MP कैबिनेट का बड़ा फैसला: अब महिला-बाल विकास विभाग संभालेगा ₹1200 करोड़ का ‘टेक होम राशन’; जगदीशपुर में होगी अगली बैठक, UCC मसौदे को मिलेगी मंजूरी

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drnewsindia.com

State & Political Desk (14 July 2026): मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में कई बड़े और दूरगामी फैसले लिए गए हैं। सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों में 6 महीने से 3 साल तक के बच्चों को मिलने वाले ₹1200 करोड़ के सालाना बजट वाले ‘टेक होम राशन’ (THR) की पूरी व्यवस्था को बदलने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। अब यह जिम्मेदारी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से वापस लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग को सौंप दी गई है।

इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने एक और बड़ा राजनीतिक संकेत देते हुए बताया कि भोपाल के विधानसभा सत्र (21 जुलाई से शुरू) से ठीक पहले 18 जुलाई को भोपाल जिले के ऐतिहासिक ‘जगदीशपुर’ (पूर्व नाम इस्लाम नगर) में कैबिनेट की विशेष बैठक होगी, जिसमें समान नागरिक संहिता (UCC) के मसौदे को मंजूरी देकर इसे विधानसभा में विधेयक के रूप में पेश करने का रास्ता साफ किया जाएगा।

📌 कैबिनेट बैठक के महा-अपडेट्स (Key Highlights)

  • 🥛 टेक होम राशन में फेरबदल: आजीविका मिशन (NRLM) की व्यवस्था खत्म; अब महिला एवं बाल विकास विभाग के अधीन एमपी एग्रो (MP Agro) के 7 प्लांटों में तैयार होगा न्यूट्रिशन आहार।
  • 📜 UCC पर फाइनल मुहर 18 को: जगदीशपुर में होने वाली अगली कैबिनेट बैठक में यूनिफॉर्म सिविल कोड के ड्राफ्ट को दी जाएगी मंजूरी।
  • 💻 ‘दृष्टि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म’ लॉन्च: पंचायतों के ऑडिट को पारदर्शी बनाने के लिए नया सॉफ्टवेयर और ‘पंचायत दर्पण पोर्टल’ पर पेमेंट गेटवे की शुरुआत।
  • 🌾 योजनाएं 2031 तक बढ़ीं: वित्त और सिंचाई विभाग की विभिन्न महत्वपूर्ण परियोजनाओं को साल 2031 तक जारी रखने की मंजूरी।
  • 🌱 मिशन ग्रीन इंदौर: बारिश के मौसम में पूरे प्रदेश में मेगा पौधरोपण अभियान; अकेले इंदौर में 21 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य (1 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं)।

🔍 डिटेल रिपोर्ट: क्यों वापस ली गई स्व-सहायता समूहों से जिम्मेदारी?

पहले यह व्यवस्था पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधीन आने वाले राज्य आजीविका मिशन के महिला स्व-सहायता समूहों (SHG) के फेडरेशन द्वारा चलाई जा रही थी। सरकार ने इसे वापस लेने के पीछे 3 बड़े प्रशासनिक तर्क दिए हैं:

  1. सप्लाई चेन का ठप होना: मौजूदा सात प्लांट समय पर राशन की सप्लाई नहीं कर पा रहे थे। आंगनबाड़ियों तक टेक होम राशन दो-दो महीने की देरी से पहुंच रहा था।
  2. भारी-भरकम घाटा: इस लचर व्यवस्था के कारण सालाना 40 से 50 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा था। पिछले 4 साल में सरकार को ₹300 करोड़ से अधिक का घाटा उठाना पड़ा है।
  3. क्वालिटी में सुधार: सरकार का दावा है कि नियमों और मापदंडों के अनुसार हाई-टेक प्लांटों में राशन तैयार कर पैकिंग और डिस्ट्रीब्यूशन को बेहतर किया जाएगा।

अब यहाँ बनेगा राशन: नई व्यवस्था के तहत मध्य प्रदेश के 7 सेंटर्स (मंडला, सागर, नर्मदापुरम, देवास, धार, रीवा और शिवपुरी) में स्थित एमपी एग्रो के प्लांटों में पोषण आहार तैयार किया जाएगा।

⚠️ नई व्यवस्था से खड़े हुए 6 बड़े सुलगते सवाल!

