आरएनटीयू में ‘प्रणति पर्व’: गुरूदेव टैगोर की विरासत को किया नमन, कविताओं और कला से सजी शाम

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भोपाल | रबीन्द्रनाथ टैगोर यूनिवर्सिटी (RNTU) के ‘मुक्तधारा’ सभागार में गुरूदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती के उपलक्ष्य में ‘प्रणति पर्व’ का गरिमामय आयोजन किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने गुरूदेव के जीवन दर्शन, शिक्षा और कला के प्रति उनके अटूट प्रेम को याद किया।

✨ मुख्य आकर्षण: कला और संस्कृति का संगम

  • पुष्पांजलि और राष्ट्रगान: कार्यक्रम का शुभारंभ गुरूदेव की प्रतिमा पर सामूहिक पुष्पांजलि और उनके द्वारा रचित राष्ट्रगान के साथ हुआ।
  • पुस्तिका लोकार्पण: टैगोर के गीतों पर आधारित संगीत-नृत्य रूपक ‘गीतांजलि’ पुस्तिका का विमोचन किया गया।
  • काव्य पाठ: टैगोर नाट्य विद्यालय के छात्रों ने गुरूदेव की कालजयी कविताओं का भावपूर्ण पाठ किया, जिसने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

💬 “कला ज्ञान की प्रयोगशाला है”

कार्यक्रम के दौरान कुलवंती और विशेषज्ञों ने गुरूदेव के विचारों को साझा किया:

  • कुलगुरू डॉ. आर.पी. दुबे: उन्होंने बताया कि टैगोर मानवता को सबसे बड़ा मूल्य मानते थे।
  • निदेशक विनय उपाध्याय: उन्होंने टैगोर कला केन्द्र द्वारा स्थापित पुस्तकालय को उनकी विरासत को समझने की दिशा में एक बड़ी सौगात बताया।
  • डॉ. अदिति चतुर्वेदी वत्स: उन्होंने शिक्षा और सृजन में गुरूदेव के क्रांतिकारी प्रयोगों पर प्रकाश डाला।

🎭 युवाओं की भागीदारी

नाट्य विद्यालय के छात्र आशुतोष, लवकुश, आर्यन, विक्रम और अन्य साथियों ने प्रेम व प्रकृति से सराबोर रचनाओं की प्रस्तुति दी। इस आत्मीय प्रसंग में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक, अधिकारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

संदेश: गुरूदेव का जीवन हमें सिखाता है कि कला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन को समग्रता में देखने का एक माध्यम है।

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