन सामग्री
मां दुर्गा की पूजा में फूल, माला, रोली, कुमकुम, हल्दी, अक्षत, धूप, अगरबत्ती और कपूर जैसी सामग्री भी उपयोग की जा सकती है। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार फल, मिठाई, नारियल और अन्य नैवेद्य भी अर्पित करते हैं।
शारदीय नवरात्रि के अवसर पर पूजा की तैयारी का सबसे आसान तरीका यह है कि सभी आवश्यक वस्तुओं की सूची पहले से बना ली जाए। मां दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति, गणेश जी की मूर्ति, चौकी, आसन, लाल वस्त्र, मौली, कलश, नारियल, जौ, मिट्टी, दीपक, बाती, धूप, फूल और नैवेद्य जैसी वस्तुओं को जरूरत के अनुसार एक जगह रख लें।
ध्यान रखें कि हर परिवार में पूजा की सामग्री और विधि एक जैसी नहीं होती। इसलिए अपने घर की परंपरा और पूजा की निर्धारित विधि के अनुसार सामग्री में बदलाव किया जा सकता है।
इस तरह पहले से तैयारी करने से नवरात्रि के पहले दिन पूजा व्यवस्थित ढंग से की जा सकती है। मां दुर्गा की आराधना के इस पर्व पर श्रद्धालु नौ दिनों तक भक्ति और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं




