भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा उपचुनाव को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। प्रदेश से राज्यसभा की रिक्त सीट के लिए हो रहे उपचुनाव में केंद्रीय मंत्री और भाजपा उम्मीदवार हरदीप सिंह पुरी का निर्विरोध निर्वाचन लगभग तय हो गया है। मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को नामांकन पत्रों की जांच के दौरान दो निर्दलीय उम्मीदवारों के पर्चे खारिज कर दिए गए। इनमें कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार राजकुमार लोहानी और तेलंगाना के कान्ते सयान्ना शामिल हैं। दूसरी ओर, हरदीप सिंह पुरी के नामांकन पत्र को रिटर्निंग ऑफिसर ने वैध मानते हुए स्वीकार कर लिया है। उनके नामांकन के खिलाफ कांग्रेस और अन्य उम्मीदवारों की ओर से दर्ज कराई गई आपत्तियां भी खारिज कर दी गईं।

दोनों निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन निरस्त होने के बाद चुनाव मैदान में केवल हरदीप सिंह पुरी बचे हैं। अब 5 नवंबर 2026 को नाम वापसी की समय-सीमा समाप्त होने के बाद उनके निर्विरोध निर्वाचित होने की औपचारिक घोषणा की जाएगी।
दो उम्मीदवारों के नामांकन पत्र क्यों हुए खारिज?
मंगलवार को भोपाल में राज्यसभा उपचुनाव के लिए दाखिल नामांकन पत्रों की जांच की गई। इस दौरान निर्वाचन अधिकारी ने सभी उम्मीदवारों के दस्तावेजों और निर्धारित कानूनी औपचारिकताओं की जांच की। जांच में दो निर्दलीय उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों में आवश्यक दस्तावेजों और जानकारियों की कमी पाई गई।
पहले उम्मीदवार राजकुमार लोहानी हैं, जो भोपाल के सामाजिक कार्यकर्ता हैं और कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरे थे। उनका नामांकन अनिवार्य फॉर्म-26 संलग्न नहीं होने के कारण निरस्त कर दिया गया। फॉर्म-26 चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार का महत्वपूर्ण शपथ पत्र होता है, जिसमें संपत्ति, देनदारियों और आपराधिक मामलों से संबंधित निर्धारित जानकारियां देनी होती हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, राजकुमार लोहानी ने दावा किया था कि उन्होंने आवश्यक शपथ पत्र ई-मेल के माध्यम से भेजा है। हालांकि, निर्वाचन अधिकारी ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत भौतिक रूप से जमा किए जाने वाले दस्तावेज को अनिवार्य मानते हुए इसे स्वीकार नहीं किया। लोहानी की ओर से अतिरिक्त समय मांगे जाने की बात भी सामने आई, लेकिन उन्हें इसकी अनुमति नहीं मिली।
हरदीप सिंह पुरी के नामांकन को मिली मंजूरी
दो निर्दलीय उम्मीदवारों के पर्चे खारिज होने के साथ ही हरदीप सिंह पुरी के नामांकन की वैधता को लेकर उठाए गए सवाल भी चर्चा में रहे। कांग्रेस नेताओं और अन्य आपत्तिकर्ताओं ने उनके नामांकन के साथ जमा किए गए शपथ पत्र यानी फॉर्म-26 पर सवाल उठाए थे।
मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के उपनेता हेमंत कटारे सहित आपत्तिकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पुरी की ओर से प्रस्तुत हलफनामे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां स्पष्ट नहीं हैं। उन्होंने विशेष रूप से पत्नी के नाम और संपत्ति के विवरण से संबंधित बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज कराई थी। विदेशी मुद्रा में संपत्ति का उल्लेख और नोटरी प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए।
इन आपत्तियों पर सुनवाई के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर उमेश कुमार शर्मा ने संबंधित पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर दिया। हरदीप सिंह पुरी की ओर से भी जवाब और दस्तावेज प्रस्तुत किए गए।
