दिवाली-छठ पर हवाई किराए में भारी उछाल: कई गुना महंगी हुई फ्लाइट टिकट, एयरलाइंस अधिकतम कितना किराया वसूल सकती हैं? जानिए 2027 से लागू होने वाले नए नियम

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नई दिल्ली। दिवाली और छठ पूजा के त्योहारों के बीच अपने घर जाने की तैयारी कर रहे हवाई यात्रियों को इस बार महंगे टिकटों का सामना करना पड़ रहा है। देश के अलग-अलग शहरों के बीच चलने वाली घरेलू उड़ानों का किराया त्योहारों के दौरान काफी बढ़ गया है। कई यात्री सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक कीमत पर टिकट बुक करने को मजबूर हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग एयरलाइंस की किराया नीति को लेकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। इसी बीच हवाई किराए को लेकर नए नियमों की चर्चा तेज हो गई है। यात्रियों के मन में सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर एयरलाइन कंपनियां अधिकतम कितना किराया बढ़ा सकती हैं और क्या सरकार ने टिकट की कीमतों के लिए कोई ऊपरी सीमा तय की है?

दरअसल, भारत में सामान्य परिस्थितियों में घरेलू हवाई किराए की कोई स्थायी अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं है। एयरलाइंस कंपनियां मांग, सीटों की उपलब्धता, परिचालन लागत और बुकिंग के समय जैसे कारकों के आधार पर टिकट की कीमत तय करती हैं। इसका मतलब है कि त्योहारों और छुट्टियों के दौरान जब किसी रूट पर यात्रियों की संख्या अचानक बढ़ जाती है, तो टिकटों की कीमतों में भी तेजी आ सकती है।

त्योहारों में क्यों बढ़ जाता है फ्लाइट का किराया?

दिवाली और छठ पूजा के दौरान देश के बड़े शहरों से बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और अन्य राज्यों की ओर जाने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ जाती है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, पुणे और हैदराबाद जैसे शहरों में नौकरी या व्यवसाय करने वाले लोग त्योहार मनाने के लिए अपने गृह राज्यों की यात्रा करते हैं।

इस दौरान एक ही रूट पर सीमित सीटों के मुकाबले टिकट बुक करने वालों की संख्या अधिक हो जाती है। एयरलाइन कंपनियां आमतौर पर डायनेमिक प्राइसिंग मॉडल के तहत किराया निर्धारित करती हैं। इस व्यवस्था में टिकट की कीमत मांग और उपलब्ध सीटों के अनुसार बदलती रहती है।

उदाहरण के लिए, किसी उड़ान में शुरुआती बुकिंग के दौरान कम कीमत वाले टिकट उपलब्ध हो सकते हैं। जैसे-जैसे सीटें भरती जाती हैं, कम किराये वाली श्रेणी की सीटें समाप्त हो जाती हैं और यात्रियों को महंगे विकल्पों में टिकट खरीदना पड़ता है।

एयरलाइंस अधिकतम कितना किराया बढ़ा सकती हैं?

यह यात्रियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। सामान्य परिस्थितियों में भारत में घरेलू एयरलाइंस के लिए टिकट का कोई स्थायी अधिकतम किराया निर्धारित नहीं है। यानी ऐसा कोई सामान्य नियम नहीं है, जिसके तहत सभी घरेलू उड़ानों में एयरलाइन कंपनियां एक निश्चित रकम से ज्यादा टिकट नहीं बेच सकतीं।

एयरलाइंस अपनी परिचालन लागत, बाजार की स्थिति और यात्रियों की मांग के आधार पर किराया तय करती हैं। अलग-अलग उड़ानों, रूट और बुकिंग क्लास के हिसाब से भी कीमतों में अंतर हो सकता है।

इसलिए सामान्य दिनों में किसी टिकट के किराये में अधिकतम कितने प्रतिशत या कितने रुपये की बढ़ोतरी की जा सकती है, इसकी कोई एक सार्वभौमिक सीमा नहीं है।

संसद में भी उठ चुका है हवाई किराये का मुद्दा

हवाई किराये में लगातार होने वाली बढ़ोतरी का मुद्दा संसद में भी उठाया जा चुका है। इस साल फरवरी में संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में नागरिक उड्डयन मंत्रालय के राज्य मंत्री ने हवाई किराये की व्यवस्था और सरकार की निगरानी से जुड़ी जानकारी दी थी।

मंत्रालय की ओर से स्पष्ट किया गया था कि हवाई किराये मुख्य रूप से बाजार की परिस्थितियों और मांग एवं आपूर्ति जैसे आर्थिक कारकों पर निर्भर करते हैं।

सरकार के अनुसार, सीटों की उपलब्धता, ईंधन की लागत, विमान की क्षमता, मौसमी मांग और अन्य परिचालन परिस्थितियां टिकट की कीमतों को प्रभावित करती हैं।

