JPSC परीक्षा घोटाला मामले में तीन आरोपितों को झटका, अदालत ने जमानत याचिकाएं की खारिज

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drnewsindia.com /रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC से जुड़ी परीक्षा में कथित घोटाले और पेपर लीक मामले में आरोपित तीन लोगों को अदालत से राहत नहीं मिली है। अपर न्यायायुक्त प्रथम योगेश कुमार की अदालत ने मंगलवार को तीन आरोपितों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने मामले की केस डायरी, सह-अभियुक्तों के बयानों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी CDR और डिजिटल साक्ष्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं और ओएमआर शीट में कथित हेरफेर से जुड़े आरोप सामने आते हैं।

जिन तीन आरोपितों की जमानत याचिकाएं खारिज हुई हैं, उनमें टीएसआर के निदेशक रामबीर सिंह, JPSC के परीक्षा नियंत्रक के सहायक और संयुक्त सचिव के निजी सहायक के रूप में कार्यरत सोनू कुमार तथा JPSC की एक सदस्य के निजी सहायक बृज कुमार राम शामिल हैं। तीनों को झारखंड CID ने अलग-अलग तारीखों में गिरफ्तार किया था और गिरफ्तारी के बाद से वे न्यायिक हिरासत में हैं।

तीनों आरोपित कब गिरफ्तार हुए?

इस मामले में CID ने तीनों आरोपितों को अलग-अलग तारीखों में गिरफ्तार किया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रामबीर सिंह को 22 जुलाई, सोनू कुमार को 26 जुलाई और बृज कुमार राम को 17 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था।

गिरफ्तारी के बाद से तीनों न्यायिक हिरासत में हैं। जमानत याचिकाओं के जरिए आरोपितों की ओर से हिरासत से राहत की मांग की गई थी, लेकिन अदालत ने उपलब्ध सामग्री और मामले की गंभीरता को देखते हुए तीनों को जमानत देने से इनकार कर दिया।

जमानत याचिका खारिज होने के बाद फिलहाल तीनों आरोपित न्यायिक हिरासत में ही रहेंगे। आगे की कानूनी प्रक्रिया जांच की प्रगति और अदालत में प्रस्तुत किए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ेगी।

फिलहाल रामबीर सिंह, सोनू कुमार और बृज कुमार राम को जमानत नहीं मिली है। अदालत के सामने पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर जमानत याचिकाएं खारिज की गई हैं। हालांकि, मामले की अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे होने वाली न्यायिक कार्यवाही से तय होगी।

JPSC परीक्षा घोटाले की जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि कथित अनियमितताओं का वास्तविक दायरा क्या था, किन परीक्षाओं पर इसका प्रभाव पड़ा और परीक्षा प्रक्रिया में यदि कोई बदलाव या हेरफेर हुआ तो उसकी जिम्मेदारी किसकी थी। इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने और अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट रूप से सामने आएंगे।

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