नई दिल्ली। शारदीय नवरात्रि का हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रि के आठवें दिन को महाष्टमी या दुर्गा अष्टमी के नाम से जाना जाता है। इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की आराधना की जाती है। भक्त माता का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विशेष पूजा, आरती और कन्या पूजन करते हैं। वर्ष 2026 में महाष्टमी की पूजा की तारीख को लेकर श्रद्धालुओं के बीच 18 और 19 अक्टूबर का विकल्प सामने आया है।

महाष्टमी पर मां महागौरी की पूजा का महत्व
नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की उपासना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में मां महागौरी को शांति, पवित्रता, करुणा और सौम्यता का प्रतीक माना गया है। उनके स्वरूप का वर्णन अत्यंत उज्ज्वल और शांत रूप में किया जाता है। मां महागौरी को चार भुजाओं वाली देवी के रूप में दर्शाया जाता है। उनके हाथों में त्रिशूल और डमरू जैसे आयुध तथा प्रतीक बताए जाते हैं। उनका वाहन वृषभ माना जाता है।
मान्यता है कि मां महागौरी की पूजा करने से भक्तों को मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। श्रद्धालु अपने परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और कल्याण की कामना के साथ माता की आराधना करते हैं। नवरात्रि के दौरान अष्टमी को विशेष पूजा का दिन माना जाता है, इसलिए कई घरों और मंदिरों में इस अवसर पर विशेष धार्मिक आयोजन किए जाते हैं।
18 या 19 अक्टूबर, कब करें अष्टमी की पूजा?
शारदीय नवरात्रि 2026 में महाष्टमी की तारीख को लेकर श्रद्धालुओं को तिथि संबंधी जानकारी पर ध्यान देना चाहिए। दी गई जानकारी के मुताबिक, 18 अक्टूबर को अष्टमी की पूजा करना उचित बताया गया है। दूसरी ओर, पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, उदयातिथि को मानने वाले श्रद्धालु 19 अक्टूबर को भी अष्टमी की पूजा कर सकते हैं।
हिंदू पंचांग में तिथि की गणना सूर्योदय के सामान्य कैलेंडर से अलग होती है। इसी वजह से किसी धार्मिक तिथि का संबंध एक से अधिक अंग्रेजी कैलेंडर तारीखों से हो सकता है। उदयातिथि की परंपरा में सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि को विशेष महत्व दिया जाता है। हालांकि, व्रत, पूजा और धार्मिक अनुष्ठान के लिए अलग-अलग परंपराओं में नियमों का पालन किया जा सकता है।
महाष्टमी पर कैसे करें मां महागौरी की पूजा?
महाष्टमी के दिन भक्त सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और पूजा स्थल को साफ करते हैं। इसके बाद मां दुर्गा और मां महागौरी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर पूजा की शुरुआत की जाती है। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार फूल, अक्षत, धूप, दीप, फल और मिठाई अर्पित करते हैं।
पूजा के दौरान मां महागौरी का ध्यान किया जाता है और उनसे परिवार के कल्याण तथा सुख-शांति की प्रार्थना की जाती है। इसके बाद माता की आरती की जाती है। कई श्रद्धालु नवरात्रि के नौ दिनों तक व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग अष्टमी या नवमी के दिन विशेष पूजा करते हैं। व्रत रखने वाले लोगों को अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार ही उपवास करना चाहिए।
पूजा से पहले शुभ मुहूर्त की पुष्टि जरूरी
शारदीय नवरात्रि 2026 की महाष्टमी पर पूजा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए तारीख के साथ शुभ मुहूर्त की जानकारी भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध विवरण में 18 अक्टूबर को पूजा के लिए उचित बताया गया है, जबकि उदयातिथि मानने वालों के लिए 19 अक्टूबर को भी पूजा का विकल्प दिया गया है। हालांकि, सटीक पूजा मुहूर्त और तिथि के समय की पुष्टि के लिए स्थानीय पंचांग देखना आवश्यक है।
श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा और पुरोहित के मार्गदर्शन के अनुसार मां महागौरी की पूजा, आरती और कन्या पूजन कर सकते हैं। महाष्टमी का मुख्य संदेश श्रद्धा, भक्ति, संयम और सम्मान से जुड़ा है। माता की आराधना के साथ जरूरतमंदों की सहायता करना और बालिकाओं के प्रति सम्मान का भाव रखना भी इस पर्व की भावना को सार्थक बनाता है।