इस बड़े बदलाव के बाद अब कई नीतिगत और सामाजिक सवाल भी सामने आने लगे हैं:

  • रोजगार पर संकट: महिला स्व-सहायता समूहों के प्लांटों में काम कर रही हजारों महिलाओं के रोजगार का अब क्या होगा?
  • अधिकारों की लड़ाई: स्वतंत्र रूप से काम कर रहे इन प्लांट फेडरेशन्स को क्या नियमानुसार महिला बाल विकास विभाग को सौंपा जा सकता है?
  • ठेका प्रथा की आशंका: क्या कॉर्पोरेशन (एमपी एग्रो) के जरिए यह काम दोबारा बड़े ठेकेदारों, कांट्रैक्टर्स या कॉरपोरेट घरानों के हाथों में तो नहीं चला जाएगा?
  • महिला सशक्तिकरण का क्या?: जमीनी स्तर पर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की मूल अवधारणा को इससे झटका लग सकता है।
  • बजट का गणित: केंद्र सरकार प्रति हितग्राही औसतन ₹8 दे रही है, जबकि खर्च ₹10 आ रहा है। यदि केंद्र ने राशि नहीं बढ़ाई, तो यह व्यवस्था आगे कैसे फायदेमंद होगी?

🕵️ इतिहास के पन्ने: 428 करोड़ की गड़बड़ी और कागजों पर बंटा राशन

टेक होम राशन योजना हमेशा से मध्य प्रदेश की राजनीति में विवादों और घोटालों का केंद्र रही है। इसी के चलते यह फैसला लिया गया है:

  • CAG का खुलासा: साल 2018 से 2021 के बीच कैग (CAG) ने इस योजना में ₹428 करोड़ की भारी अनियमितताएं उजागर की थीं।
  • कागजी घोटाला (2024-25): हालिया रिपोर्ट्स में सामने आया कि 1100 टन राशन सिर्फ कागजों पर बांट दिया गया और ₹110 करोड़ का फर्जी भुगतान हुआ। जांच में स्कूटर और बाइक के नंबरों को ट्रक बताकर परिवहन की राशि उठा ली गई थी।
  • फर्जी हितग्राही: साल 2025 में हुए डिजिटल केवाईसी (KYC) के दौरान प्रदेश में 24 लाख अपात्र और फर्जी हितग्राही मिले, जिनमें सबसे ज्यादा मामले झाबुआ और शिवपुरी जिले के थे।

🔄 2019 से अब तक: 5 बार बदला ‘पोषण आहार’ का मालिक

कालखंड (Year)किसके हाथ में थी कमान?मुख्य प्रशासनिक व्यवस्था
2018 से पहलेएमपी एग्रो (शिवराज सरकार)निजी ठेकेदारों के जरिए टीएचआर तैयार होता था।
2018 (उत्तरार्ध)महिला स्व-सहायता समूहहाई कोर्ट (इंदौर बेंच) के ऐतिहासिक विकेंद्रीकरण आदेश के बाद SHG को काम मिला।
2020एमपी एग्रो (कमलनाथ सरकार)व्यवस्था को बदलते हुए काम दोबारा कॉर्पोरेशन को सौंप दिया गया।
2022राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (SRLM)समूहों को मजबूत करने के लिए फिर से फेडरेशन को काम मिला।
2026 (वर्तमान)महिला एवं बाल विकास विभाग (मोहन सरकार)पुराने घाटे और घोटालों को देखते हुए आजीविका मिशन से काम वापस लिया गया।

💼 जीएसटी और ‘युवा वर्ष 2027’ को लेकर भी बड़े निर्णय

  • कारोबारियों को राहत: जीएसटी काउंसिल की सिफारिश पर जीएसटी अपीलीय बोर्ड का गठन होगा। इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के लिए कागजी प्रक्रिया को बेहद सरल बनाया जा रहा है, जिससे एमएसएमई (MSME) सेक्टर के पास नकदी (Liquidity) बढ़ेगी।
  • युवा वर्ष 2027: मध्य प्रदेश सरकार साल 2027 को ‘युवा वर्ष’ के रूप में मनाएगी। इसके लिए दिसंबर 2026 तक प्रदेश के युवाओं और आम जनता से सीधे सुझाव मांगे जाएंगे, जिसके आधार पर नई योजनाएं लॉन्च होंगी।
  • मंत्रियों को सख्त निर्देश: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी मंत्रियों को हिदायत दी है कि वे आगामी विधानसभा सत्र में विपक्ष के हर सवाल का सटीक और तथ्यात्मक जवाब देने के लिए पूरी तैयारी के साथ उतरें।

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