राजशाही यूनिवर्सिटी में पत्रकारों और छात्रों पर हमला, चार पत्रकारों समेत 10 घायल

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बांग्लादेश। बांग्लादेश की राजशाही यूनिवर्सिटी में रविवार रात पत्रकारों और छात्रों पर कथित हमले की घटना सामने आने के बाद कैंपस की सुरक्षा और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। घटना विश्वविद्यालय के शहीद जियाउर रहमान हॉल के बाहर हुई, जहां प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जातीयवादी छात्र दल (Jatiyatabadi Chhatra Dal-JCD) के नेताओं और कार्यकर्ताओं के एक समूह ने पत्रकारों तथा छात्रों पर हमला किया। इस घटना में कम से कम 10 लोग घायल हुए, जिनमें चार कैंपस पत्रकार शामिल हैं। स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठनों ने घटना पर चिंता जताते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

हमले में घायल चार पत्रकारों की पहचान द डेली स्टार के राजशाही यूनिवर्सिटी संवाददाता और राजशाही यूनिवर्सिटी रिपोर्टर्स यूनिटी के अध्यक्ष नूर अहसान मृदुल, आगामीर समय के संवाददाता जाहिदुल इस्लाम, bdnews24.com के विश्वविद्यालय संवाददाता आरिफुज्जमां कोरबान और समकाल के संवाददाता मैनुल इस्लाम राजू के रूप में हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक, घायलों को शुरुआत में विश्वविद्यालय के मेडिकल सेंटर ले जाया गया, जहां उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया। बाद में घायल पत्रकारों को बेहतर इलाज के लिए राजशाही मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। जाहिदुल इस्लाम के सिर में गंभीर चोट लगने की भी रिपोर्ट सामने आई है।

मामले में जातीयवादी छात्र दल ने भी जांच की घोषणा की है। संगठन ने घटना की जांच के लिए दो सदस्यीय समिति गठित की है। समिति में केंद्रीय उपाध्यक्ष एबीएम इजाजुल कबीर रुएल और मंजुरुल आलम रियाद को शामिल किया गया है। संगठन की ओर से समिति को घटना की जांच कर 24 घंटे के भीतर केंद्रीय समिति को लिखित रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया। यह निर्णय संगठन के अध्यक्ष रकीबुल इस्लाम रकीब और महासचिव नासिर उद्दीन नासिर के निर्देश पर लिया गया। संगठन की ओर से कहा गया कि घटना के संबंध में मिली शिकायतों की जांच की जाएगी और जिम्मेदार पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल इस घटना की जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। जातीयवादी छात्र दल की जांच समिति की रिपोर्ट, विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई और पुलिस की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि घटना में कौन-कौन लोग शामिल थे और उनकी भूमिका क्या थी। वहीं घायल पत्रकारों और छात्रों के इलाज के साथ-साथ कैंपस में सामान्य स्थिति बनाए रखना भी विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने महत्वपूर्ण चुनौती है। घटना ने यह स्पष्ट किया है कि विश्वविद्यालय परिसर में किसी भी विवाद को हिंसा में बदलने से रोकने के लिए प्रशासनिक निगरानी, कानून-व्यवस्था और पत्रकारों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

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