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अशोकनगर। जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर बुधवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। ‘आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका एवं मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता महासंघ’ के बैनर तले एकजुट हुई महिलाओं ने पहले धरना दिया और फिर रैली निकालकर तहसीलदार को मुख्यमंत्री व कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा।
“काम सरकारी, तो सुविधाएं भी मिलें सरकारी”
सौंपे गए ज्ञापन में कार्यकर्ताओं ने दर्द बयां करते हुए कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग में कार्यरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं बरसों से शासन की हर छोटी-बड़ी जनकल्याणकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर पहुंचा रही हैं। जन्म पंजीयन से लेकर पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सामाजिक योजनाओं के क्रियान्वयन में उनका योगदान सबसे अहम है। इसके बावजूद उन्हें आज तक नियमित कर्मचारियों जैसी मूलभूत सुविधाएं और सुरक्षा नहीं मिल रही है।

“बीएलओ ड्यूटी से लेकर सर्वे तक… मना करो तो मिलती है नौकरी से निकालने की धमकी”
महासंघ ने स्थानीय प्रशासन और विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मूल विभागीय कार्यों के अलावा उनसे कई अतिरिक्त काम जबरन कराए जा रहे हैं, जिनमें शामिल हैं:
- जनगणना और शौचालय सर्वे
- लाड़ली बहना योजना और ग्रामसभा के काम
- मतदाता पुनरीक्षण और बीएलओ (BLO) ड्यूटी
- फायलेरिया और मलेरिया उन्मूलन अभियान
कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यदि वे इन अतिरिक्त कार्यों में सहयोग नहीं कर पाती हैं, तो अधिकारी उन्हें सेवा से पृथक (नौकरी से निकालने) करने की धमकी देते हैं। इससे उनका मूल काम प्रभावित होता है और मानसिक प्रताड़ना के साथ-साथ मानदेय कटौती का सामना भी करना पड़ता है।
मुख्यमंत्री के नाम: ये हैं प्रमुख 13 सूत्रीय मांगें
- आंगनबाड़ी कर्मियों को राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
- सेवानिवृत्ति (Retirement) के बाद न्यूनतम 5,000 रुपये मासिक पेंशन लागू हो।
- सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाकर 65 वर्ष की जाए।
- मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि और अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान हो।
- ड्यूटी के दौरान मृत्यु होने पर परिवार को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिले।
- टीएचआर (THR) की नियमित आपूर्ति हो और पदोन्नति में आयु सीमा समाप्त की जाए।
- विभागीय कार्यों के अलावा अन्य सभी गैर-विभागीय ड्यूटी से पूरी तरह मुक्त रखा जाए।

कलेक्टर के नाम: स्थानीय स्तर की मांगें
कलेक्टर को सौंपे गए एक अलग ज्ञापन में स्थानीय समस्याओं के निराकरण की मांग की गई:
- प्रत्येक माह की 5 तारीख तक मानदेय का भुगतान अनिवार्य रूप से हो।
- बिना किसी वैध कारण के काटे गए पुराने मानदेय को वापस दिया जाए।
- किराए के भवनों का बकाया किराया तुरंत भुगतान हो और नए भवनों का निर्माण तेज किया जाए।
- सक्षम आंगनबाड़ियों में बिजली (विद्युत) की व्यवस्था की जाए और भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों पर कड़ी कार्रवाई हो।
महासंघ की दो टूक चेतावनी: प्रदर्शन के दौरान मौजूद महासंघ की पदाधिकारियों ने साफ कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर रीढ़ की हड्डी हैं। यदि सरकार और प्रशासन ने उनकी इन जायज मांगों पर जल्द ही कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और उग्र तथा व्यापक किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन की होगी।





