नई दिल्ली। शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रि का पांचवां दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां स्कंदमाता की विधि-विधान से पूजा करने और उन्हें श्रद्धापूर्वक भोग अर्पित करने से भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मां स्कंदमाता को ममता, करुणा, वात्सल्य और मातृत्व का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि नवरात्रि के पांचवें दिन मंदिरों और घरों में श्रद्धालु विशेष रूप से उनकी पूजा करते हैं।

मां स्कंदमाता कौन हैं और क्यों पड़ा यह नाम?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय की माता हैं। भगवान कार्तिकेय को स्कंद के नाम से भी जाना जाता है। इसी कारण देवी दुर्गा के इस स्वरूप का नाम स्कंदमाता पड़ा। मां स्कंदमाता की गोद में भगवान कार्तिकेय विराजमान रहते हैं। उनकी यह छवि मातृत्व, स्नेह और संतान के प्रति मां के प्रेम को दर्शाती है।
मां स्कंदमाता का स्वरूप भक्तों के मन में श्रद्धा और विश्वास उत्पन्न करता है। उन्हें अपने भक्तों पर ममता बरसाने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक मान्यताओं में उनकी आराधना को परिवार में सुख-शांति और सकारात्मकता की कामना से जोड़ा जाता है। संतान सुख की इच्छा रखने वाले श्रद्धालु भी मां स्कंदमाता की पूजा विशेष आस्था के साथ करते हैं।
देवी के इस स्वरूप की उपासना का एक महत्वपूर्ण भाव यह भी है कि माता अपने बच्चों की रक्षा और कल्याण के लिए सदैव तत्पर रहती हैं। मां स्कंदमाता की गोद में विराजमान भगवान कार्तिकेय की छवि इसी वात्सल्य और संरक्षण के भाव को अभिव्यक्त करती है।
मां स्कंदमाता की पूजा कैसे करें?
नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा सरल तरीके से श्रद्धापूर्वक की जा सकती है। पूजा के दौरान निम्नलिखित सामान्य चरण अपनाए जाते हैं:
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल को साफ करें और मां स्कंदमाता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- देवी का ध्यान करके दीपक जलाएं और पूजा सामग्री तैयार रखें।
- मां को पुष्प, फल, केला, मिठाई और अपनी परंपरा के अनुसार अन्य सात्विक भोग अर्पित करें।
- मां स्कंदमाता की आराधना करें और दुर्गा चालीसा या देवी से संबंधित स्तुति का पाठ करें।
- श्रद्धापूर्वक मां की आरती करें और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।
मां स्कंदमाता की पूजा विशेष रूप से वात्सल्य और परिवार के कल्याण के भाव से जुड़ी हुई है। उनकी गोद में विराजमान भगवान कार्तिकेय का स्वरूप माता और संतान के संबंध की पवित्रता को दर्शाता है। इसी कारण भक्त इस दिन अपने बच्चों के सुखद भविष्य और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना करते हैं।
शारदीय नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता को केले सहित फल, मिठाई और सात्विक पकवानों का भोग लगाकर पूजा करने की परंपरा प्रचलित है। श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार पूजा-विधि अपनाते हैं और मां दुर्गा से सुख, शांति तथा समृद्धि की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता की आराधना भक्तों को ममता, करुणा और विश्वास का संदेश देती है।




