आष्टा में भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा: अलीपुर के बांसवेड़ा मंदिर से नगर भ्रमण पर निकले महाप्रभु; एक रंग के कपड़ों में झूमते नजर आए श्रद्धालु

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Ashta Desk (16 July 2026): सीहोर जिले के आष्टा अनुभाग में गुरुवार शाम को आस्था और सनातनी संस्कृति का एक अद्भुत नजारा देखने को मिला। पार्वती नदी के पवित्र तट पर स्थित अलीपुर क्षेत्र के प्रसिद्ध बांसवेड़ा मंदिर परिसर से भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली गई। महाप्रभु जगन्नाथ अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलदाऊ के साथ नगर भ्रमण पर निकले, जिनके दर्शनों के लिए आष्टा की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा।

📌 रथयात्रा की मुख्य बातें (Key Highlights)

  • 🛕 यात्रा का शुभारंभ: गुरुवार शाम करीब 6:00 बजे अलीपुर के ऐतिहासिक बांसवेड़ा मंदिर परिसर से हुआ श्रीगणेश।
  • 🪵 सुसज्जित रथ: भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा को आकर्षक ढंग से सजाए गए रथ में विराजमान किया गया।
  • 👗 यूनिफॉर्म ड्रेस कोड: यात्रा में शामिल युवा, महिलाएं और बुजुर्ग श्रद्धालु एक ही रंग के वस्त्र (थीम आधारित) धारण कर भजनों पर झूमते दिखे।
  • 🌸 फूलों की बारिश: सकल हिंदू समाज और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने मार्ग में मंच बनाकर रथ पर पुष्पवर्षा की।

🥁 मंत्रोच्चार और ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ शुरू हुआ सफर

गुरुवार शाम को जैसे ही घड़ी में 6 बजे, बांसवेड़ा मंदिर परिसर वैदिक मंत्रोच्चार और शंखनाद से गूंज उठा। पारंपरिक बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ों और अखाड़ों के हैरतअंगेज करतबों के साथ रथयात्रा आगे बढ़ी। रथ की डोर खींचने और भगवान के रथ के सारथी बनने के लिए श्रद्धालुओं में भारी होड़ देखी गई। पूरा अलीपुर क्षेत्र ‘जय जगन्नाथ’ और ‘हरे कृष्णा’ के जयकारों से भक्तिमय हो गया।

🤲 नगर की सुख-समृद्धि के लिए हुई महाआरती, महिलाओं ने लिया आशीर्वाद

रथयात्रा के दौरान शहर के प्रमुख चौराहों पर भगवान का पलक-पावड़े बिछाकर स्वागत किया गया। जगह-जगह श्रद्धालुओं के लिए शीतल पेय, जल और महाप्रसादी के स्टॉल लगाए गए थे।

कल्याण की प्रार्थना: सकल हिंदू समाज के अध्यक्ष नरेंद्र कुशवाहा और मुकेश नामदेव ने आयोजन समिति के साथ मिलकर भगवान जगन्नाथ की विशेष पूजा-अर्चना की और भव्य महाआरती उतारी। उन्होंने भगवान से आष्टा नगरवासियों की सुख, समृद्धि, अच्छी फसल और कल्याण की कामना की। इस दौरान बड़ी संख्या में मौजूद मातृशक्ति और महिलाओं ने भगवान को श्रीफल (नारियल) भेंट कर खुशहाली का आशीर्वाद लिया।

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