इस व्यवस्था में एयरलाइंस को सामान्य परिस्थितियों में किराया तय करने की स्वतंत्रता है, लेकिन यात्रियों के हितों की रक्षा और बाजार में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सरकार निगरानी भी करती है।

DGCA की टैरिफ मॉनिटरिंग यूनिट रखती है नजर

हवाई किराये में पारदर्शिता लाने और एयरलाइन कंपनियों की कीमतों पर नजर रखने के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने टैरिफ मॉनिटरिंग यूनिट यानी TMU का गठन किया है।

इस यूनिट का उद्देश्य एयरलाइंस द्वारा वसूले जा रहे किराये की निगरानी करना है। इसके लिए एयरलाइन कंपनियों की वेबसाइटों पर उपलब्ध टिकट की कीमतों का नियमित रूप से अध्ययन किया जाता है।

जानकारी के मुताबिक, यह यूनिट हर महीने एयरलाइंस की वेबसाइटों के माध्यम से सात दिनों की अवधि के किरायों की निगरानी करती है। इससे अलग-अलग रूटों पर टिकट की कीमतों में होने वाले बदलाव और बाजार की स्थिति को समझने में मदद मिलती है।

DGCA की निगरानी व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हवाई किराये से संबंधित जानकारी उपलब्ध रहे और किसी असामान्य स्थिति में नियामक स्तर पर आवश्यक कदम उठाए जा सकें।

1 जनवरी 2027 से लागू होंगे भारतीय वायुयान नियम, 2026

हवाई किराये को लेकर एक और महत्वपूर्ण बदलाव भारतीय वायुयान नियम, 2026 के रूप में सामने आया है। ये नए नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे।

इन नियमों के तहत भी सामान्य परिस्थितियों में घरेलू हवाई किराये की कोई स्थायी अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं की गई है। यानी नए नियम लागू होने के बाद भी एयरलाइन कंपनियां सामान्य बाजार परिस्थितियों के आधार पर टिकट की कीमत तय कर सकेंगी।

हालांकि, नए नियमों में DGCA की निगरानी व्यवस्था और केंद्र सरकार के हस्तक्षेप से जुड़े प्रावधान महत्वपूर्ण हैं। किसी असाधारण परिस्थिति में यदि जनहित की आवश्यकता होती है, तो केंद्र सरकार हवाई किराये को लेकर आवश्यक कदम उठा सकती है।

यात्रियों को टिकट बुक करते समय किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?

दिवाली और छठ जैसे बड़े त्योहारों पर हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए पहले से टिकट बुक करना फायदेमंद हो सकता है। आखिरी समय में सीटों की उपलब्धता कम होने के कारण किराया बढ़ने की संभावना रहती है।

यात्रियों को एक ही रूट पर अलग-अलग एयरलाइंस के किराये की तुलना करनी चाहिए। इसके अलावा आसपास के हवाई अड्डों और यात्रा की तारीखों में थोड़े बदलाव के विकल्प भी देखे जा सकते हैं।

टिकट बुक करते समय केवल शुरुआती किराया देखकर निर्णय नहीं लेना चाहिए। बैगेज, सीट चयन, सुविधा शुल्क और अन्य अतिरिक्त शुल्क की जानकारी भी जांचनी चाहिए, ताकि अंतिम भुगतान की सही राशि का पता चल सके।

क्या त्योहारों में महंगे टिकटों से राहत मिलेगी?

फिलहाल दिवाली और छठ के दौरान बढ़े हुए हवाई किराये को लेकर यात्रियों की शिकायतें सामने आ रही हैं। लेकिन सामान्य परिस्थितियों में एयरलाइंस के लिए कोई स्थायी अधिकतम किराया सीमा नहीं होने के कारण केवल त्योहारों में मांग बढ़ने से सरकार द्वारा स्वतः किराया नियंत्रित करने का प्रावधान नहीं है।

हालांकि, यदि परिस्थितियां असाधारण हो जाती हैं और जनहित में हस्तक्षेप जरूरी माना जाता है, तो केंद्र सरकार कदम उठा सकती है।

कुल मिलाकर, भारतीय विमानन क्षेत्र में हवाई किराये की व्यवस्था मुख्य रूप से मांग और आपूर्ति पर आधारित है। DGCA की टैरिफ मॉनिटरिंग यूनिट कीमतों पर नजर रखती है, जबकि सरकार के पास विशेष परिस्थितियों में हस्तक्षेप का अधिकार है। 1 जनवरी 2027 से लागू होने वाले नए भारतीय वायुयान नियमों के बाद भी सामान्य दिनों में अधिकतम किराये की कोई स्थायी सीमा नहीं होगी। ऐसे में त्योहारों के दौरान सस्ती टिकट पाने के लिए यात्रियों के लिए समय रहते बुकिंग करना और अलग-अलग उड़ानों के किराये की तुलना करना सबसे उपयोगी विकल्प रहेगा।

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