सभी आपत्तियों और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद निर्वाचन अधिकारी ने उन्हें खारिज कर दिया। अधिकारी के आदेश के अनुसार, पुरी के नामांकन में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 33 और 34 के अनिवार्य प्रावधानों का उल्लंघन नहीं पाया गया। साथ ही धारा 36 के तहत नामांकन निरस्त करने का कोई पर्याप्त आधार भी सामने नहीं आया।
कांग्रेस ने फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही
हरदीप सिंह पुरी का नामांकन स्वीकार किए जाने और कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार राजकुमार लोहानी का पर्चा खारिज होने के बाद प्रदेश की राजनीति में इस मामले को लेकर विवाद भी सामने आया है।
कांग्रेस नेताओं ने निर्वाचन अधिकारी के फैसले पर सवाल उठाए हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के उपनेता हेमंत कटारे और भोपाल उत्तर से कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने कहा है कि वे इस निर्णय को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती देंगे।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि पुरी के नामांकन पर कई आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं, लेकिन उन्हें स्वीकार नहीं किया गया। वहीं, कांग्रेस समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार का नामांकन जरूरी दस्तावेज की कमी के कारण निरस्त कर दिया गया। पार्टी नेताओं ने निर्वाचन प्रक्रिया में समान व्यवहार और नियमों के पालन को लेकर सवाल उठाए हैं।
दूसरी ओर, रिटर्निंग ऑफिसर ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि हरदीप सिंह पुरी के दस्तावेजों की जांच निर्धारित कानूनी प्रावधानों के अनुसार की गई और नामांकन निरस्त करने योग्य कोई गंभीर कमी नहीं मिली।
5 नवंबर को होगी निर्विरोध निर्वाचन की औपचारिक घोषणा
राज्यसभा उपचुनाव के कार्यक्रम के अनुसार, 5 नवंबर 2026 को दोपहर 3 बजे तक उम्मीदवार अपने नाम वापस ले सकते हैं। चूंकि नामांकन जांच के बाद केवल हरदीप सिंह पुरी ही वैध उम्मीदवार के रूप में मैदान में बचे हैं, इसलिए नाम वापसी की समय-सीमा पूरी होने के बाद उनके निर्विरोध निर्वाचित होने की औपचारिक घोषणा होने की संभावना है।
इस उपचुनाव के लिए मतदान की निर्धारित तारीख 12 नवंबर 2026 थी। हालांकि, यदि नाम वापसी की अंतिम समय-सीमा तक कोई दूसरा वैध उम्मीदवार मैदान में नहीं आता है, तो मतदान की आवश्यकता नहीं होगी और निर्विरोध निर्वाचन की प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी।
इसलिए 5 नवंबर की तारीख इस चुनाव के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसी दिन यह स्पष्ट हो जाएगा कि हरदीप सिंह पुरी औपचारिक रूप से निर्विरोध निर्वाचित घोषित होते हैं या चुनाव प्रक्रिया में कोई नया घटनाक्रम सामने आता है।
मध्य प्रदेश की राजनीति में क्यों महत्वपूर्ण है यह चुनाव?
राज्यसभा उपचुनाव भले ही एक सीट के लिए हो रहा है, लेकिन इसके राजनीतिक मायने महत्वपूर्ण हैं। भाजपा के केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का मध्य प्रदेश से उच्च सदन में पहुंचना पार्टी के लिए अहम घटनाक्रम होगा। वहीं, कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार का नामांकन निरस्त होने के बाद विपक्ष ने निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
फिलहाल सभी की निगाहें 5 नवंबर पर टिकी हैं। नाम वापसी की समय-सीमा समाप्त होने के बाद निर्वाचन अधिकारी की ओर से अंतिम स्थिति स्पष्ट की जाएगी। यदि प्रक्रिया में कोई नया बदलाव नहीं होता है, तो हरदीप सिंह पुरी मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए जाएंगे।
इस तरह मध्य प्रदेश का यह राज्यसभा उपचुनाव अब मतदान से ज्यादा नामांकन की वैधता, निर्वाचन अधिकारी के फैसले और कांग्रेस की संभावित कानूनी चुनौती को लेकर चर्चा में है।




