करवाचौथ पर चांदी की कीमत में बड़ी गिरावट, एक झटके में ₹2,600 सस्ती हुई सिल्वर, जानें सोने के भाव का हाल

0
3

नई दिल्ली। करवाचौथ के मौके पर सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने कीमती धातुओं के बाजार का ध्यान खींचा है। अक्टूबर 2026 के आखिरी सप्ताह में चांदी की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है। वायदा बाजार में चांदी एक बार फिर कमजोर हुई और इसकी कीमत में करीब 2,600 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। दूसरी ओर, चांदी की कीमतों में लगातार कमजोरी के बीच गुरुवार को सोने के भाव में तेजी देखने को मिली। इससे बाजार में दोनों कीमती धातुओं की चाल के बीच अंतर दिखाई दिया।

त्योहारी सीजन में सोने और चांदी की खरीदारी करने वाले लोगों के लिए कीमतों में आया यह बदलाव महत्वपूर्ण है। हालांकि, वायदा बाजार में दर्ज भाव और स्थानीय सर्राफा बाजार में ग्राहकों को मिलने वाले भाव में अंतर हो सकता है। इसलिए खरीदारी से पहले अपने शहर के ताजा रेट की जानकारी लेना जरूरी है।

चांदी की कीमत में 2,600 रुपये की गिरावट

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर चांदी की कीमतों में अक्टूबर महीने के दौरान लगातार कमजोरी देखी जा रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, गुरुवार को वायदा कारोबार शुरू होने के साथ ही 4 दिसंबर 2026 की एक्सपायरी वाले चांदी के कॉन्ट्रैक्ट में गिरावट आई। इसका भाव घटकर 1,91,706 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया।

चांदी की कीमतों में यह गिरावट ऐसे समय में सामने आई है, जब करवाचौथ जैसे त्योहार के कारण बाजार में सोने-चांदी की कीमतों पर लोगों की नजर बनी हुई है। हालांकि, केवल त्योहार के आधार पर कीमतों में तेजी या गिरावट का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। कीमती धातुओं के भाव घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की परिस्थितियों, निवेशकों की खरीद-बिक्री और अन्य आर्थिक कारकों से प्रभावित होते हैं।

अक्टूबर महीने में लगातार कमजोर हुई चांदी

चांदी की कीमतों में गिरावट का सिलसिला अक्टूबर महीने की शुरुआत में ही शुरू हो गया था। महीने के अंतिम सप्ताह तक यह कमजोरी बनी रहने से बाजार में चांदी की कीमतों के रुझान पर सवाल उठने लगे हैं।

आमतौर पर चांदी को औद्योगिक उपयोग और निवेश, दोनों दृष्टिकोणों से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसका इस्तेमाल आभूषणों के अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा से जुड़े उपकरणों और कई औद्योगिक उत्पादों में किया जाता है। इसलिए इसकी कीमतों पर निवेशकों के रुझान के साथ-साथ औद्योगिक मांग और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का भी असर पड़ सकता है।

जब बाजार में कीमतें तेजी से ऊपर जाती हैं, तो कुछ निवेशक मुनाफावसूली करना पसंद करते हैं। इसके विपरीत, कमजोर बाजार में निवेशक खरीदारी को लेकर सतर्क हो सकते हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी से चांदी की मौजूदा गिरावट का कोई एक निश्चित कारण स्थापित नहीं होता। इसलिए इस गिरावट को किसी एक वजह से जोड़ने के बजाय बाजार की व्यापक परिस्थितियों के संदर्भ में देखना उचित होगा।

रिकॉर्ड स्तर से कितनी नीचे आई चांदी?

