नई दिल्ली। स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलीन भारत की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर सोमवार को नई दिल्ली पहुंचे। उनके भारत आगमन के साथ दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, तकनीक और आर्थिक सहयोग को लेकर उच्चस्तरीय बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में स्विस परिसंघ के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलीन से मुलाकात की। यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ यानी EFTA के बीच हुए ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (TEPA) को लागू हुए एक साल पूरा होने जा रहा है। स्विस राष्ट्रपति के दौरे को भारत-स्विट्जरलैंड आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

TEPA की पहली वर्षगांठ के बीच स्विस राष्ट्रपति का भारत दौरा
गाइ पार्मेलीन का मौजूदा भारत दौरा भारत-EFTA TEPA के लागू होने के लगभग एक साल बाद हो रहा है। भारत और EFTA देशों—स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन—के बीच TEPA पर 10 मार्च 2024 को नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए गए थे। यह समझौता 1 अक्टूबर 2025 से प्रभावी हुआ। भारत सरकार के अनुसार, यह समझौता वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार के साथ निवेश, व्यापार सुगमता और आर्थिक सहयोग के लिए व्यापक ढांचा उपलब्ध कराता है।
TEPA की खास बात यह है कि इसमें केवल बाजार पहुंच को लेकर प्रावधान नहीं हैं, बल्कि निवेश और रोजगार से जुड़ी प्रतिबद्धता भी शामिल है। समझौते के तहत EFTA देशों ने अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब अमेरिकी डॉलर के प्रत्यक्ष निवेश की दिशा में काम करने और इन निवेशों के जरिए 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार के सृजन में मदद करने का लक्ष्य रखा है। इस प्रतिबद्धता का उद्देश्य भारत में दीर्घकालिक निवेश, उत्पादन क्षमता और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना है।
भारतीय निर्यातकों के लिए बाजार पहुंच का विस्तार
TEPA के तहत EFTA ने 92.2 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर बाजार पहुंच की पेशकश की है, जो भारत के करीब 99.6 प्रतिशत निर्यात को कवर करती है। इसमें गैर-कृषि उत्पादों के लिए व्यापक बाजार पहुंच और प्रोसेस्ड कृषि उत्पादों पर टैरिफ रियायतें भी शामिल हैं। इससे भारतीय कंपनियों के लिए EFTA के उच्च आय वाले बाजारों में अपने उत्पाद पहुंचाने के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
समझौते के संभावित लाभ कई क्षेत्रों में देखे जा सकते हैं। इंजीनियरिंग सामान, टेक्सटाइल और कपड़े, फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइस, इलेक्ट्रॉनिक्स, केमिकल्स, जेम्स एंड ज्वेलरी, समुद्री उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण और सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भारतीय कारोबारियों के लिए अवसर बनाए गए हैं। सरकार के अनुसार, इंजीनियरिंग क्षेत्र के निर्यात में भी पहले से वृद्धि दर्ज की गई है और TEPA के जरिए उच्च मूल्य वाले बाजारों में भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने की संभावना है।
स्विट्जरलैंड भारत का महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार
EFTA के चार सदस्य देशों में स्विट्जरलैंड भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। इसलिए TEPA के क्रियान्वयन में स्विट्जरलैंड की भूमिका विशेष महत्व रखती है। मई 2026 में भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल की स्विट्जरलैंड यात्रा के दौरान भी TEPA के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई थी। दोनों पक्षों ने व्यापार और निवेश बढ़ाने, नियामकीय सहयोग मजबूत करने तथा गैर-टैरिफ बाधाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की थी। उस दौरान स्विस कंपनियों के साथ उन्नत विनिर्माण, इंजीनियरिंग, तकनीक और वित्तीय सेवाओं जैसे क्षेत्रों में कारोबारी सहयोग की संभावनाओं पर भी बातचीत हुई थी।
भारत स्विट्जरलैंड से निवेश और तकनीकी साझेदारी बढ़ाने पर भी जोर दे रहा है। विशेष रूप से फार्मास्यूटिकल्स, बायोटेक्नोलॉजी, प्रिसीजन इंजीनियरिंग, मशीनरी, क्लीन एनर्जी, मेडिकल टेक्नोलॉजी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में स्विस कंपनियों की भागीदारी को बढ़ाने की संभावनाएं देखी जा रही हैं। ऐसे क्षेत्रों में सहयोग भारत की विनिर्माण क्षमता, तकनीकी कौशल और वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़ाव को प्रभावित कर सकता है।




