भोपाल में बुजुर्गों की सुरक्षा पर सवाल: 70+ उम्र के हर चौथे बुजुर्ग के घर में 60 से कम उम्र का कोई वोटर नहीं

0
2

भोपाल। भोपाल में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या के बाद शहर में बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता एक बार फिर सामने आई है। इसी बीच सामने आई एक पड़ताल ने यह संकेत दिया है कि राजधानी के कई इलाकों में बड़ी संख्या में बुजुर्ग ऐसे घरों में रह रहे हैं, जहां उनके साथ रहने वाला 60 साल से कम उम्र का कोई मतदाता दर्ज नहीं है। इसका मतलब यह नहीं है कि इन सभी घरों में बुजुर्ग अकेले रहते हैं, लेकिन मतदाता सूची के आंकड़े यह जरूर बताते हैं कि इन घरों में बुजुर्गों के अलावा कम उम्र के वोटर दर्ज नहीं हैं।

17 बूथों में 210 ऐसे मकान मिले

पड़ताल में 274 बुजुर्गों से जुड़े 210 ऐसे मकानों की पहचान की गई, जहां मतदाता सूची के अनुसार 60 वर्ष से कम उम्र का कोई मतदाता दर्ज नहीं है। यह आंकड़ा इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि महज 17 मतदान केंद्रों के सीमित क्षेत्र में ही ऐसे मकानों की संख्या 210 सामने आई है।

मतदाता सूची किसी घर में रहने वाले सभी लोगों की पूरी सामाजिक या पारिवारिक स्थिति नहीं बताती। उदाहरण के लिए, किसी घर में 60 साल से कम उम्र के लोग रह सकते हैं, लेकिन वे किसी अन्य स्थान के मतदाता हो सकते हैं या मतदाता सूची में उनका नाम दर्ज नहीं हो सकता। इसलिए इन आंकड़ों को अकेले रहने वाले बुजुर्गों की अंतिम संख्या नहीं माना जा सकता। हालांकि, यह स्थिति ऐसे घरों की पहचान के लिए शुरुआती संकेत जरूर देती है, जहां वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और सहायता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत हो सकती है।

पुलिस के पास ऐसे घरों का अलग डेटा नहीं

पड़ताल में एक महत्वपूर्ण पहलू यह सामने आया कि भोपाल पुलिस के पास ऐसे घरों का अलग से डेटा उपलब्ध नहीं है, जहां बुजुर्ग रहते हैं और उनके साथ 60 साल से कम उम्र का कोई व्यक्ति दर्ज नहीं है।

भोपाल पुलिस के वरिष्ठ नागरिक सेल में पूरे शहर से केवल 172 बुजुर्ग पंजीकृत बताए गए हैं। दूसरी ओर, सिर्फ 17 मतदान केंद्रों की सूची के विश्लेषण में 210 ऐसे मकान मिले, जिनमें 70 वर्ष या उससे अधिक उम्र के मतदाता रहते हैं और वहां 60 वर्ष से कम उम्र का कोई वोटर दर्ज नहीं है।

इन दोनों आंकड़ों की सीधी तुलना करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि दोनों का आधार अलग है। वरिष्ठ नागरिक सेल में पंजीकरण स्वैच्छिक या पुलिस रिकॉर्ड की प्रक्रिया पर निर्भर हो सकता है, जबकि मतदाता सूची एक अलग प्रशासनिक रिकॉर्ड है। इसलिए 210 मकानों को पुलिस के लिए अनिवार्य रूप से सत्यापित ‘अकेले रहने वाले बुजुर्गों’ की सूची नहीं माना जा सकता।

भोपाल में सामने आए ये आंकड़े फिलहाल सीमित इलाकों और मतदाता सूचियों के विश्लेषण पर आधारित हैं। इसलिए इन्हें पूरे शहर में अकेले रहने वाले बुजुर्गों की कुल संख्या नहीं माना जा सकता। लेकिन 70 वर्ष से अधिक उम्र के 1,127 मतदाताओं में से 274 यानी 24.3 प्रतिशत का ऐसे मकानों में दर्ज होना, जहां 60 वर्ष से कम उम्र का कोई वोटर नहीं है, वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और सामाजिक सहयोग को लेकर चर्चा की जरूरत जरूर दिखाता है। आने वाले वर्षों में मध्य प्रदेश में बुजुर्ग आबादी की हिस्सेदारी बढ़ने के अनुमान के बीच यह मुद्दा परिवार, समाज और प्रशासन—तीनों के लिए महत्वपूर्ण होता जा रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here