सीहोर। मंडी से श्यामपुर तक बनाई गई सड़क की खराब हालत को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। सड़क की बदहाली से परेशान लोगों ने एक बार फिर विरोध प्रदर्शन करते हुए चक्काजाम किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब 30 करोड़ रुपए की लागत से एफडीआर (Full Depth Reclamation) पद्धति से तैयार की गई यह सड़क गारंटी अवधि के दौरान ही खराब हो गई। सड़क की सतह कई स्थानों पर उखड़ चुकी है और जगह-जगह गिट्टे बाहर निकल आए हैं। इसके चलते सड़क पर आवागमन करने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

प्रदर्शन कर रहे लोगों के अनुसार सड़क की मौजूदा स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। कई हिस्सों में सड़क की ऊपरी परत उखड़ने के बाद गिट्टे दिखाई देने लगे हैं। वाहनों के गुजरने पर सड़क से धूल उड़ती है, जिससे आसपास रहने वाले लोगों और सड़क किनारे कारोबार करने वाले दुकानदारों को भी परेशानी हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की स्थिति ऐसी हो गई है कि कई स्थानों पर पैदल चलना भी मुश्किल हो रहा है। वहीं दोपहिया वाहन चालकों के लिए भी सड़क पर सफर करना जोखिम भरा हो गया है।
धूल से दुकानदार और स्थानीय लोग परेशान
सड़क की बदहाली का असर केवल यातायात पर ही नहीं पड़ रहा, बल्कि सड़क किनारे रहने वाले लोगों और दुकानदारों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वाहनों के गुजरने के दौरान उड़ने वाली धूल दुकानों में रखे सामान पर जम रही है। दुकानदारों के मुताबिक, लगातार धूल उड़ने से उनके सामान को नुकसान पहुंच रहा है और दुकान में सफाई बनाए रखना भी मुश्किल हो गया है।
स्थानीय लोगों ने धूल के कारण स्वास्थ्य संबंधी परेशानी बढ़ने की बात भी कही है। उनका कहना है कि दिनभर सड़क पर वाहनों की आवाजाही के दौरान धूल उड़ती रहती है, जिससे आसपास के वातावरण पर असर पड़ रहा है। लोगों की मांग है कि सड़क की स्थिति में जल्द सुधार किया जाए, ताकि आवागमन के साथ-साथ स्थानीय निवासियों और व्यापारियों को भी राहत मिल सके।
दो महीने में तीसरी बार चक्काजाम
मंडी-श्यामपुर सड़क की स्थिति को लेकर यह दो महीने में तीसरा चक्काजाम बताया जा रहा है। इससे पहले भी स्थानीय लोग सड़क की समस्या को लेकर विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं। कोलीपुरा चौराहे और हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र में भी सड़क निर्माण और मरम्मत की मांग को लेकर लोगों ने प्रदर्शन किया था।
लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों से यह स्पष्ट है कि सड़क की समस्या स्थानीय लोगों के लिए गंभीर मुद्दा बन चुकी है। लोगों का कहना है कि पहले भी जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान सड़क की खराब स्थिति की ओर दिलाया गया, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने के कारण उन्हें दोबारा सड़क पर उतरना पड़ा।
प्रदर्शनकारियों ने सड़क की जल्द मरम्मत कराने के साथ-साथ निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि जब सड़क का निर्माण बड़ी लागत से किया गया है और अभी गारंटी अवधि भी बताई जा रही है, तो इतनी जल्दी सड़क खराब होने के कारणों की जांच होनी चाहिए। स्थानीय लोगों की मांग है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा सड़क का निरीक्षण किया जाए और निर्माण की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराई जाए।
करीब 30 करोड़ रुपए की लागत से एफडीआर पद्धति से बनी सड़क के गारंटी अवधि में खराब होने की शिकायत के बाद स्थानीय लोगों ने गुणवत्ता की जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि सड़क निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, निर्माण प्रक्रिया और मौजूदा क्षति के कारणों की जांच सामने आनी चाहिए।
स्थानीय लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग सड़क का मौके पर निरीक्षण कर खराब हिस्सों को चिह्नित करे और आवश्यकतानुसार मरम्मत कराए। इसके साथ ही भविष्य में सड़क की गुणवत्ता दोबारा प्रभावित न हो, इसके लिए निर्माण कार्य की तकनीकी जांच और निगरानी सुनिश्चित की जाए।
लगातार तीसरी बार चक्काजाम होने के बाद अब लोगों की नजर प्रशासन और संबंधित विभाग की अगली कार्रवाई पर है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि उनकी शिकायतों पर जल्द कार्रवाई होगी और मंडी से श्यामपुर तक सड़क की स्थिति में सुधार किया जाएगा, जिससे वाहन चालकों, पैदल यात्रियों, दुकानदारों और आसपास रहने वाले लोगों को राहत मिल सके।