चांदी की मौजूदा कीमतों की तुलना उसके पहले के उच्चतम स्तर से करने पर गिरावट का आकार और स्पष्ट होता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 की शुरुआत में MCX पर चांदी का भाव 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर तक पहुंचा था।

इसके मुकाबले 1,91,706 रुपये प्रति किलोग्राम का भाव काफी नीचे है। दोनों कीमतों के बीच अंतर 2,28,342 रुपये प्रति किलोग्राम बैठता है। यानी बताए गए उच्चतम स्तर की तुलना में चांदी की कीमत में लगभग 54.36 प्रतिशत की कमी बनती है।

यह तुलना जनवरी के बताए गए उच्चतम भाव और अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में उपलब्ध कराए गए भाव पर आधारित है। अलग-अलग कॉन्ट्रैक्ट, कारोबार के समय और बाजार की परिस्थितियों के कारण वास्तविक कीमतों में अंतर हो सकता है।

चांदी में गिरावट के बीच सोने की कीमतों में तेजी

चांदी की कीमतों में लगातार कमजोरी के बीच सोने का रुख कुछ अलग दिखाई दिया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, गुरुवार को जहां चांदी के भाव में गिरावट दर्ज की गई, वहीं MCX पर सोने की कीमतों में तेजी देखने को मिली।

सोने और चांदी की कीमतें हमेशा एक ही दिशा में चलें, यह जरूरी नहीं है। दोनों धातुओं की मांग, वैश्विक बाजारों में कारोबार, निवेशकों की रणनीति और आर्थिक परिस्थितियों के प्रति प्रतिक्रिया अलग-अलग हो सकती है। इसी वजह से कई बार एक ही कारोबारी सत्र में सोना महंगा और चांदी सस्ती होती दिखाई देती है।

करवाचौथ पर सोना-चांदी खरीदने वालों के लिए क्या मायने हैं?

करवाचौथ के अवसर पर कई परिवार सोने और चांदी के आभूषण खरीदने या पहले से खरीदे गए आभूषणों की कीमतों का आकलन करने में रुचि रखते हैं। ऐसे में बाजार में आई गिरावट खरीदारी की योजना बनाने वालों का ध्यान आकर्षित कर सकती है।

हालांकि, MCX पर चांदी का वायदा भाव और किसी ज्वेलरी शोरूम में मिलने वाली चांदी की कीमत एक जैसी होना जरूरी नहीं है। खुदरा कीमत पर शुद्धता, स्थानीय बाजार की परिस्थितियों, जीएसटी, मेकिंग चार्ज और अन्य लागू शुल्कों का प्रभाव पड़ सकता है। सोने के आभूषणों के मामले में भी यही बात लागू होती है।

आगे कैसी रह सकती है सोने-चांदी की चाल?

अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में चांदी की कीमतों में जारी कमजोरी और सोने में दिखाई दी तेजी ने कीमती धातुओं के बाजार को चर्चा में ला दिया है। हालांकि, आने वाले दिनों में दोनों धातुओं की कीमतें किस दिशा में जाएंगी, इसका निश्चित अनुमान उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर नहीं लगाया जा सकता।

निवेशकों को वैश्विक बाजारों में कीमतों के रुझान, डॉलर की चाल, ब्याज दरों से जुड़ी परिस्थितियों और मांग-आपूर्ति में होने वाले बदलावों पर नजर रखनी चाहिए। इसके साथ ही MCX पर संबंधित कॉन्ट्रैक्ट के भाव और कारोबार के दौरान होने वाले उतार-चढ़ाव को भी समझना जरूरी है।

कुल मिलाकर, करवाचौथ के आसपास चांदी की कीमतों में करीब 2,600 रुपये की गिरावट और सोने के भाव में तेजी ने बाजार की अलग-अलग चाल को सामने रखा है। चांदी का भाव जनवरी में बताए गए उच्चतम स्तर से काफी नीचे आ चुका है, जबकि सोने में हालिया कारोबार के दौरान मजबूती दिखाई दी। ऐसे में खरीदारों और निवेशकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे ताजा भाव की पुष्टि करें और केवल एक दिन की तेजी या गिरावट के आधार पर खरीदारी या निवेश का निर्णय न लें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here