मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर मुंबई के जुहू इलाके में हुई फायरिंग की घटना के बाद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है। इस मामले में कथित तौर पर बिश्नोई गिरोह से जुड़े लोगों की ओर से जिम्मेदारी लेने के दावे सामने आए हैं। घटना के बाद जांच एजेंसियों के सामने एक अहम सवाल है कि गुजरात की साबरमती सेंट्रल जेल की हाई-सिक्योरिटी सेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई का नेटवर्क बाहर किस तरह काम कर रहा है और इसके संचालन में किन लोगों की भूमिका बताई जा रही है।
क्या है ‘शैडो कैबिनेट’ का दावा?
‘शैडो कैबिनेट’ शब्द का इस्तेमाल यहां कथित तौर पर ऐसे सहयोगियों के समूह के लिए किया गया है, जो जेल में बंद सरगना की अनुपस्थिति में नेटवर्क के अलग-अलग हिस्सों का संचालन करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस समूह में कुछ लोग भर्ती, संपर्क, काम सौंपने और लॉजिस्टिक्स जैसे कार्यों का समन्वय करते हैं, जबकि दूसरे समूह को रणनीतिक योजना, वित्तीय प्रबंधन और संभावित निशानों की पहचान से जोड़ा गया है।
इस तरह की कथित संरचना का उद्देश्य नेटवर्क के अलग-अलग हिस्सों को एक-दूसरे से जोड़कर गतिविधियां जारी रखना हो सकता है। लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि ‘शैडो कैबिनेट’ कोई आधिकारिक सरकारी पद या कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त संगठनात्मक व्यवस्था नहीं है। यह मीडिया रिपोर्ट में इस्तेमाल किया गया वर्णन है, जिसके दावों की पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रिया से ही हो सकती है।
किन लोगों के नाम रिपोर्ट में आए?
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में लॉरेंस बिश्नोई के कथित सहयोगियों के तौर पर टाइसन बिश्नोई, अनिल पंडित, हरि बॉक्सर, हरमन संधू और हिमांशु सोनीपत के नाम बताए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन्हें नेटवर्क के मुख्य संचालन समूह से जोड़ा गया है। भर्ती, गतिविधियों के समन्वय और लॉजिस्टिक्स से संबंधित भूमिकाओं का उल्लेख भी इसी संदर्भ में किया गया है।
रिपोर्ट में आरजू बिश्नोई, शुभम लोनकर और रंदीप मलिक के नाम भी एक अन्य समूह के सदस्यों के तौर पर सामने आए हैं। इस समूह को कथित रूप से योजना बनाने, वित्तीय व्यवस्था और लक्ष्य तय करने जैसे कार्यों से जोड़ा गया है। गोल्डी ढिल्लों का नाम भी नेटवर्क के संदर्भ में आया है, हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी जांच अभियान के बाद उसके भूमिगत होने की बात कही गई है।
साबरमती जेल में बंद होने के बावजूद नेटवर्क पर सवाल
लॉरेंस बिश्नोई गुजरात की साबरमती सेंट्रल जेल में बंद है। इसके बावजूद उसके कथित आपराधिक नेटवर्क की गतिविधियों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग की घटना ने इस बहस को फिर तेज कर दिया है कि जेल में बंद किसी व्यक्ति के सहयोगी बाहर रहकर कथित गतिविधियों का संचालन कैसे कर सकते हैं।
ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां संपर्क के संभावित माध्यमों, सहयोगियों के आपसी संबंधों, वित्तीय लेन-देन और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर सकती हैं। यदि किसी अपराध में विदेश में बैठे लोगों की भूमिका का संदेह हो, तो संबंधित देशों के अधिकारियों के साथ समन्वय भी जांच का हिस्सा बन सकता है। हालांकि, किसी खास मामले में वास्तव में कौन-सा तरीका इस्तेमाल हुआ, इसका निष्कर्ष जांच के प्रमाण सामने आने के बाद ही निकाला जा सकता है।
जेल में बंद होने का अर्थ यह नहीं कि किसी आरोपी से जुड़े हर व्यक्ति की गतिविधि अपने आप रुक जाएगी। दूसरी ओर, किसी गिरोह की कथित गतिविधियों के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना भी उचित नहीं होगा कि जेल प्रशासन की मिलीभगत या सुरक्षा में चूक निश्चित रूप से हुई है। ऐसे निष्कर्षों के लिए अलग से प्रमाण जरूरी हैं।





