सनी देओल की फिल्म ‘सूर्या- अंत से आरंभ तक’ विवादों में, IMA ने सूचना एवं प्रसारण मंत्री से की समीक्षा की मांग

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मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल की आगामी फिल्म ‘सूर्या- अंत से आरंभ तक’ (Suryaa- Ant Se Aarambh Tak) का टीजर सामने आने के बाद यह फिल्म चर्चा में आ गई है। फिल्म के प्रमोशनल वीडियो में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े भ्रष्टाचार और मेडिकल व्यवस्था की कथित अनियमितताओं को दिखाया गया है। टीजर में सनी देओल का किरदार इस व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाता नजर आता है। हालांकि, फिल्म की इस विषयवस्तु को लेकर अब चिकित्सा जगत के एक प्रमुख संगठन ने चिंता जाहिर की है।

टीजर में क्या दिखाया गया है?

फिल्म के टीजर में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भ्रष्टाचार को प्रमुख विषय के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसमें सनी देओल का किरदार कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाता दिखाई देता है। फिल्म की विषयवस्तु से संकेत मिलता है कि इसकी कहानी स्वास्थ्य व्यवस्था में मौजूद समस्याओं और उनके खिलाफ संघर्ष के इर्द-गिर्द आगे बढ़ सकती है।

फिल्म को सच्ची घटनाओं से प्रेरित बताया गया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि कहानी किन विशिष्ट घटनाओं पर आधारित है और वास्तविक घटनाओं तथा काल्पनिक कथानक के बीच किस प्रकार का संबंध रखा गया है। इसलिए फिल्म के टीजर में दिखाई गई परिस्थितियों को किसी खास अस्पताल, चिकित्सक या वास्तविक मामले का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।

सामाजिक मुद्दों पर आधारित फिल्मों में अक्सर व्यवस्था की कमियों, आम लोगों की परेशानियों और जवाबदेही जैसे विषयों को नाटकीय अंदाज में प्रस्तुत किया जाता है। लेकिन जब किसी फिल्म का विषय चिकित्सा जैसा संवेदनशील क्षेत्र हो, तो उसके चित्रण को लेकर संबंधित पेशेवर समुदाय की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

IMA ने अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर जताई चिंता

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर फिल्म के प्रमोशनल कंटेंट पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। संगठन की मुख्य चिंता यह है कि फिल्म में मेडिकल प्रोफेशन को किस तरह दिखाया गया है और ऐसे चित्रण का समाज पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।

IMA ने अपने पत्र में कहा कि फिल्म ‘सूर्या- अंत से आरंभ तक’ में चिकित्सा पेशे को प्रस्तुत करने के तरीके को लेकर उसे गहरी चिंता है। संगठन के मुताबिक, फिल्म की प्रचार सामग्री स्वास्थ्य सेवाओं में भ्रष्टाचार, चिकित्सा पेशेवरों के खिलाफ हिंसा तथा स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा जैसे मुद्दों से जुड़ी चिंताएं पैदा करती है।

IMA ने यह भी रेखांकित किया कि इस प्रकार की सामग्री का आम लोगों के भरोसे पर संभावित प्रभाव पड़ सकता है। संगठन की मांग है कि संबंधित स्तर पर फिल्म की समीक्षा की जाए, ताकि इन चिंताओं पर विचार किया जा सके।

कुल मिलाकर, यह विवाद केवल एक फिल्म के टीजर तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही, चिकित्सा पेशे के प्रति जनविश्वास, डॉक्टरों की सुरक्षा और सिनेमा की सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विषय चर्चा में आए हैं। आगे की घटनाएं तय करेंगी कि यह मामला केवल समीक्षा की मांग तक सीमित रहता है या इस पर कोई औपचारिक कदम भी उठाया जाता है।

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