Viral News: ₹3,300 करोड़ के मालिक BJP विधायक बने भिखारी! गंदे कपड़े पहन घाटकोपर की सड़कों पर मांगे पैसे, जानिए क्यों बदला रूप

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drnewsindia.com / डिजिटल डेस्क | मुंबई: मुंबई के घाटकोपर (पूर्व) से भाजपा विधायक और रियल एस्टेट कारोबारी पराग शाह का एक अनोखा वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। 2024 के चुनावी हलफनामे के मुताबिक ₹3,383 करोड़ से अधिक की संपत्ति के मालिक पराग शाह घाटकोपर की सड़कों पर फटे-पुराने और गंदे कपड़े पहनकर भिखारी के रूप में भटकते नजर आए।

🎭 मेक-अप से बदला रूप, झाड़ू और झोला लेकर पहुंचे रेलवे स्टेशन

पराग शाह ने समाज की हकीकत और जरूरतमंदों के दर्द को करीब से महसूस करने के लिए यह प्रयोग किया। उन्होंने इस दौरान कई अलग-अलग स्थितियों का सामना किया:

  • भिखारी का वेश: मेक-अप के जरिए अपना हुलिया बदलने के बाद हाथ में झाड़ू, झोला और डंडा लेकर वे सड़क पर उतरे।
  • महिला पुलिसकर्मी ने खाना देने से किया इनकार: घाटकोपर रेलवे स्टेशन पर जब उन्होंने एक महिला पुलिसकर्मी से खाने के लिए मदद मांगी, तो उन्होंने साफ मना कर दिया।
  • दुकानदार ने दिया खाना: आगे बढ़ने पर एक दुकान वाले ने उन्हें खाने की चीज दी, जिसे उन्होंने वहीं सड़क किनारे बैठकर खाया।
  • चश्मे का तोहफा: रास्ते में एक शख्स ने उन्हें पहनने के लिए अपना चश्मा दे दिया, जिसके जवाब में पराग ने सिर झुकाकर उसका आभार जताया।

🧘‍♂️ जैन मुनि के कहने पर हुआ ‘अहंकार मुक्ति’ का एक्सपेरिमेंट

पराग शाह ने स्पष्ट किया कि यह कोई राजनीतिक स्टंट या प्रचार नहीं था, बल्कि जैन धर्मगुरु राष्ट्रसंत नम्रमुनि महाराज की सीख का हिस्सा था।

“किसी को यह भ्रम था कि हर कोई उन्हें उनकी आवाज या चेहरा देखकर कहीं भी पहचान लेगा। हमने उन्हें दुनिया की कड़वी सच्चाई से रूबरू कराने के लिए यह विचार दिया। इंसान की पहचान उसके वैभव से होती है, जब वैभव न हो तो अपने ही अपार्टमेंट का वॉचमैन उसे बाहर कर देता है।”

राष्ट्रसंत श्री नम्रमुनि महाराज

🎶 10 साल पहले गायक सोनू निगम भी कर चुके हैं ऐसा प्रयोग

सड़क पर पहचान बदलकर निकलने का यह पहला मामला नहीं है। मई 2016 में मशहूर सिंगर सोनू निगम ने भी मुंबई के जुहू इलाके में भिखारी का वेश धरकर एक सोशल एक्सपेरिमेंट किया था:

  • जुहू की सड़कों पर गाया गाना: सोनू निगम ने चेहरा बदलकर सड़क किनारे बैठकर गिटार बजाते हुए गाने गाए।
  • कपड़ों से आंकती है दुनिया: राहगीर उनकी सुरीली आवाज सुनकर रुकते रहे और तारीफ करते रहे, लेकिन कपड़ों की वजह से कोई उन्हें पहचान नहीं पाया।
  • सीख: इस एक्सपेरिमेंट का मकसद समाज को यह दिखाना था कि लोग किसी इंसान की प्रतिभा और पहचान को उसके कपड़ों व सामाजिक स्थिति से तय करते हैं।

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